जयपुर | राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों पर हुए निर्वाचन के बाद भी उच्च सदन में भाजपा और कांग्रेस के बीच शक्ति संतुलन बना हुआ है। दोनों दलों के पास अब राज्य कोटे से पांच-पांच सदस्य हैं। चुनाव से पहले भी यही स्थिति थी, जो नए निर्वाचन के बाद भी कायम है।
राजस्थान राज्यसभा का गणित: चुनाव के बाद भी BJP-कांग्रेस 5-5 पर बराबर
राजस्थान से राज्यसभा चुनाव के बाद भी भाजपा और कांग्रेस में 5-5 सीटों का संतुलन बरकरार है। जानें 2028 में कैसे बदलेगा समीकरण।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के बाद भी भाजपा-कांग्रेस 5-5 सीटों पर बराबर हैं।
- भाजपा के सभी 5 सांसद राजस्थानी हैं, जबकि कांग्रेस का सिर्फ 1 स्थानीय है।
- सतीश पूनिया और अलका गुर्जर भाजपा से, नीरज डांगी कांग्रेस से निर्वाचित हुए।
- 2028 में 4 सीटें खाली होंगी, जिससे भाजपा को बढ़त मिलने की संभावना है।
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हाल ही में हुए चुनाव में भाजपा के राजेन्द्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू तथा कांग्रेस के नीरज डांगी का कार्यकाल समाप्त हो रहा था।
इन सीटों पर भाजपा ने डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को राज्यसभा भेजा है। वहीं, कांग्रेस ने अपने मौजूदा सांसद नीरज डांगी पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें पुनः निर्वाचित कराया है।
स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा
भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों में एक बड़ा अंतर स्थानीयता का है। भाजपा की यह विशेषता है कि उसके सभी पांचों राज्यसभा सदस्य राजस्थान के ही मूल निवासी हैं।
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दूसरी ओर, कांग्रेस के पांच सदस्यों में से केवल नीरज डांगी ही राजस्थान से हैं। कांग्रेस के अन्य सदस्यों में सोनिया गांधी (नई दिल्ली), मुकुल बालकृष्ण वासनिक (महाराष्ट्र), रणदीप सिंह सुरजेवाला (हरियाणा) और प्रमोद तिवारी (उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी हैं।
नेताओं ने क्या कहा?
नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा,
"कांग्रेस कश्मीर से कन्याकुमारी तक अप्रासंगिक हो चुकी है। राजस्थान में पार्टी के भीतर खींचतान मची हुई है। अशोक गहलोत पार्टी को संभालने में विफल रहे।"
वहीं, कांग्रेस के नीरज डांगी ने कहा कि पार्टी एकजुट होकर 2028 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी और राजस्थान में सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा,
"राजनीतिक टूट-फूट लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है।"
2028 में बदलेगा समीकरण
राज्यसभा में राजस्थान के प्रतिनिधित्व का असली खेल 4 जुलाई, 2028 में देखने को मिलेगा, जब 4 सीटें एक साथ रिक्त होंगी।
इनमें कांग्रेस के तीन सदस्य प्रमोद तिवारी, मुकुल वासनिक और रणदीप सुरजेवाला का कार्यकाल खत्म होगा। वहीं, भाजपा से घनश्याम तिवाड़ी का कार्यकाल पूरा होगा।
तत्कालीन विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से 2 सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसे में भाजपा के खाते में ज्यादा सीटें आने की प्रबल संभावना है।
कुल मिलाकर, मौजूदा चुनाव ने भले ही संख्या बल में कोई बदलाव नहीं किया हो, लेकिन इसने 2028 में होने वाले बड़े फेरबदल की नींव रख दी है। तब विधानसभा के आंकड़े ही राज्यसभा में राजस्थान के प्रतिनिधित्व की अंतिम दिशा तय करेंगे।
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