रामझरोखा ट्रस्ट भूमि विवाद: राज्यमंत्री पर टिप्पणी के मामले में भाजपा नेता तेजराज सोलंकी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक
सिरोही के रामझरोखा ट्रस्ट भूमि विवाद में राज्यमंत्री ओटाराम देवासी के खिलाफ टिप्पणी करने वाले भाजपा नेता तेजराज सोलंकी को राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है।
सिरोही। रामझरोखा मंदिर ट्रस्ट की बहुचर्चित भूमि पर कथित रूप से नियम विरुद्ध पट्टे जारी किए जाने के प्रकरण को लेकर राज्य के राज्यमंत्री ओटाराम देवासी पर सोशल मीडिया में की गई टिप्पणी अब राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गई है। इस मामले में भाजपा नेता तेजराज सोलंकी के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने अहम हस्तक्षेप करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
सिरोही सदर थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 03/2026 नव परगना देवासी समाज के नाम से हार्दिक देवासी द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए परिवाद के आधार पर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि भाजपा नेता तेजराज सोलंकी ने सोशल मीडिया पर राज्यमंत्री ओटाराम देवासी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया।
इस प्रकरण की सुनवाई राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की एकलपीठ में माननीय न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर के समक्ष हुई। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद तेजराज सोलंकी को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के आदेश पारित किए। साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक को पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट एवं केस डायरी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह तय किया जा सके कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती है या फिर किसी दूसरी श्रेणी में। अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता तेजराज सोलंकी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत जैन ने प्रवीन व्यास के साथ मजबूत पैरवी करते हुए दलील दी कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन किया जा रहा है। वहीं राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक हनुमान राम प्रजापति ने पैरवी की।
रामझरोखा मंदिर ट्रस्ट की भूमि से जुड़ा यह विवाद पहले से ही क्षेत्र में राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। अब हाईकोर्ट की इस अंतरिम राहत के बाद मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे राज्यमंत्री ओटाराम और भाजपा नेता तेजराज सोलंकी के बीच बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है।