भीलवाड़ा | राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन के भी होश उड़ा दिए हैं। यहां एक शातिर गिरोह ने 83 लाख रुपये की भारी-भरकम बीमा राशि हड़पने के लिए एक युवक की मौत के बाद उसके शव को करंट लगाया। आरोपियों ने मौत को हादसा दिखाने के लिए शव की अंगुलियों को बुरी तरह जला दिया। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए चार आरोपियों को हिरासत में लिया है।
83 लाख के लिए शव को करंट लगाया: भीलवाड़ा: 83 लाख के बीमा क्लेम के लिए शव को करंट लगाया
भीलवाड़ा में बीमा क्लेम के लिए शव को करंट लगाकर हादसा दिखाने की कोशिश, 4 आरोपी गिरफ्तार।
HIGHLIGHTS
- भीलवाड़ा में 83 लाख रुपये के बीमा क्लेम के लिए युवक के शव को करंट लगाकर जलाने का सनसनीखेज मामला।
- पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर गंगरार टोल नाके से चार आरोपियों को किया गिरफ्तार।
- आरोपी गुजरात में गंभीर बीमार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शराब पिलाकर उनका बीमा करवाते थे।
- मृतक के नाम पर 83 लाख रुपये के चार अलग-अलग बीमा थे, जिसकी किस्त गिरोह ही भरता था।
संबंधित खबरें
भीलवाड़ा में बीमा क्लेम का सनसनीखेज खेल
गांधीनगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया ने बताया कि 7 मई की रात को मांडल थाने से सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध शव अस्पताल लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर पुलिस को 36 वर्षीय दीपक का शव मिला।
दीपक मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला था। उसकी मां चंपाबेन ने बताया कि कुछ लोग दीपक का इलाज कराने के बहाने उसे राजस्थान लेकर आए थे। वे भीलवाड़ा के मालोला गांव में रुके थे।
रात के समय जब दीपक की मौत हो गई, तो साथ आए लोगों ने उसकी मां को कमरे से बाहर बैठा दिया। इसके बाद उन्होंने दीपक के शव के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी ताकि उसे दुर्घटना साबित किया जा सके।
संबंधित खबरें
शव को करंट और अंगुलियों को जलाया
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दीपक के पैर के अंगूठे और हाथ की अंगुलियों को करंट से जला दिया। उन्होंने अस्पताल में यह झूठ बोला कि दीपक खेत पर काम करते समय करंट की चपेट में आ गया था।
मांडल अस्पताल के डॉक्टर रोहित सहरावत को शव देखते ही शक हो गया था। उन्होंने देखा कि करंट के निशान प्राकृतिक नहीं थे। साथ ही सीने पर ईसीजी इलेक्ट्रोड्स के पुराने निशान भी मौजूद थे।
डॉक्टर ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस के आने की भनक लगते ही आरोपी मृतक की बुजुर्ग मां और 14 साल के बेटे को अस्पताल में ही छोड़कर मौके से फरार हो गए।
मोबाइल लोकेशन से पकड़े गए आरोपी
पुलिस ने भाग रहे आरोपियों का पीछा किया। मृतक के बेटे ने पुलिस को विशाल, सूरज, अर्जुन और ड्राइवर भरत भाई के नाम बताए। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर गंगरार टोल नाके पर नाकाबंदी की।
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को धर दबोचा और उनकी गाड़ी जब्त कर ली। पूछताछ में जो खुलासे हुए, उन्होंने एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा किया है जो गुजरात से राजस्थान तक फैला है।
शराब की लत और 3000 रुपये का लालच
मृतक की मां ने बताया कि सूरज और विशाल गुजरात में ऐसे लोगों को ढूंढते थे जो शराब के आदी या गंभीर बीमार हों। वे उन्हें हर महीने शराब के लिए 3000 रुपये का लालच देते थे।
दीपक भी अपनी पत्नी की मौत के बाद सदमे में था और उसे शराब की लत लग गई थी। गिरोह ने उसकी किडनी खराब होने का फायदा उठाया और उसके नाम पर लाखों का बीमा करवा दिया।
आरोपी खुद ही बीमा की किस्तें भरते थे। जब डॉक्टरों ने कह दिया कि दीपक ज्यादा दिन जीवित नहीं रहेगा, तब यह गिरोह उसे मजदूरी के बहाने राजस्थान ले आया ताकि उसकी मौत को दुर्घटना दिखाया जा सके।
83 लाख के चार बीमा और 71 शिकार
जांच में पता चला कि दीपक के नाम पर कुल 83 लाख रुपये के चार अलग-अलग बीमा थे। आरोपियों ने उसकी मां को झांसा दिया था कि मौत होने पर उन्हें 4-5 लाख रुपये दिलवा दिए जाएंगे।
हैरान करने वाली बात यह है कि दीपक के बेटे ने दावा किया कि उनके गांव में इस गिरोह ने करीब 71 लोगों के इसी तरह बीमा करा रखे हैं। यह गिरोह बीमार लोगों की मौत का इंतजार करता है।
भीलवाड़ा एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने कहा,
इस मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बीमा दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। हमें शक है कि इसमें बीमा एजेंट और सर्वेयर भी शामिल हो सकते हैं।
पुलिस और विधायक ने की आर्थिक मदद
दीपक का परिवार इतना गरीब था कि शव को वापस गुजरात ले जाने के लिए उनके पास 16 हजार रुपये भी नहीं थे। इस पर मांडल विधायक उदयलाल भडाणा और थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया ने आर्थिक मदद की।
पुलिसकर्मियों ने आपस में पैसे जुटाकर शव को एंबुलेंस से गुजरात भिजवाने की व्यवस्था की। इस घटना ने समाज के उस काले चेहरे को उजागर किया है जहां चंद रुपयों के लिए इंसानियत को दांव पर लगा दिया जाता है।
यह मामला केवल एक धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध है। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि भविष्य में ऐसे मासूमों को शिकार होने से बचाया जा सके।
*Edit with Google AI Studio