चंडीगढ़ | पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मान ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताया है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को विस्तार से बताया कि कैसे पंजाब में लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले में केंद्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
पंजाब सीएम की राष्ट्रपति से खास मुलाकात: भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात: सांसदों की सदस्यता पर जंग
भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मिलकर 7 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की और इसे असंवैधानिक बताया।
HIGHLIGHTS
- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर सांसदों के दलबदल पर चिंता जताई।
- मान ने 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय को असंवैधानिक करार देते हुए सदस्यता रद्द करने की मांग की।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान का उल्लंघन हो रहा है और सांसदों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।
- राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे दिग्गज नेताओं ने भी राष्ट्रपति से मिलकर पंजाब सरकार के मुद्दों पर चर्चा की।
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पंजाब की राजनीति में बड़ा संवैधानिक संकट
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति भवन में हुई इस बैठक के दौरान दलबदल कानून की बारीकियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सात सांसदों का एक साथ पाला बदलना किसी भी तरह से कानूनी नहीं माना जा सकता।
मान ने जोर देकर कहा कि देश का शासन संविधान और तय कानूनों के हिसाब से चलना चाहिए। किसी भी दल के प्रतिनिधि अपनी मनमर्जी से जनता के जनादेश का अपमान नहीं कर सकते हैं।
सांसदों के विलय पर भगवंत मान के तीखे सवाल
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मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर सांसदों को आम आदमी पार्टी की नीतियां पसंद नहीं थीं, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए था। इस्तीफा देकर वे दोबारा जनता के बीच जा सकते थे।
उन्होंने आगे कहा कि बिना इस्तीफा दिए दूसरी पार्टी में शामिल होना अनैतिक है। यह उन मतदाताओं के साथ धोखा है जिन्होंने उन्हें आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में चुना था।
संविधान की रक्षा के लिए राष्ट्रपति से गुहार
भगवंत मान ने राष्ट्रपति से अपील की है कि इन सांसदों की सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द की जाए। उन्होंने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची का खुला उल्लंघन करार दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वर्तमान कानून में ऐसे विलय को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है, तो सरकार को इसमें संशोधन करना चाहिए। उन्होंने 'रिकॉल' के प्रावधान पर भी विचार करने की बात कही।
अगर हमारे 10 में से 7 राज्यसभा सांसद एक साथ आकर ऐलान कर दें कि उन्होंने दूसरी पार्टी में विलय कर लिया है, तो ऐसा कोई कानून नहीं है। वे अपनी मनमानी नहीं कर सकते।
लोकतंत्र के भविष्य पर मंडराते खतरे
मान ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिला, तो देश में लोकतंत्र का ढांचा कमजोर हो जाएगा। उन्होंने इसे एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत बताया है।
उन्होंने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि पंजाब की जनता इस घटनाक्रम से काफी आहत है। जनता चाहती है कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि अपनी निष्ठा के प्रति ईमानदार रहें।
अन्य नेताओं की भागीदारी और चिंताएं
बता दें कि इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के साथ राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे। इन नेताओं ने भी पंजाब सरकार की चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखा।
राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब में चुनी हुई सरकार के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर शक्ति के गलत इस्तेमाल का आरोप भी लगाया है।
निष्कर्ष: कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की तैयारी
यह राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे संविधान की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और राजनीतिक कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार पंजाब में अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करती है, तो आम आदमी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। पार्टी इस मुद्दे को जनता की अदालत में भी ले जाएगी।
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