कोटपूतली में भैरव बाबा का मेला: 651 क्विंटल चूरमा प्रसादी: कोटपूतली में श्रीछांपाला वाला भैरवजी का वार्षिकोत्सव: 651 क्विंटल चूरमे की महाप्रसादी और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा
श्रीछांपाला वाला भैरवजी के वार्षिकोत्सव पर 651 क्विंटल चूरमे की महाप्रसादी और भव्य कलश यात्रा का आयोजन, जिसमें दिग्गज नेता शामिल होंगे.
कोटपूतली | राजस्थान के कोटपूतली जिले में स्थित कल्याणपुरा कुहाड़ा गांव की अरावली पहाड़ियों में विराजे श्रीछांपाला वाला भैरवजी का वार्षिकोत्सव इस वर्ष ऐतिहासिक होने जा रहा है। मंदिर के वार्षिक मेले, महाभंडारे और रात्रि जागरण को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता 651 क्विंटल चूरमे की महाप्रसादी है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
जेसीबी और ट्रैक्टरों से तैयार हो रही महाप्रसादी
मेले की ख्याति इसके अनोखे अंदाज में बनने वाली प्रसादी के कारण प्रदेशभर में है। इस बार 651 क्विंटल चूरमा तैयार किया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसादी को मिलाने के लिए जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और थ्रेसर जैसी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। पिछली बार यह आंकड़ा 551 क्विंटल था, जिसे श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार बढ़ाया गया है। प्रसादी बनाने में 150 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी और 130 क्विंटल खांड के साथ भारी मात्रा में मावा और सूखे मेवों का उपयोग किया गया है। वितरण के लिए ढाई लाख पत्तल-दोने और चार लाख कप की व्यवस्था की गई है।
भव्य कलश यात्रा और पुष्प वर्षा
गुरुवार को चोटिया मोड़ से मंदिर परिसर तक 3 किलोमीटर लंबी विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी। इसमें करीब 25 हजार महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कलश धारण कर शामिल होंगी। इस दौरान मंदिर परिसर में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी, जिसके लिए विशेष हेलीपैड तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 25 पानी के टैंकर, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीमें तैनात रहेंगी।
दिग्गज नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति
इस धार्मिक समागम में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शिरकत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेन्द्र सिंह करेंगे। विशिष्ट अतिथियों में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, तिजारा विधायक महंत बालकनाथ योगी और कई अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को 116 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं, जहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
सामुदायिक सेवा का अनूठा उदाहरण
मेले के सफल संचालन के लिए ग्रामीणों ने स्वयं कमान संभाली है। करीब 5 हजार स्कूली छात्र और 3500 से अधिक महिला-पुरुष वॉलंटियर्स पार्किंग, दर्शन और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ग्रामीण एकता और सेवाभाव की एक अनुपम मिसाल भी पेश करता है।