लाइफ स्टाइल

जोड़ों के दर्द को न करें नजरअंदाज: विश्व आर्थराइटिस दिवस: बार-बार होने वाले दर्द, अकड़न और सूजन को नजरअंदाज न करें

Pradeep Beedawat · 12 अक्टूबर 2026, 07:36 शाम
विश्व आर्थराइटिस दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि जोड़ों में बार-बार होने वाले दर्द, सुबह की अकड़न, सूजन और सामान्य गतिविधियों में परेशानी को बढ़ती उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दिलीप मेहता ने समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया।

जयपुर, 12 अक्टूबर 2026। जोड़ों के दर्द को अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा, लंबे समय तक काम करने का परिणाम या रोजमर्रा की गतिविधियों से होने वाला खिंचाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाला दर्द, अकड़न अथवा सूजन जोड़ों से जुड़ी किसी अंतर्निहित बीमारी का संकेत हो सकती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

12 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व आर्थराइटिस दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार के महत्व पर जोर दिया। इस वर्ष की थीम ‘अपने सपनों को साकार करें’ यानी ‘Achieve Your Dreams’ बताई गई है।

यह थीम रूमेटिक एवं मस्कुलोस्केलेटल बीमारियों से जूझ रहे लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को सामने लाती है। इसका संदेश है कि समय पर उपचार, चिकित्सकीय मार्गदर्शन और उचित सहयोग से लोगों को सक्रिय रहने तथा अपने लिए महत्वपूर्ण गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिल सकती है।

जोड़ों के दर्द को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा न मानें

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दिलीप मेहता ने कहा कि जोड़ों के दर्द को स्वतः बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा नहीं मान लेना चाहिए। विशेष रूप से तब, जब दर्द लगातार बना रहे या रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न करने लगे।

“समय पर निदान और उचित उपचार से जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने तथा लोगों को सक्रिय जीवन जीने में मदद मिल सकती है।”

उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने से बीमारी की प्रकृति समझने और उपचार की उचित योजना बनाने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

अधिक शारीरिक मेहनत के बाद होने वाली कभी-कभार की परेशानी सामान्यतः आराम करने से कम हो सकती है। हालांकि, कुछ लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार सामने आएं तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

गठिया केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं

गठिया यानी आर्थराइटिस एक व्यापक शब्द है। इसके अंतर्गत जोड़ों और उनके आसपास मौजूद ऊतकों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियां शामिल होती हैं। इसके अलग-अलग प्रकारों के लक्षण और उपचार भी अलग हो सकते हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस उम्र बढ़ने के साथ अधिक सामान्य हो सकता है, लेकिन गठिया के सूजन संबंधी प्रकार युवाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए कम उम्र में होने वाले लगातार दर्द, सूजन और अकड़न को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जोड़ों में पहले लगी चोट, अधिक वजन, बार-बार एक जैसी शारीरिक गतिविधियां करने से पड़ने वाला दबाव, कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां और आनुवंशिक कारक गठिया का जोखिम बढ़ा सकते हैं। लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, इसलिए स्वयं निदान करने के बजाय उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।

जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए उपयोगी सुझाव

समय पर पहचान से सक्रिय जीवन में मिल सकती है मदद

विशेषज्ञों के अनुसार जोड़ों से जुड़ी बीमारी की समय पर पहचान का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि जोड़ की गति और कार्यक्षमता बनाए रखना भी है। उपचार व्यक्ति की बीमारी, उम्र, जीवनशैली और स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

लगातार दर्द होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सही कारण जानने और उचित उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

चिकित्सकीय अस्वीकरण: यह समाचार सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे व्यक्तिगत निदान या उपचार का विकल्प न मानें। लगातार दर्द, सूजन, अकड़न, बुखार, चोट अथवा अचानक चलने-फिरने में कठिनाई होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)