हैदराबाद | डिफेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) के लिए गुरुवार का कारोबारी सत्र ऐतिहासिक रहा। कंपनी ने आधिकारिक घोषणा की है कि उसने भारतीय नौसेना के लिए लिम्पेट माइंस (Limpet Mines) के ब्लास्ट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस बड़ी कामयाबी की खबर आते ही शेयर बाजार में निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में भारी दिलचस्पी दिखाई और तेज खरीदारी शुरू कर दी।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स में जोरदार उछाल: Apollo Micro Systems Share: लिम्पेट माइंस के सफल ब्लास्ट ट्रायल से शेयरों में 15% की तेजी, बना नया रिकॉर्ड
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने भारतीय नौसेना के लिए लिम्पेट माइंस का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयरों में 15 फीसदी की भारी तेजी देखी गई।
HIGHLIGHTS
- अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में गुरुवार को 15% की शानदार तेजी दर्ज की गई।
- कंपनी ने भारतीय नौसेना के लिए लिम्पेट माइंस का सफल ब्लास्ट ट्रायल पूरा किया है।
- यह कंपनी भारत में इस तकनीक को विकसित करने वाली फिलहाल इकलौती संस्था है।
- पिछले 5 वर्षों में इस डिफेंस स्टॉक ने निवेशकों को 2320% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।
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शेयर बाजार में जोरदार तेजी
गुरुवार को कारोबारी सत्र के दौरान अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का स्टॉक करीब 15 फीसदी तक उछलकर 238.85 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में कंपनी की बढ़ती तकनीकी क्षमता ने निवेशकों के भरोसे को काफी मजबूत किया है। शेयर में आई यह अचानक तेजी कंपनी के भविष्य के प्रति बाजार के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। भारी खरीदारी के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्या है लिम्पेट माइन की खासियत?
लिम्पेट माइन एक विशेष प्रकार का अंडरवॉटर विस्फोटक उपकरण है, जिसे गोताखोरों द्वारा दुश्मन के जहाजों या पनडुब्बियों पर चुंबकीय रूप से लगाया जाता है। भारतीय नौसेना के लिए इस स्वदेशी तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित करने वाली अपोलो माइक्रो सिस्टम्स फिलहाल देश की एकमात्र निजी कंपनी है। यह उपलब्धि कंपनी को रक्षा आपूर्ति के क्षेत्र में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है और इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के समकक्ष खड़ा करती है।
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भविष्य की रणनीतिक योजनाएं
इस सफलता के बाद कंपनी अब अंडरवॉटर माइन सिस्टम्स के क्षेत्र में अपनी पैठ और गहरी करने की तैयारी में है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे अब शैलो वाटर माइंस और डीप वाटर माइंस के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके अलावा कंपनी अंडरवॉटर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे जटिल क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी तकनीक का निर्यात करना है, जिससे आने वाले वर्षों में राजस्व में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है।
मल्टीबैगर रिटर्न का इतिहास
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने लंबी अवधि में अपने निवेशकों को शानदार मुनाफा कमाकर दिया है। पिछले 5 वर्षों में इस डिफेंस स्टॉक ने लगभग 2320% का अविश्वसनीय रिटर्न दिया है, जो इसे एक सच्चा मल्टीबैगर बनाता है। हालांकि, पिछले 6 महीनों में शेयर में 31% की गिरावट भी देखी गई थी, लेकिन ताजा ट्रायल की सफलता ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। निवेशक अब कंपनी के आगामी प्रोजेक्ट्स और ऑर्डर्स पर नजर गड़ाए हुए हैं।
बाजार की स्थिति और चुनौतियां
वर्तमान में यह शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर 354.65 रुपये से करीब 48% नीचे कारोबार कर रहा है। 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को मिल रहे प्रोत्साहन का सीधा लाभ अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को मिल रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी तकनीक के सफल परीक्षण से भविष्य में आयात पर निर्भरता कम होगी और कंपनी को दीर्घकालिक सरकारी अनुबंध मिलने का रास्ता साफ होगा। यह सफलता न केवल कंपनी के लिए वित्तीय रूप से फायदेमंद है, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा कदम है।
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