राजस्थान पुलिस PHQ में बड़ा विवाद: राजस्थान पुलिस मुख्यालय में सीनियर अफसर पर जातिगत टिप्पणी, महिला SP नीतू बुगालिया पर FIR दर्ज

जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में बैठक के दौरान सीनियर अफसर पर जातिगत टिप्पणी के आरोप में SP नीतू बुगालिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि नीतू बुगालिया ने खुद आरक्षण के हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़कर पुलिस सेवा में प्रवेश पाया था।

जयपुर | राजस्थान पुलिस महकमे के भीतर से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है। जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एक उच्च स्तरीय आधिकारिक बैठक के दौरान अनुशासन की मर्यादाएं लांघने का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक महिला पुलिस अधीक्षक (SP) पर अपने ही वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध जातिगत टिप्पणी करने और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस घटना ने न केवल पुलिस के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि प्रशासनिक शुचिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?

यह पूरा प्रकरण पुलिस दूरसंचार (Telecommunications) विभाग से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जयपुर के ज्योति नगर थाने में पुलिस दूरसंचार निदेशक दौलतराम अटल की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक (SP - टेलीकम्युनिकेशन) नीतू बुगालिया के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। यह विवाद 5 मार्च की शाम को पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण तकनीकी बैठक के दौरान शुरू हुआ था।

बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG - साइबर क्राइम और तकनीकी सेवाएं) वी.के. सिंह कर रहे थे। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य की पुलिस संचार प्रणालियों के अपग्रेडेशन और तकनीकी सुधारों पर चर्चा करना था। प्रत्यक्षदर्शियों और शिकायत के अनुसार, जब निदेशक दौलतराम अटल अपना प्रेजेंटेशन दे रहे थे, तभी SP नीतू बुगालिया ने उन्हें कथित तौर पर बीच में टोकना शुरू कर दिया।

आरक्षण को लेकर टिप्पणी का आरोप

निदेशक दौलतराम अटल द्वारा दर्ज कराई गई FIR में आरोप लगाया गया है कि नीतू बुगालिया ने भरी बैठक में उन पर तंज कसते हुए कहा कि वे 'आरक्षण (reservation) के कारण ही इस निदेशक के पद तक पहुंचे हैं।' अटल का कहना है कि बुगालिया लगातार उनके प्रेजेंटेशन में बाधा डाल रही थीं और अमर्यादित व्यवहार कर रही थीं। जब उन्होंने बुगालिया को अपनी बात रोकने और FIR दर्ज कराने की चेतावनी दी, तब भी वे शांत नहीं हुईं। विवाद इतना बढ़ गया कि बैठक की अध्यक्षता कर रहे ADG वी.के. सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने अनुशासन बनाए रखने के लिए नीतू बुगालिया को बैठक से बाहर जाने का निर्देश दिया।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच

शुक्रवार को इस मामले ने औपचारिक कानूनी रूप ले लिया जब ज्योति नगर थाने की SHO संतरा मीणा ने पुष्टि की कि निदेशक की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब बैठक में मौजूद अन्य अधिकारियों के बयान दर्ज करने और घटना के साक्ष्यों को संकलित करने की प्रक्रिया में है। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह राज्य पुलिस के सबसे सुरक्षित और अनुशासित माने जाने वाले परिसर 'पुलिस मुख्यालय' के भीतर घटित हुआ है।

विवाद का विरोधाभासी पहलू: खुद आरक्षण से मिली थी नौकरी

इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और चर्चा का विषय बना पहलू SP नीतू बुगालिया का अपना करियर इतिहास है। जिन पर आज आरक्षण को लेकर अपने सीनियर पर टिप्पणी करने का आरोप लगा है, उन्होंने स्वयं पुलिस विभाग में अपनी नौकरी आरक्षण के अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई लड़कर प्राप्त की थी। वर्ष 1997 की 'इंस्पेक्टर (टेलीकम्युनिकेशन)' भर्ती के दौरान जब विभाग ने 10% महिला आरक्षण लागू नहीं किया था, तब नीतू बुगालिया ने राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
वर्ष 1999 में जस्टिस शिव कुमार शर्मा की बेंच ने उनके पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकार को महिला आरक्षण लागू करने का आदेश दिया था। इसी अदालती फैसले और आरक्षण के प्रावधान के चलते उन्हें पुलिस सेवा में प्रवेश मिला और वे पदोन्नत होकर आज SP के पद तक पहुंची हैं। ऐसे में खुद उसी व्यवस्था का लाभ लेने वाली अधिकारी द्वारा आरक्षण पर टिप्पणी करना प्रशासनिक गलियारों में हैरानी का सबब बना हुआ है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।