संघ शताब्दी वर्ष: पांचला मंडल का भव्य हिंदू सम्मेलन: संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पांचला मंडल का विराट हिंदू सम्मेलन संपन्न, विश्व शक्ति बनने हेतु संगठन पर दिया जोर
नागेश्वर मंदिर दुगावा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में संघ शताब्दी वर्ष मनाया गया, जहाँ वक्ताओं ने भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने हेतु हिंदू समाज की एकजुटता का आह्वान किया।
सरनाऊ | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर पांचला मंडल द्वारा एक भव्य एवं विराट हिंदू सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। यह गरिमामयी कार्यक्रम चरणनाथजी की पावन तपोस्थली, नागेश्वर मंदिर दुगावा में श्रद्धेय नेमीनाथ जी महाराज के दिव्य संरक्षण में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न संतों और सामाजिक विचारकों ने अपनी पावन निश्रा प्रदान की, जिनमें भरतनाथजी कमालपुरा, शिवभारतीजी लाछीवाड़, सीता गिरी जी चाडार नाडी सांकड़, सदा गिरिजी गंगुपिया, श्रेष्ठाईनाथजी सिवाना और मधुसूदनजी लेलावा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में माताओं और बहनों ने मंगल गीत गाते हुए साधु-संतों का भावभीना स्वागत किया। 'जय श्री राम' के गगनभेदी उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। कलश यात्रा के मंच पर पहुँचने के पश्चात माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन की विधिवत शुरुआत की गई। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह में भारी उत्साह देखने को मिला, जो संघ के शताब्दी वर्ष के महत्व को दर्शाता है।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता, जालौर विभाग प्रचारक संजीव कुमार ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए हिंदू चेतना को जागृत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत कोई सामान्य भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह वह पुण्य धरा है जहाँ का सनातनी हिंदू सदैव 'विश्व कल्याण' की भावना से ओतप्रोत रहता है। उन्होंने इतिहास के कठिन कालखंडों और राष्ट्र पर हुए विदेशी अत्याचारों का स्मरण कराते हुए समाज को सीखने का आह्वान किया। संजीव कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हिंदू समाज अब भी जागृत और संगठित नहीं हुआ, तो आने वाले समय में इसके परिणाम अत्यंत विनाशकारी हो सकते हैं। उन्होंने संघ के 'पंच परिवर्तन' के संकल्प—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य—को समाज शक्ति के माध्यम से लागू करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हिंदू एकत्र नहीं हुए, तो राष्ट्र की अखंडता को पुनः खतरा हो सकता है, लेकिन यदि समाज जागृत हो जाए, तो भारत को विश्व शक्ति और विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।
पूर्व सांसद देव जी एम पटेल ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू सम्मेलनों की महत्ता बढ़ गई है क्योंकि हमें जाति और वर्ग के भेदों को मिटाकर एक सूत्र में पिरोना होगा। पटेल ने माताओं और बहनों से विशेष अपील की कि वे अपनी पुरानी संस्कृति और संस्कारों की संवाहक बनें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को श्रेष्ठ शिक्षा मिल सके। उन्होंने अपने गुरु चरणनाथजी की पावन पुण्य भूमि की महिमा का भी गुणगान किया।
कार्यक्रम के दौरान मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए साध्वी सीता गिरी जी ने कहा कि महिलाएँ केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की भी पोषक और वाहक हैं। उन्होंने 'कुटुंब प्रबोधन' के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि एक जागरूक महिला किस प्रकार राष्ट्र को सशक्त बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे सकती है। चंपाबाई दुगावा ने भी कुटुंब प्रबोधन और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया।
आयोजन के अंत में श्रद्धेय नेमिनाथ जी महाराज ने सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के संयोजक थाना रामजी भूरिया दुगावा ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार प्रकट किया। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन मंडल पालक लालाराम पथमेड़ा द्वारा अत्यंत कुशलता से किया गया। इस विराट सम्मेलन में व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए खेमारामजी लुनियासर, दिनेश नैनोल, मानाराम दुगावा और रामदेव साउंड सांचौर का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में सक्रिय योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं और भामाशाहों को भरतनाथ जी महाराज द्वारा दुप्पटा पहनाकर सम्मानित किया गया। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में माननीय संघचालक अंबालाल जी, सीएमएचओ डॉ. भेराराम जानी, मोहनलाल भूंगर, अशोक कुमार दुगावा, हरिसिंहजी सुरवा, दुदाराम जी नैनोल, रावता रामजी, मसराराम, हरिराम जी पांचला सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।