भारत से मांगी बड़ी मदद: बलूचिस्तान की आजादी के लिए बलूच नेता ने एस जयशंकर को लिखा पत्र

बलूचिस्तान की आजादी के लिए बलूच नेता ने एस जयशंकर को लिखा पत्र
बलूच नेता का भारत को पत्र
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Highlights

  • मीर यार बलूच ने जयशंकर को पत्र लिखकर बलूचिस्तान की आजादी के लिए समर्थन मांगा है।
  • पत्र में चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य और सामरिक गठजोड़ पर चिंता जताई गई है।
  • बलूच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के बीच प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का उल्लेख किया।
  • भारत सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की गई।

नई दिल्ली | दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है जहां बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से बलूच नेता ने बलूचिस्तान को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराने और उसे एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की मांग की है। बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहे आजादी के आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर इस पत्र को साझा करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बलूच नेता हिर्बयर मर्री को भी टैग किया है।

मीर यार बलूच ने अपने पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने संबंधों का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि बलूचिस्तान के 6 करोड़ नागरिक भारत के 140 करोड़ लोगों के साथ गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रखते हैं। इस पत्र में विशेष रूप से हिंगलाज माता मंदिर का उल्लेख किया गया है जो बलूचिस्तान में स्थित है और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर दोनों क्षेत्रों के बीच साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों का एक अटूट प्रतीक माना जाता है। बलूच नेता ने कहा कि यह संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक और ऐतिहासिक भी हैं।

ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद पर प्रहार

पत्र में बलूच नेता ने भारत सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों की सराहना की है। उन्होंने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। मीर यार बलूच के अनुसार पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के ठिकानों पर भारत की कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भारत एक मजबूत शक्ति है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भारत का यह साहस बलूच लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और इससे क्षेत्र में न्याय की उम्मीद जगी है।

पाकिस्तान का दमनकारी शासन और मानवाधिकार

बलूच प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि पिछले 79 वर्षों से बलूचिस्तान की जनता पाकिस्तान के दमनकारी शासन और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का सामना कर रही है। उन्होंने पाकिस्तान को एक ऐसी बीमारी बताया जिसे जड़ से खत्म करना क्षेत्र की शांति के लिए आवश्यक है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बलूच लोग अब किसी भी कीमत पर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहना चाहते और अपनी संप्रभुता के लिए लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मानवीय संकट पर ध्यान देने की अपील की है और कहा है कि अब समय आ गया है कि बलूचिस्तान को उसकी खोई हुई पहचान वापस मिले।

चीन और पाकिस्तान का घातक गठजोड़

पत्र का एक बड़ा हिस्सा चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों पर केंद्रित है। मीर यार बलूच ने चेतावनी दी है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी का काम अपने अंतिम चरण में है जो बलूचिस्तान के संसाधनों के शोषण का एक जरिया है। उन्होंने कहा कि चीन बलूचिस्तान की धरती का इस्तेमाल अपने सैन्य हितों के लिए कर रहा है। यदि बलूचिस्तान की आजादी की ताकतों को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले कुछ महीनों में चीन वहां अपनी सेना की तैनाती कर सकता है। यह स्थिति भारत की सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती पैदा करेगी क्योंकि 6 करोड़ बलूच लोगों की मर्जी के बिना वहां विदेशी सेना का होना विनाशकारी होगा।

भारत से ठोस सहयोग की अपील

बलूच नेता ने भारत से केवल नैतिक ही नहीं बल्कि ठोस और कार्रवाई योग्य सहयोग की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत और बलूचिस्तान के सामने जो खतरे हैं वे वास्तविक हैं और उनसे निपटने के लिए आपसी साझेदारी जरूरी है। पत्र के अंत में उन्होंने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भारत बलूचिस्तान के संघर्ष को मान्यता देगा और एक स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण में सहायक बनेगा। मीर यार बलूच ने विश्वास जताया है कि भारत और बलूचिस्तान के बीच का यह सहयोग भविष्य की चुनौतियों को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।

वैश्विक स्तर पर मान्यता की मांग

बलूचिस्तान गणराज्य के प्रतिनिधि के रूप में मीर यार बलूच ने दुनिया भर के देशों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में पहचानें। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जबरन इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखा है जबकि बलूच जनता की आकांक्षाएं पूरी तरह अलग हैं। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने भारत को एक बड़े भाई और क्षेत्रीय नेता के रूप में देखा है जो पीड़ितों की आवाज बन सकता है। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार इस पत्र और बलूचिस्तान की इस बड़ी मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है क्योंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बहुत संवेदनशील माना जाता है।

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