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राजस्थान

नारी शक्ति वंदन पर विपक्ष का घेराव: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष का दोहरा रवैया उजागर: डॉ. अलका गुर्जर ने महिला आरक्षण पर साधा तीखा निशाना

Pradeep Beedawat

भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से डरता है।

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HIGHLIGHTS

  • डॉ. अलका गुर्जर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के दोहरे चरित्र को जनता के सामने उजागर किया।
  • विपक्ष को महिलाओं के वोट तो चाहिए लेकिन संसद में उनकी सक्रिय भागीदारी स्वीकार नहीं है।
  • परिवारवाद की राजनीति कमजोर होने के डर से विपक्षी दल महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
  • 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से विपक्ष को लोकतंत्र खतरे में नजर आने लगा है जो कि उनकी हताशा दर्शाता है।
alka gurjar slams opposition on nari shakti vandan adhiniyam

जयपुर | भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का 'महिला सशक्तिकरण' केवल भाषणों तक ही सीमित है और हकीकत में वे इसके विरोधी हैं। डॉ. गुर्जर के अनुसार, जो दल दशकों तक महिला आरक्षण बिल की बातें करते थे, वे इसे वास्तविकता में बदलते देख असहज हो गए हैं। जब सदन में इसे पारित करने का समय आया, तो विपक्ष ने हंगामा कर बाधा उत्पन्न की।

विपक्ष का दोहरा चरित्र उजागर

डॉ. अलका गुर्जर ने आरोप लगाया कि विपक्ष को महिलाओं के वोट तो चाहिए, लेकिन उन्हें संसद में बराबर की भागीदारी देना स्वीकार नहीं है। यह उनकी संकीर्ण मानसिकता और दोहरे चरित्र को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने कहा कि 'पहले परिवार, फिर अन्य' की सोच रखने वाले दल कभी नहीं चाहते कि देश की साधारण बेटियां निर्णय लेने वाली मुख्यधारा तक पहुंचें। वे महिलाओं को नीति निर्माण की भूमिका में नहीं देखना चाहते हैं।

परिवारवाद बनाम सशक्तिकरण

विपक्ष को गहरा डर है कि यदि गांव-गरीब और सामान्य परिवारों की महिलाएं संसद तक पहुंचेंगी, तो उनकी परिवारवाद वाली राजनीति कमजोर हो जाएगी। इसीलिए वे महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं और नए बहाने ढूंढ रहे हैं। डॉ. गुर्जर ने कहा कि विपक्षी दलों को 33 प्रतिशत आरक्षण से अब लोकतंत्र खतरे में नजर आता है। जबकि वास्तविकता यह है कि उन्हें इस बिल का श्रेय वर्तमान सरकार को मिलने से भारी आपत्ति है।

जागरूक हो रही देश की मातृशक्ति

देश की मातृशक्ति अब जागरूक हो चुकी है और विपक्ष का असली चेहरा पहचान चुकी है। आने वाले समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से महिलाएं इस दोहरे रवैये का कड़ा जवाब देंगी। एक ओर ये दल महिला सम्मेलनों का बड़ा आयोजन करते हैं, वहीं दूसरी ओर सदन में महिला हितों के विधेयकों का विरोध करते हैं। यह विरोधाभास अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है और इसे छिपाया नहीं जा सकता।डॉ. गुर्जर ने विश्वास जताया कि भविष्य में होने वाले लोकतांत्रिक निर्णयों में महिलाओं की इस जागरूकता का गहरा प्रभाव दिखाई देगा। अब महिलाएं अपनी शक्ति को पहचान चुकी हैं और अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति को जो सम्मान मिला है, उसने विपक्ष की राजनीतिक जमीन खिसका दी है। यही कारण है कि वे इस ऐतिहासिक अधिनियम को पचा नहीं पा रहे हैं और अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

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