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राजस्थान

चुनाव से घबराई सरकार: गहलोत: निकाय चुनाव से घबराई सरकार, अफसरों पर दबाव: अशोक गहलोत

Pradeep Beedawat

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर आगामी निकाय और पंचायत चुनावों से घबराकर प्रशासनिक अधिकारियों पर भाजपा को जिताने के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

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HIGHLIGHTS

  • पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आगामी निकाय और पंचायत चुनावों से घबरा गई है और कलेक्टर-एसपी पर दबाव बना रही है।
  • लोहावट ब्लाइंड मर्डर केस में 16 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, राजनीतिक दबाव का संदेह जताया।
  • गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्री को ही कलेक्टर के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ रहा है, जो एक अभूतपूर्व और चिंताजनक स्थिति है।
  • उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस को 'वंदे मातरम्' पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में उनका कोई योगदान नहीं था।
ashok gehlot accuses bjp government of pressuring officers for local elections

जयपुर | राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आगामी स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी संभावित हार से डरकर प्रशासनिक तंत्र पर भाजपा के पक्ष में काम करने का अनुचित दबाव बना रही है। गहलोत ने यह बातें रविवार को अपने निवास पर आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, लोहावट हत्याकांड और सरकार की असंवेदनशीलता पर भी तीखा प्रहार किया।

सरकार पर गंभीर आरोप

श्री गहलोत ने कहा कि प्रदेश में स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि भाजपा सरकार के अपने मंत्री को ही जिला कलेक्टर और कमिश्नर के खिलाफ छह घंटे तक धरने पर बैठना पड़ रहा है।

उन्होंने इसे प्रशासनिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना बताया, जिसे पहले कभी न तो देखा गया और न ही सुना गया। यह सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

निकाय-पंचायत चुनाव से घबराई सरकार

स्थानीय चुनावों के संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार चुनाव कराना ही नहीं चाहती थी।

"सबसे बड़ी दुखद बात यह है कि सरकार स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से पूरी तरह घबराई हुई है। इनकी चुनाव कराने की मंशा ही नहीं थी। हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश को जब यह कहना पड़ा कि अगर सरकार चुनाव नहीं कराएगी तो हम कराएंगे, तब जाकर विवश होकर ये चुनाव कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पांच-पांच, सात-सात के समूहों में कलेक्टरों और एसपी को बुलाकर भाजपा को जिताने की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। यदि मैं इतना बड़ा आरोप लगा रहा हूं, तो पूरी जिम्मेदारी और पुख्ता फीडबैक के आधार पर ही कह रहा हूं।"

अफसरों पर दबाव का आरोप

गहलोत ने दावा किया कि मुख्यमंत्री खुद कलेक्टरों और एसपी को समूहों में बुलाकर उन्हें भाजपा को चुनाव जिताने का निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह यह आरोप पूरी जिम्मेदारी और पुख्ता जानकारी के आधार पर लगा रहे हैं।

लोहावट ब्लाइंड मर्डर: 16 दिन बाद भी आरोपी फरार

लोहावट में हुए ब्लाइंड मर्डर केस पर बोलते हुए श्री गहलोत ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

"हत्याकांड के 16 दिन बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि प्रशासन ने पांच दिन में आरोपियों को पकड़ने का लिखित वादा किया था। जानकारी मिल रही है कि पुलिस को सुराग मिलने के बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते खुलासा नहीं किया जा रहा है। यदि किसी रसूखदार या नेताओं के रिश्तेदार का नाम छुपाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री और डीजीपी को इस पूरे मामले पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।"

राजनीतिक दबाव का संदेह

उन्होंने संदेह जताया कि पुलिस को सुराग मिल चुके हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री और डीजीपी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करें।

'वंदे मातरम्' पर भाजपा-RSS को घेरा

राष्ट्रभक्ति के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और आरएसएस को इस पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

"वंदे मातरम् पर कुछ भी बोलने का आरएसएस और भाजपा को कोई नैतिक अधिकार नहीं है। देश की आजादी की लड़ाई में इनका कोई योगदान नहीं रहा है। आजादी से पहले इन्होंने अंग्रेजों के डर से कभी 'वंदे मातरम्' तक नहीं गाया। जो 'वंदे मातरम्' देशवासियों को एकजुट करने और स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत रहा है, आज भाजपा उसी पावन गीत का इस्तेमाल समाज और देश को बांटने व तोड़ने के लिए कर रही है।"

भूख हड़ताल करने वालों से अपील

विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं और नागरिकों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए गहलोत ने सरकार को असंवेदनशील बताया।

"यह प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की रत्ती भर परवाह नहीं करती। मैं सभी आंदोलनकारियों से अपील करता हूं कि वे भूखे रहकर अपनी सेहत खराब न करें, बल्कि धरना और अन्य लोकतांत्रिक तरीके अपनाकर अपनी आवाज उठाएं। लोकतंत्र में सरकार का बुनियादी दायित्व संवाद करना और समाधान निकालना होता है, लेकिन वर्तमान सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है।"

कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आम नागरिक आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

इसके साथ ही, उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ न मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है, जिसकी जवाबदेही मौजूदा सरकार की है।

*Edit with Google AI Studio

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