नई दिल्ली | ईरान और इजराइल के बीच हालिया सीजफायर के बाद वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित होगी।
इससे वैश्विक बाजार में तेल और गैस की आपूर्ति फिर से पटरी पर लौटने की संभावना है। इसी बीच ईरानी दूतावास ने चाबहार पोर्ट का एक महत्वपूर्ण वीडियो साझा किया है।
दूतावास ने इस पोर्ट को भारत और ईरान के बीच व्यापार के लिए 'गोल्डन ब्रिज' करार दिया है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
चाबहार पोर्ट: ईरान-इजराइल सीजफायर के बीच चर्चा में चाबहार पोर्ट, क्या अमेरिका बढ़ाएगा भारत की डेडलाइन? जानें पूरा समीकरण
ईरान और इजराइल के बीच युद्धविराम के बाद चाबहार पोर्ट फिर से वैश्विक व्यापार चर्चाओं के केंद्र में है। भारत इस रणनीतिक बंदरगाह के लिए अमेरिका से प्रतिबंधों में छूट की समयसीमा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसे व्यापार का 'गोल्डन ब्रिज' माना जाता है।
HIGHLIGHTS
- चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के बीच व्यापार के लिए एक रणनीतिक 'गोल्डन ब्रिज' के रूप में उभरा है।
- भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 15,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें इस पोर्ट की अहम भूमिका है।
- अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों की विशेष छूट 26 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाली है, जिसे बढ़ाने की मांग जारी है।
- यह पोर्ट भारत को पाकिस्तान को बायपास कर सीधे मध्य एशिया और यूरोप तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है।
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चाबहार पोर्ट और भारत का व्यापार
भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 15,000 करोड़ रुपये का है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण पिछले कुछ समय से यह व्यापार अधर में लटका हुआ था।
चाबहार पोर्ट इस व्यापारिक रिश्ते की सबसे मजबूत कड़ी है। भारत वर्तमान में अमेरिका से मिली विशेष छूट (सेंशन वेवियर) के तहत यहां से अपना व्यापार संचालित कर रहा है।
हालांकि, इस छूट की समयसीमा अब समाप्त होने के करीब है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत इसकी डेडलाइन बढ़ाने के लिए अमेरिका और ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है।
अमेरिका और प्रतिबंधों की वर्तमान स्थिति
साल 2018 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत के रणनीतिक हितों को देखते हुए चाबहार के लिए विशेष छूट प्रदान की गई थी।
यह छूट पहले सितंबर 2025 तक थी, जिसे बाद में छह महीने के लिए बढ़ाकर 26 अप्रैल 2026 कर दिया गया। भारत अब इसे और आगे ले जाना चाहता है।
यदि यह समयसीमा बढ़ती है, तो भारत को पाकिस्तान या चीन जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे भारत की पहुंच सीधे मध्य पूर्व और यूरोप तक हो जाएगी।
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रणनीतिक निवेश और 10 साल का समझौता
भारत ने 2024 में चाबहार के संचालन के लिए ईरान के साथ 10 साल का ऐतिहासिक समझौता किया था। यह डील इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) के जरिए पूरी हुई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत भारत लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। इसके अलावा 250 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश ऋण के रूप में प्रस्तावित है।
सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रतिबंध हटने के बाद भी ऑपरेशनल कंट्रोल भारत के पास रहे। इसके लिए स्थानीय पार्टनर्स को शामिल करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
पाकिस्तान को बायपास करने का रास्ता
चाबहार की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 170 किलोमीटर की दूरी पर ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है।
यह पोर्ट भारत के कांडला पोर्ट से 550 और मुंबई से 786 नॉटिकल माइल दूर है। इसके जरिए भारत पाकिस्तान को पूरी तरह बायपास कर अपना सामान भेज सकता है।
यह मार्ग सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों को जोड़ता है। आगे चलकर यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जुड़ता है, जिससे यूरोप तक व्यापार सुगम होगा।