मिर्धा परिवार में जमीन विवाद: जोधपुर के मिर्धा फार्म में जमीन और समाधि स्थल को लेकर विवाद, ज्योति मिर्धा ने चचेरे भाई पर दर्ज कराई एफआईआर

जोधपुर के सूथला स्थित मिर्धा फार्म हाउस की 150 गज जमीन को लेकर पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा के बीच विवाद गहरा गया है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

jyoti mirdha

जोधपुर | राजस्थान के नागौर जिले की राजनीति में अत्यधिक प्रभाव रखने वाले मिर्धा परिवार के पारिवारिक विवाद ने अब पुलिस थाने की दहलीज तक दस्तक दे दी है। जोधपुर में स्थित ऐतिहासिक मिर्धा फार्म हाउस की 150 गज जमीन को लेकर पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा के बीच टकराव बढ़ गया है।

ज्योति मिर्धा की ओर से उनके प्रतिनिधि प्रेमप्रकाश ने 14 जनवरी को प्रतापनगर थाने में इस मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मनीष मिर्धा और अन्य लोगों के खिलाफ संपत्ति में अवैध प्रवेश और तोड़फोड़ की धाराओं में केस दर्ज किया है।

विवाद का मुख्य केंद्र और समाधि स्थल की राजनीति

इस पूरे विवाद की जड़ फार्म हाउस के अंदर मौजूद वह 150 वर्ग गज का क्षेत्र है जहां परिवार के पूर्वजों की समाधियां बनी हुई हैं। मनीष मिर्धा का पक्ष इस स्थान को अपनी भावनाओं और पैतृक विरासत से जुड़ा हुआ बता रहा है।

मनीष मिर्धा का आरोप है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस कीमती जमीन को किसी बड़े सौदे के तहत बेचना चाहती हैं। उनका दावा है कि पूर्वजों का समाधि स्थल इस सौदे के रास्ते में आ रहा है जिसे हटाने की कोशिश की जा रही है।

इसके विपरीत ज्योति मिर्धा के पक्ष का कहना है कि यह जमीन उनके मालिकाना हक की है और वहां किया जा रहा निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। उन्होंने इस गतिविधि को जमीन हड़पने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

मिर्धा फार्म का गौरवशाली इतिहास

जोधपुर के सूंथला क्षेत्र में स्थित यह फार्म हाउस दिग्गज किसान नेता और राजनीति के पुरोधा स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा की स्मृतियों को संजोए हुए है। उन्होंने साल 1960 में इस 50 बीघा जमीन को खरीदकर यहां खेती और बागवानी के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित किए थे।

नाथूराम मिर्धा ने इजराइल से विशेष तौर पर आम के पौधे मंगाकर यहां लगाए थे जो उस दौर में एक अनूठा प्रयोग था। इसके अतिरिक्त उन्होंने यहां आधुनिक पिग फार्म और पोल्ट्री फार्म का संचालन भी शुरू किया था जो पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बना था।

इसी फार्म हाउस के एक हिस्से में सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की माता जी की समाधि का निर्माण किया गया था। इसके बाद 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि और 1996 में नाथूराम मिर्धा की समाधि भी इसी परिसर में बनाई गई थी जो परिवार की आस्था का केंद्र है।

घटनाक्रम और एफआईआर के तथ्य

दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक विवाद की पहली बड़ी घटना 13 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे घटित हुई थी। आरोप है कि मनीष मिर्धा अपने साथ 10-12 अज्ञात लोगों को लेकर जबरन फार्म हाउस की सीमा में घुस आए थे।

वहां तैनात केयरटेकर सलीम को डराया-धमकाया गया और उससे मुख्य द्वारों की चाबियां बलपूर्वक छीन ली गई थीं। मनीष मिर्धा पर आरोप है कि उन्होंने कर्मचारियों को वहां से तुरंत चले जाने और दोबारा न दिखने की सख्त चेतावनी दी थी।

अगले दिन 14 जनवरी को आरोपी पक्ष ने कथित तौर पर फार्म हाउस के ताले तोड़ दिए और समाधि स्थल के पास तोड़फोड़ शुरू कर दी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि इस पूरी घटना के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं जिनमें मनीष मिर्धा स्वयं तोड़फोड़ करते हुए नजर आ रहे हैं।

राजस्व रिकॉर्ड और मालिकाना हक का पक्ष

राजस्व विभाग के मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 76, 77, 80, 82 और 90 की यह पूरी जमीन ज्योति मिर्धा और उनकी बहन श्वेता मिर्धा के नाम पर दर्ज है। इसी आधार पर ज्योति मिर्धा इस संपत्ति पर अपना पूर्ण कानूनी और मालिकाना अधिकार जता रही हैं।

मनीष मिर्धा अब इसी विवादित स्थल पर अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा का समाधि स्थल बनाना चाह रहे हैं जिसका ज्योति मिर्धा द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि निजी जमीन पर बिना पूर्व अनुमति के कोई भी नया निर्माण कार्य पूरी तरह गैर कानूनी है।

पुलिस की जांच और सुरक्षा के इंतजाम

प्रतापनगर पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मनीष मिर्धा पर मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने मौके से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो साक्ष्यों को सबूत के तौर पर अपने कब्जे में ले लिया है।

विवाद को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने विवादित समाधि स्थल के पास सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी है। थानाधिकारी भवानी सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम राजस्व रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर रही है।

मिर्धा परिवार का यह संघर्ष अब केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि पारिवारिक वर्चस्व और पैतृक विरासत की लड़ाई बन चुका है। पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट और न्यायालय का हस्तक्षेप ही इस जटिल और भावनात्मक विवाद का सही समाधान कर पाएगा।