सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 28 हफ्तों की गर्भवती को दी गर्भपात की इजाजत
रेप के बाद गर्भपात के मामले में सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायाल ने ये फैसला पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद सुनाया। मेडिकल रिपोर्ट में ये कहा गया था कि महिला को गर्भपात की इजाजत दी सकती है।
नई दिल्ली | रेप पीड़िता के गर्भपात को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है।
उच्चतम न्यायालय ने रेप के बाद 28 हफ्तों की गर्भवती को गर्भपात कराने की इजाजत दी है।
रेप के बाद गर्भपात के मामले में सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायाल ने ये फैसला पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद सुनाया।
मेडिकल रिपोर्ट में ये कहा गया था कि महिला को गर्भपात की इजाजत दी सकती है।
महिला के बिना मर्जी के गर्भवती होने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर
अपना फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गर्भावस्था किसी परिवार के लिए ख़ुशी का स्त्रोत है, लेकिन कई बार यह बेहद ही दुखी करने वाला भी होता है।
शादी के बिना या महिला के बिना मर्जी के गर्भवती होने पर ये उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर ड़ालता है। इसलिए इस मामले में कोर्ट महिला के गर्भपात की अनुमति देता है।
अदालत ने इस मामले में पीड़िता की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया था, उसके बाद ही आज इस मामले में फैसला सुनाया गया है।
गुजरात हाई कोर्ट की लेट लतीफी पर नाराजगी
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर गुजरात हाई कोर्ट की लेट लतीफी पर नाराजगी जताते हुए चिंता जाहिर की है।
दरअसल, गुजरात हाई कोर्ट ने पीड़िता के गर्भपात को नामंजूर कर दिया था।
न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में हमें त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। इन्हें सामान्य मानकर उदासीन रवैया नहीं रखना चाहिए।