सिरोही में खनन परियोजना में वार्ता विफल: लालजी रायका को वार्ता से बाहर रखने पर अडे जनप्रतिनिधि

सिरोही। क्षेत्र की खनन संघर्ष समिति और सरकार के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के बीच रविवार शाम प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी। वार्ता कमलेश मेटाकास्ट कि प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में चल रहें आंदोलन के संदर्भ में थीं।

राज्य मंत्री ओटाराम देवासी की मौजूदगी में होने वाली इस वार्ता के रद्द होने का मुख्य कारण यह रहा कि सरकार के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि पक्ष ने आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेता लाल सिंह रायका को वार्ता में शामिल न करने का प्रस्ताव रखा, जिसे संघर्ष समिति ने सिरे से खारिज कर दिया।
संघर्ष समिति का कहना था कि लाल सिंह रायका को अलग करके कोई भी बातचीत स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि वे इस आंदोलन की शुरुआत से ही पीड़ित जनता के साथ खड़े हैं और उन्होंने स्वयं अपने लेटर पैड पर आंदोलन को समर्थन देने का लिखित आवेदन भी दिया था। समिति ने स्पष्ट किया कि रायका को वार्ता से बाहर रखना आंदोलन को तोड़ने की नीति का हिस्सा है।


गौरतलब है कि लाल सिंह रायका जयपुर से करीब 500 किलोमीटर की यात्रा कर सिरोही पहुंचे थे, लेकिन जब उन्हें वार्ता में शामिल न करने की बात सामने आई तो संघर्ष समिति ने वार्ता से इंकार कर दिया और बिना बातचीत किए ही लौट गई।


इसके बाद संघर्ष समिति ने सिरोही के एक निजी होटल में बैठक कर आगामी आंदोलन को लेकर गहन चर्चा की। बैठक में आंदोलन की रणनीति पर मंथन किया गया और जल्द ही नई तारीख की घोषणा करने का फैसला लिया गया। समिति ने साफ कहा कि जब तक सभी प्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक वार्ता में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है।
इधर, संघर्ष समिति को तोड़ने की कथित कोशिशों को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि सरकार जनभावनाओं को नजरअंदाज कर रही है, जिससे आंदोलन और कानून के दायरे में रहकर तेज होगा।