सिरोही: भ्रष्टाचार पर कलेक्टर का वार, 59 पट्टे निरस्त: सिरोही: पिण्डवाड़ा की ग्राम पंचायत वासा में नियम विरुद्ध जारी 59 पट्टे कलेक्टर ने किए निरस्त, भ्रष्टाचार पर चला चाबुक

सिरोही जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी ने पिण्डवाड़ा की ग्राम पंचायत वासा में नियमों की धज्जियां उड़ाकर जारी किए गए 59 अवैध पट्टों को निरस्त कर दिया है।

Vasa Gram Panchayat Sirohi Rajasthan

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पिण्डवाड़ा तहसील के ग्राम पंचायत वासा में पट्टा आवंटन में हुए बड़े घोटाले का पर्दाफाश करते हुए जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कलेक्टर ने नियमों को ताक पर रखकर जारी किए गए 59 पट्टों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

नियमों की अनदेखी और धांधली का खुलासा
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत वासा में पट्टा आवंटन को लेकर कुल 74 शिकायतों की जांच की गई थी। जिला न्यायालय और प्रशासनिक जांच में पाया गया कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 142, 148 और 158 का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया था। प्रशासन ने पाया कि पट्टे जारी करने से पहले न तो कोई ले-आउट प्लान बनाया गया और न ही संबंधित पटवारी की रिपोर्ट ली गई। नियम 142 के तहत आबादी भूमि के विस्तार और ले-आउट की अनिवार्यता होती है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इसके अतिरिक्त, पट्टा आवंटन से पूर्व सार्वजनिक आपत्तियां मांगने की कानूनी प्रक्रिया को भी दरकिनार कर दिया गया था। सबसे गंभीर अनियमितता यह रही कि अपात्र व्यक्तियों को पट्टे आवंटित किए गए, जिन्होंने बाद में इन्हें ऊंची कीमतों पर भू-माफियाओं को बेच दिया।

शिकायतकर्ता ने खोली मिलीभगत की पोल
मामले को प्रमुखता से उठाने वाले शिकायतकर्ता रोनक दवे ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे 'सत्य की जीत' करार देते हुए कहा कि यह पूरा खेल सरपंच प्रभुराम हीरागर, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी हंसाराम प्रजापत, उपसरपंच, और विभिन्न वार्ड पंचों की मिलीभगत से रचा गया था। दवे के अनुसार, इन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के दम पर सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझ लिया और गरीबों के हक को मारकर अपात्रों को पट्टे बेचे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस धांधली में प्राइवेट भू-माफियाओं की भी बड़ी भूमिका रही है।

कड़ी कार्रवाई की मांग और प्रशासनिक हलचल
रोनक दवे ने जिला प्रशासन पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि केवल पट्टे निरस्त करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी हंसाराम प्रजापत को कई नोटिस दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने जिला कलेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) से अपील की है कि इस घोटाले में शामिल सभी दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जेल भेजा जाए। कलेक्टर अल्पा चौधरी के इस कड़े फैसले के बाद जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी हड़कंप मच गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन कर भूमि का बेचान करना पूरी तरह अवैध है। इस कार्रवाई के बाद अब जिले भर में पट्टा आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और अन्य पंचायतों में भी इसी तरह की जांच की मांग जोर पकड़ रही है।