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राजस्थान

बीजासन माता मंदिर रोपवे कार्य शुरू: बीजासन माता मंदिर रोपवे: ₹16 करोड़ से सुगम होंगे दर्शन

मानवेन्द्र जैतावत

इंद्रगढ़ के बीजासन माता मंदिर में ₹16 करोड़ की लागत से रोपवे का कार्य शुरू, श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत।

HIGHLIGHTS

  • बूंदी के इंद्रगढ़ में स्थित बीजासन माता मंदिर के लिए ₹16 करोड़ की लागत से रोपवे का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
  • इस रोपवे प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद श्रद्धालु 750 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई के बजाय आसानी से मंदिर पहुंच सकेंगे।
  • प्रारंभिक तौर पर इसमें 12 ट्रॉलियां लगाई जाएंगी, जिसे भविष्य में भीड़ के अनुसार बढ़ाकर 16 किया जा सकता है।
  • परियोजना को पूरा होने में लगभग 2 वर्ष का समय लगेगा, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को दर्शन में विशेष सुविधा मिलेगी।
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बूंदी | राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक इंद्रगढ़ स्थित श्री बीजासन माता मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। मंदिर तक पहुंचने की राह अब सुगम होने वाली है, क्योंकि ₹16 करोड़ की लागत से बनने वाले रोपवे का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है।

इस महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 23 फरवरी को किया गया था। अब धरातल पर कार्य शुरू होने से स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

रोपवे की क्षमता और तकनीकी विशेषताएं

प्रारंभिक चरण में रोपवे क्षेत्र में तारबंदी का कार्य शुरू किया गया है। निर्माण कंपनी के अनुसार, आने वाले 15 से 20 दिनों में सिविल और मैकेनिकल कार्य और अधिक गति पकड़ेंगे। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के पर्यटन को नई दिशा देगा।

यह रोपवे अगले दो वर्षों के भीतर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें शुरुआत में 12 ट्रॉलियां लगाई जाएंगी। प्रत्येक ट्रॉली में एक साथ 6 श्रद्धालु बैठकर माता के दर्शन के लिए पहाड़ी पर जा सकेंगे।

विशेष बात यह है कि एक समय में 72 श्रद्धालु इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। भविष्य में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और आवश्यकता को देखते हुए ट्रॉलियों की संख्या 12 से बढ़ाकर 16 करने का भी प्रावधान रखा गया है।

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर विस्तार

यदि भविष्य में ट्रॉलियों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो एक साथ 96 श्रद्धालु मंदिर की पहाड़ी तक पहुंच पाएंगे। इससे विशेषकर नवरात्र और मेलों के दौरान लगने वाली लंबी कतारों से भक्तों को बड़ी राहत मिलेगी।

बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए वरदान

वर्तमान में बीजासन माता के दर्शन के लिए भक्तों को लगभग 750 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह बुजुर्गों, छोटे बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए काफी चुनौतीपूर्ण और थका देने वाला कार्य होता है।

रोपवे बनने के बाद शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी बिना किसी कठिनाई के पहाड़ी पर स्थित मंदिर में माथा टेक सकेंगे। इससे मंदिर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सुरक्षा मानकों और टेस्टिंग पर जोर

निर्माण कार्य के दौरान सबसे पहले सिविल स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसके बाद इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल उपकरणों को स्थापित किया जाएगा। सभी तकनीकी कार्य पूर्ण होने के बाद सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच की जाएगी।

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक से दो महीने तक रोपवे का ट्रायल रन यानी टेस्टिंग की जाएगी। सफल टेस्टिंग और विशेषज्ञ प्रमाणन के बाद ही इसे आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोला जाएगा।

बीजासन माता मंदिर पर रोपवे के कार्य की तारबंदी शुरू कर दी गई है। करीब डेढ़ वर्ष में कार्य पूरा करने का प्रयास करेंगे। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही तो ट्रॉलियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - दीपक सक्सेना, संवेदक

स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर प्रभाव

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इंद्रगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। स्थानीय दुकानदारों और टैक्सी संचालकों की आय में वृद्धि होगी।

अंततः, यह रोपवे राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर बूंदी जिले के महत्व को और अधिक बढ़ाएगा। सरकार की इस पहल से धार्मिक आस्था के साथ-साथ आधुनिक बुनियादी ढांचे का बेहतरीन समन्वय देखने को मिल रहा है।

*Edit with Google AI Studio

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