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राजस्थान

भीलवाड़ा डेयरी: अब कलक्टर संभालेंगे कमान: भीलवाड़ा डेयरी में पहली बार बिना अध्यक्ष के पूरा हुआ कार्यकाल, 10 अप्रेल से जिला कलक्टर संभालेंगे प्रशासक का पदभार

मानवेन्द्र जैतावत

भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का कार्यकाल बिना अध्यक्ष के समाप्त हो रहा है। 10 अप्रेल से जिला कलक्टर प्रशासक का पदभार संभालेंगे, जिससे डेयरी प्रशासन में बड़ा बदलाव आएगा।

HIGHLIGHTS

  • 9 अप्रेल को संचालक मंडल का कार्यकाल विधिवत रूप से समाप्त हो रहा है।
  • 10 अप्रेल से भीलवाड़ा जिला कलक्टर प्रशासक का कार्यभार संभालेंगे।
  • रामलाल जाट के इस्तीफे के बाद साढ़े चार साल से अध्यक्ष पद खाली था।
  • 1200 समितियों के 60 हजार पशुपालक डेयरी नेटवर्क से सीधे जुड़े हैं।
bhilwara dairy collector administrator appointment term ends

भीलवाड़ा | भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के इतिहास में एक नया और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है। यह पहला मौका है जब डेयरी बोर्ड बिना किसी निर्वाचित अध्यक्ष के अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रहा है। 9 अप्रेल को वर्तमान संचालक मंडल का कार्यकाल विधिवत रूप से समाप्त हो जाएगा। इसके तुरंत बाद, 10 अप्रेल से भीलवाड़ा जिला कलक्टर डेयरी के प्रशासक के रूप में संघ की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे।

इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति

डेयरी के दशकों पुराने इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि कार्यकाल के अंत में कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष मौजूद नहीं है। संचालक मंडल के सदस्य ही अब तक की बैठकों की अध्यक्षता करते आए हैं। कामकाज को सुचारू रखने के लिए बोर्ड की बैठकों में उपस्थित निदेशकों में से ही किसी एक को कार्यकारी अध्यक्ष चुना जाता था। इसी प्रक्रिया के तहत डेयरी के महत्वपूर्ण नीतिगत और वित्तीय निर्णय पिछले कुछ समय से लिए जा रहे थे।

रामलाल जाट के इस्तीफे के बाद खाली थी कुर्सी

इस पूरी स्थिति की शुरुआत 8 अप्रेल 2021 को हुए संचालक मंडल के चुनावों के बाद हुई थी। तब 10 अप्रेल को रामलाल जाट को निर्विरोध चेयरमैन चुना गया था। हालांकि, यह कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चल सका। 21 नवंबर 2021 को रामलाल जाट ने राज्य सरकार में राजस्व मंत्री के रूप में शपथ ली। 'एक व्यक्ति-एक पद' के सिद्धांत और सहकारी नियमों के कारण उन्होंने 4 दिसंबर 2021 को इस्तीफा दे दिया। तब से लेकर आज तक, यानी पिछले लगभग साढ़े चार वर्षों से भीलवाड़ा डेयरी का अध्यक्ष पद रिक्त पड़ा है। डेयरी का संचालन केवल 11 निर्वाचित निदेशकों के भरोसे ही चलता रहा।

मतदान का पेचीदा गणित और पशुपालक

भीलवाड़ा डेयरी का नेटवर्क जिले में काफी विशाल और मजबूत माना जाता है। जिले भर की लगभग 1200 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां इस संघ की प्राथमिक सदस्य हैं। इन समितियों के माध्यम से करीब 60 हजार पशुपालक सीधे तौर पर डेयरी के व्यापारिक नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। लेकिन चुनावी गणित काफी हैरान करने वाला है। हजारों पशुपालकों के जुड़े होने के बावजूद, संचालक मंडल को चुनने का अधिकार मात्र 200 सदस्यों के पास ही सुरक्षित है। यही चुनिंदा लोग डेयरी का भविष्य तय करते हैं।

प्रशासकों के दौर का इतिहास

डेयरी की स्थापना से अब तक के सफर को देखें तो यहां प्रशासकों का काफी दबदबा रहा है। 1972 में जगदीश राम शर्मा को पहले प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था। अब तक के इतिहास में 18 बार प्रशासक, एक बार मनोनीत अध्यक्ष और छह बार निर्वाचित अध्यक्षों ने संघ की कमान संभाली है। रामलाल जाट ने चार बार अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया था, जो एक रिकॉर्ड है।

भविष्य की चुनौतियां और कानूनी तैयारी

बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही अब नए चुनावों की मांग जिले में तेज हो गई है। कुछ लोग चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर कानूनी रुख अपनाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। खबरों के अनुसार, चुनाव की मांग को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में एक विशेष याचिका दायर करने की प्रक्रिया चल रही है। पशुपालकों और डेयरी सदस्यों को अब नई लोकतांत्रिक व्यवस्था और नए नेतृत्व का बेसब्री से इंतजार है। जिला कलक्टर के प्रशासक बनने के बाद डेयरी के दैनिक कार्यों और लंबित परियोजनाओं पर क्या असर पड़ता है, यह देखना काफी दिलचस्प होगा। फिलहाल, भीलवाड़ा डेयरी एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के दौर से गुजर रही है और आगामी चुनाव ही इसकी भविष्य की दिशा और दशा तय करेंगे।

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