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राजस्थान

जयपुर: घनी आबादी में 5 मंजिला इमारत ध्वस्त, 10 घर खाली कराए

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

रामगंज में पिलर क्षतिग्रस्त होने से खतरनाक हुई बिल्डिंग को नगर निगम ने गिराया, लोगों ने ली राहत की सांस।

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HIGHLIGHTS

  • जयपुर के रामगंज में 5 मंजिला खतरनाक इमारत को गिराया गया।
  • पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद बिल्डिंग में दरारें आ गई थीं।
  • कार्रवाई से पहले इमारत में रहने वाले 8-10 परिवारों को सुरक्षित शिफ्ट किया गया।
  • आसपास के 10 अन्य मकानों को भी एहतियातन खाली कराया गया।
jaipur ramganj 5 storey building demolished municipal corporation action

जयपुर | राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक पांच मंजिला इमारत को ध्वस्त कर दिया गया। रामगंज इलाके में स्थित यह भवन पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद खतरनाक घोषित कर दिया गया था, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत थी। नगर निगम ने पुलिस सुरक्षा के बीच इस चुनौतीपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया।

क्यों खतरनाक हो गई थी इमारत?

जानकारी के अनुसार, इस भवन के निचले हिस्से में दो दुकानों को एक करने के लिए बीच की दीवार हटा दी गई थी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी संरचनात्मक बदलाव के कारण इमारत का एक मुख्य पिलर कमजोर होकर क्षतिग्रस्त हो गया।

इसके तुरंत बाद, पूरी इमारत में दरारें दिखने लगीं और इसके संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था।

खतरे को भांपते हुए नगर निगम ने तुरंत कार्रवाई की और इमारत को खाली करवा लिया।

लोगों को किया गया सुरक्षित शिफ्ट

इस खतरनाक इमारत में लगभग 8 से 10 परिवार रहते थे, जिनमें करीब 30 सदस्य शामिल थे।

नगर निगम ने इन सभी परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया था ताकि किसी भी तरह की जनहानि न हो।

इस घटना के कारण आसपास का बाजार भी प्रभावित हुआ और सुरक्षा के लिहाज से कई दिनों तक रास्ता बंद रखना पड़ा।

तकनीकी जांच के बाद ध्वस्तीकरण का फैसला

नगर निगम ने इमारत की मजबूती का आकलन करने के लिए एक तकनीकी टीम से जांच करवाई थी।

जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि भवन की मरम्मत करना संभव नहीं है और इसे सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।

इसी रिपोर्ट के आधार पर निगम प्रशासन ने इसे ध्वस्त करने का अंतिम निर्णय लिया।

यह कार्रवाई बेहद चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि यह इलाका बहुत संकरा है, जहां से दो कारों का एक साथ निकलना भी मुश्किल होता है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हम पिछले तीन महीने से डर के साये में जी रहे थे। हर पल लगता था कि कहीं इमारत गिर न जाए। अब जाकर हमने राहत की सांस ली है।"

कार्रवाई के दौरान आसपास के 10 से अधिक मकानों को भी सुरक्षा के लिए खाली करा लिया गया था।

गनीमत रही कि इमारत का ज्यादातर मलबा पास के एक पुराने पेड़ पर गिरा, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, सामने वाले एक भवन को भी मामूली नुकसान पहुंचा है।

पुराने निर्माणों पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद परकोटा क्षेत्र में स्थित पुराने और अवैध रूप से किए गए निर्माणों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे सभी खतरनाक भवनों की नियमित रूप से जांच की जाए।

लोगों का कहना है कि समय पर कार्रवाई करके भविष्य में होने वाले किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सकता है।

अब नगर निगम की टीम मौके से मलबा हटाने के काम में जुट गई है, जिसमें कुछ दिन लगने की संभावना है।

*Edit with Google AI Studio

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