राजस्थान पुलिस की साइबर ठगी पर एडवाइजरी: डिलीवरी एजेंट का कॉल खाली कर सकता है बैंक खाता राजस्थान पुलिस ने जारी की साइबर ठगी पर एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने कूरियर और डिलीवरी एजेंट बनकर की जाने वाली साइबर ठगी को लेकर नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी है।

जयपुर | राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने साइबर ठगी के एक नए और खतरनाक तरीके को लेकर आमजन के लिए हाई अलर्ट एडवाइजरी जारी की है। इस नए स्कैम को यूएसएसडी आधारित कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम कहा जा रहा है जिसमें अपराधी खुद को कूरियर या डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। साइबर ठग पार्सल डिलीवरी कन्फर्म करने या उसे दोबारा शेड्यूल करने का बहाना बनाकर पीड़ित को एक विशेष कोड डायल करने के लिए कहते हैं।

कैसे काम करता है यह स्कैम

साइबर क्राइम शाखा के अनुसार ठग आमतौर पर स्टार 21 स्टार या स्टार 67 स्टार जैसे कोड डायल करने के लिए कहते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अपने मोबाइल से यह कोड डायल करता है उसके फोन की कॉल फॉरवर्डिंग सेवा सक्रिय हो जाती है। इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर आने वाले सभी कॉल और बैंक से जुड़े ओटीपी वेरिफिकेशन कॉल सीधे ठगों के पास पहुंचने लगते हैं। इस तकनीक का उपयोग करके अपराधी बैंक खातों से अनधिकृत लेनदेन कर लेते हैं और सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी हैक कर लेते हैं।

बचाव के लिए क्या करें

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉलर के कहने पर कोई भी कोड डायल न करें। यदि आपको कॉल फॉरवर्डिंग की आशंका हो तो तुरंत हैश हैश 002 हैश डायल करें जिससे सभी फॉरवर्डिंग सेवाएं बंद हो जाएंगी। किसी भी कूरियर या पार्सल से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर नंबर से ही सत्यापित करनी चाहिए।

शिकायत दर्ज करने के माध्यम

यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है तो उसे बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके अलावा साइबर अपराध की शिकायत आधिकारिक पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है। राजस्थान पुलिस ने वॉट्सऐप हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि लोग तुरंत सूचना साझा कर सकें और ठगी से बच सकें।