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राजस्थान

शिक्षा से चरित्र निर्माण: राज्यपाल: मत्स्य विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा- शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण और संस्कार है

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अलवर में मत्स्य विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षा को समाज सेवा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया और नई शिक्षा नीति के महत्व को समझाया।

HIGHLIGHTS

  • राज्यपाल ने अलवर के प्रताप ऑडिटोरियम में मत्स्य विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
  • समारोह में कुल 44,293 डिग्रियां और 42 स्वर्ण पदक सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की गईं।
  • राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति 2020 को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
  • पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या अधिक होने पर राज्यपाल ने समाज की प्रगति की सराहना की।
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अलवर | राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को अलवर के प्रताप ऑडिटोरियम में राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा के वास्तविक अर्थ को गहराई से समझाया।

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के कारखाने नहीं हैं, बल्कि ये प्रतिभाशाली व्यक्तित्व तैयार करने के केंद्र बिंदु हैं। यहाँ विद्यार्थियों के समग्र विकास पर ध्यान देना अनिवार्य है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ उनके कौशल और चरित्र को भी निखारना चाहिए। तभी वे देश के विकास में अपनी महती भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकेंगे।

शिक्षा का असली उद्देश्य: चरित्र और संस्कार

राज्यपाल बागडे ने दीक्षांत समारोह को एक पावन पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब विद्यार्थी अपनी शिक्षा को व्यावहारिक जीवन में उतारने के लिए तैयार होता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं है। इसका असली उद्देश्य चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास और नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के सर्वांगीण विकास के लिए करें। एक जिम्मेदार नागरिक बनकर ही वे राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं।

नई शिक्षा नीति 2020 और आत्मनिर्भर भारत

अपने संबोधन में उन्होंने 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को रोजगार प्रदाता बनाना है। यह नीति शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने इसके पांच आधारभूत स्तंभों—पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही—पर प्रकाश डाला। ये स्तंभ भारतीय शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में सहायक होंगे।

विश्वविद्यालयों के लिए सख्त निर्देश

राज्यपाल ने कुलगुरुओं को सख्त हिदायत दी कि विश्वविद्यालयों में किसी भी प्रकार का नियम-विरुद्ध कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने को कहा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और गुडविल पर कभी कोई दाग नहीं लगना चाहिए। आचार्यों को भी युग के अनुरूप खुद को निरंतर अपडेट रखने की आवश्यकता है।

शिक्षकों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें विद्यार्थियों को जीवन से जुड़े प्रत्येक ज्ञान और व्यावहारिक चुनौतियों से रूबरू कराना चाहिए।

बेटियों की सफलता समाज के लिए शुभ संकेत

राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। उन्होंने इसे समाज की बदलती सोच का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि हमारी बेटियां शिक्षा, शोध और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं। यह एक सशक्त और विकसित राष्ट्र के निर्माण का आधार है।

समारोह में 1 कुलाधिपति पदक, 42 स्वर्ण पदक, 6 रजत पदक और 40 पीएचडी उपाधि सहित कुल 44,293 डिग्रियां प्रदान की गईं। राजा भर्तृहरि की इस तपोभूमि पर ज्ञान का यह उत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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