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आयुष शेट्टी: बैडमिंटन का नया किंग: आयुष शेट्टी: 61 साल का सूखा खत्म कर बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचे, क्या भारत को मिल गया अगला पुलेला गोपीचंद?

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20 वर्षीय आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है। विक्टर एक्सेलसन और पीवी सिंधु जैसे दिग्गजों ने उनकी प्रतिभा की जमकर तारीफ की है और उन्हें भविष्य का सुपरस्टार बताया है।

HIGHLIGHTS

  • आयुष शेट्टी 61 साल बाद बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के पुरुष एकल फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने हैं।
  • उन्होंने सेमीफाइनल में विश्व चैंपियन कुनलावट विटिडसर्न को हराकर बड़ा उलटफेर किया।
  • दो बार के ओलंपिक चैंपियन विक्टर एक्सेलसन ने आयुष की तुलना अपने युवा दिनों के खेल से की है।
  • आयुष ने अपनी सफलता का श्रेय प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी और अपनी मानसिक मजबूती को दिया है।
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बेंगलुरु | भारतीय बैडमिंटन के आकाश में एक नया सितारा तेजी से चमक रहा है। 20 साल के आयुष शेट्टी ने चीन के निंगबो में जो कर दिखाया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर आयुष ने 61 साल के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है। 1965 में दिनेश खन्ना ने जो उपलब्धि हासिल की थी, आयुष उसके करीब पहुंच गए हैं।

यह केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं है, बल्कि भारतीय बैडमिंटन के बदलते स्वरूप की कहानी है। आयुष की लंबाई, उनका खेल और उनकी मानसिक एकाग्रता उन्हें खास बनाती है।

दिग्गजों की जुबानी आयुष की कहानी

जब दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी आपकी तारीफ करें, तो समझ लीजिए कि आप सही रास्ते पर हैं। विक्टर एक्सेलसन ने आयुष को देखकर अपने पुराने दिनों को याद किया।

एक्सेलसन का मानना है कि आयुष में वह आग है जो एक चैंपियन में होनी चाहिए। उनकी लंबाई और कोर्ट पर उनकी पहुंच विरोधियों के लिए काल साबित हो सकती है।

वहीं, भारत की गोल्डन गर्ल पी.वी. सिंधु ने आयुष के रवैये की सराहना की है। सिंधु ने कहा कि आयुष के पास एक शक्तिशाली स्मैश और बेहतरीन डिफेंस का मिश्रण है।

कोर्ट पर 6 फीट 4 इंच का खौफ

आयुष शेट्टी की 6 फीट 4 इंच की लंबाई उनकी सबसे बड़ी ताकत है। बैडमिंटन जैसे तेज खेल में इतनी लंबाई का होना खिलाड़ी को एक अतिरिक्त बढ़त देता है।

सिंधु के अनुसार, उनकी लंबाई उन्हें कोर्ट के हर कोने तक आसानी से पहुंचने में मदद करती है। इससे वे शटल को बहुत ऊपर से हिट कर सकते हैं, जिससे स्मैश में अधिक ताकत आती है।

हालांकि, इतनी लंबाई के साथ शरीर को लचीला बनाए रखना एक चुनौती होती है। आयुष ने इस पर कड़ी मेहनत की है ताकि वे नेट के करीब भी उतने ही प्रभावी रह सकें।

सानूर से बेंगलुरु तक का संघर्ष

आयुष की कहानी कर्नाटक के एक छोटे से गांव सानूर से शुरू होती है। उनके पिता खुद बैडमिंटन के शौकीन थे और उन्होंने ही आयुष के हाथ में पहली बार रैकेट थमाया था।

शुरुआती दिनों में सानूर और कारकाला जैसी जगहों पर सुविधाओं की कमी थी। लेकिन आयुष के पिता ने हार नहीं मानी और उन्हें बेहतर ट्रेनिंग के लिए मंगलौर भेजा।

बेटे के सपने को पूरा करने के लिए पूरा परिवार बेंगलुरु शिफ्ट हो गया। पिछले छह सालों से आयुष प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी (PPBA) में अपनी स्किल्स को निखार रहे हैं।

कोच सागर चोपड़ा का अटूट विश्वास

PPBA के कोच सागर चोपड़ा आयुष की प्रगति से बेहद खुश हैं। उन्हें लगता है कि आयुष में दुनिया के शीर्ष 10 खिलाड़ियों में शामिल होने की पूरी क्षमता है।

कोच का कहना है कि आयुष केवल शारीरिक रूप से मजबूत नहीं हैं, बल्कि वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। रैलियों के दौरान उनका धैर्य देखने लायक होता है।

अकादमी में उन्हें वह माहौल मिला जिसने उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया। वहां उन्होंने प्रकाश पादुकोण और विमल कुमार जैसे दिग्गजों से खेल की बारीकियां सीखीं।

एशिया चैंपियनशिप का वो यादगार सफर

निंगबो में आयोजित इस टूर्नामेंट में आयुष एक 'अंडरडॉग' के रूप में उतरे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह युवा खिलाड़ी फाइनल तक का सफर तय करेगा।

उन्होंने एक के बाद एक चार उच्च रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को धूल चटाई। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला विश्व चैंपियन कुनलावट विटिडसर्न से था, जहां उन्होंने सबको हैरान कर दिया।

कुनलावट के खिलाफ आयुष ने जिस परिपक्वता के साथ खेल दिखाया, उसने साबित कर दिया कि वे बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। वे दबाव में भी शांत रहना जानते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य और खेल का तालमेल

आयुष ने खुलासा किया कि उनकी सफलता में मनोवैज्ञानिक (Psychiatrist) की भी बड़ी भूमिका रही है। यूरोपीय दौरे पर मिली शुरुआती हार के बाद वे थोड़े निराश थे।

डॉक्टर की मदद से उन्होंने अपनी हार को स्वीकार करना और उससे सीखना सीखा। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और वे कोर्ट पर अधिक आक्रामक होकर खेलने लगे।

आज के दौर में मानसिक मजबूती उतनी ही जरूरी है जितनी कि शारीरिक फिटनेस। आयुष ने इसे सही समय पर समझा और इसका फायदा उन्हें एशिया चैंपियनशिप में मिला।

एक्सेलसन से सीखने की ललक

आयुष विक्टर एक्सेलसन को अपना आदर्श मानते हैं। वे एक्सेलसन के गेम वीडियो देखते हैं ताकि समझ सकें कि एक लंबा खिलाड़ी नेट के पास कैसे खेलता है।

उन्होंने कहा, "एक्सेलसन बहुत मजबूत हैं और उनका डिफेंस लाजवाब है। मैं उनसे यही सीखना चाहता हूं कि अपनी लंबाई का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।"

शेट्टी को पता है कि अगर उन्हें विश्व स्तर पर राज करना है, तो उन्हें एक्सेलसन जैसी निरंतरता हासिल करनी होगी। इसके लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

भविष्य के बड़े लक्ष्य

एशिया चैंपियनशिप के बाद आयुष की रैंकिंग में जबरदस्त उछाल आया है। अब वे दुनिया के 18वें नंबर के खिलाड़ी बन गए हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

लेकिन आयुष यहीं रुकना नहीं चाहते। उनका अगला लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में पदक जीतना है। वे भारत के लिए ओलंपिक पदक का सपना भी देखते हैं।

उनका कहना है, "अब मुझे अपने सपने पर पहले से कहीं ज्यादा विश्वास है। मुझे पता है कि रास्ता कठिन है, लेकिन मैं कड़ी मेहनत के लिए तैयार हूं।"

भारतीय बैडमिंटन का उज्ज्वल भविष्य

लक्ष्य सेन और सात्विक-चिराग की जोड़ी के बाद आयुष शेट्टी का उदय भारतीय बैडमिंटन के लिए शुभ संकेत है। वे युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बनकर उभरे हैं।

भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों को उम्मीद है कि आयुष जल्द ही बड़ी ट्रॉफियां अपने नाम करेंगे। उनकी सादगी और खेल के प्रति समर्पण उन्हें एक महान खिलाड़ी बना सकता है।

आयुष शेट्टी का यह सफर अभी शुरू हुआ है। 20 साल की उम्र में उन्होंने जो परिपक्वता दिखाई है, वह भारतीय खेल जगत के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।

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