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चंबल के बांध खाली, चिंता बढ़ी: चंबल के चार बांध 32% खाली, रबी फसलों पर संकट
हाड़ौती में मानसून की धीमी रफ्तार से चंबल के चार बड़े बांध 32% खाली हैं। इससे रबी सीजन की फसलों की सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
HIGHLIGHTS
- हाड़ौती संभाग में धीमी मानसून के कारण चंबल के चार बड़े बांध 32% खाली हैं।
- बांधों में पानी की कमी से राजस्थान और मध्य प्रदेश में 4.58 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की सिंचाई पर संकट।
- पिछले साल अच्छी बारिश के कारण कोटा बैराज की क्षमता का 7 गुना पानी चंबल नदी में छोड़ा गया था।
- किसानों ने रबी सीजन में गेहूं और लहसुन जैसी फसलों के लिए सिंचाई की चिंता जताई है।
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हाड़ौती संभाग में इस साल पिछले साल की तुलना में मानसून की रफ्तार काफी धीमी है। इसके चलते चंबल नदी पर बने चार प्रमुख बांधों में जलस्तर संतोषजनक नहीं है, जिससे आगामी रबी फसलों के लिए चिंता बढ़ गई है।
चंबल के बांधों में 32% पानी की कमी
मौजूदा हालात ये हैं कि चंबल के 4 बड़े बांध अभी भी 32% खाली हैं। इन चारों बांधों में गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज शामिल हैं।
इनकी कुल भराव क्षमता 10248.97 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCUM) है। 24 जुलाई सुबह 8 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, चारों बांधों में कुल 6926.403 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ही भरा है।
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इसका मतलब है कि बांधों में कुल क्षमता का 67.58% पानी है, जबकि 32.42% हिस्सा अब भी खाली है।
पानी की आवक कम होने का कारण
मध्यप्रदेश और चंबल नदी के कैचमेंट एरिया में उम्मीद से कम बारिश होने के कारण बांधों में पानी की आवक नहीं हो रही है। इसी वजह से जलस्तर में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है।
रबी फसलों पर संकट के बादल
बांधों में पानी की कमी ने रबी सीजन की फसलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन्हीं बांधों से छोड़े जाने वाले पानी से दाईं और बाईं मुख्य नहर के माध्यम से सिंचाई होती है।
रबी के सीजन में इन नहरों से मध्यप्रदेश और राजस्थान की कुल 4.58 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।
पिछले साल की स्थिति
पिछले साल अच्छी बारिश होने के कारण हालात बिल्कुल अलग थे। तब कोटा बैराज की क्षमता का 7 गुना पानी चंबल नदी में छोड़ना पड़ा था, जो व्यर्थ ही बह गया था।
किसानों को सता रही सिंचाई की चिंता
हर साल अक्टूबर से रबी सीजन के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, रबी फसलों के लिए नहरें हर साल औसतन 150 से 160 दिन तक चलती हैं।
राजस्थान और मध्यप्रदेश के 4.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई के लिए हर सीजन में औसतन 2000 से 2600 MCUM पानी की आवश्यकता होती है।
कम बारिश और बांधों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसानों को अभी से ही रबी सीजन में सिंचाई की चिंता सताने लगी है।
किसान नेता ने जताई चिंता
किसान नेता गिर्राज शर्मा ने बताया कि चंबल नदी पर सबसे बड़ा बांध गांधी सागर है, जिसका पानी एमपी और राजस्थान में सिंचाई के काम आता है।
उन्होंने कहा, "अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई है, इस कारण बांध में पानी नहीं आया है। अभी तो गांधी सागर में पानी का लेवल ठीक दिख रहा है। हो सकता है एक-दो साल सिंचाई में दिक्कत न हो, लेकिन बारिश नहीं हुई तो आगे परेशानी बढ़ सकती है।"
शर्मा ने आगे कहा कि अक्टूबर में रबी का सीजन आएगा, जिसमें गेहूं और लहसुन जैसी फसलों में पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है।
व्यर्थ पानी के सदुपयोग की मांग
किसान नेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि हर साल बारिश के दिनों में लाखों क्यूसेक पानी चंबल नदी की डाउनस्ट्रीम में व्यर्थ ही छोड़ा जाता है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो पाता।
क्षेत्र के किसानों की मांग है कि बैराज से व्यर्थ छोड़े जाने वाले पानी का सदुपयोग होना चाहिए। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि बारिश कम हो या ज्यादा, बांधों की भराव क्षमता हमेशा बनी रहे।
चंबल कमांड क्षेत्र की नहरें
बाईं मुख्य नहर के सेक्शन इंजीनियर (SE) हरेत लाल मीणा ने बताया कि चंबल कमांड क्षेत्र से दो मुख्य नहरें निकलती हैं - LMC (बाईं मुख्य नहर) और RMC (दाईं मुख्य नहर)।
बाईं मुख्य नहर (LMC)
LMC का फैलाव कोटा और बूंदी जिले के लबान खटखड़ तक 1113 किमी है। इसकी क्षमता 1500 क्यूसेक है और इससे 1 लाख 2 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया जुड़ा है।
दाईं मुख्य नहर (RMC)
RMC का राजस्थान में (कोटा-बारां जिला) 1376 किमी फैलाव है। यह नहर आगे मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना, ग्वालियर और श्योपुर जिलों तक जाती है। इसकी क्षमता 6000 क्यूसेक है और इससे कुल 3.56 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया जुड़ा है (राजस्थान में 1.27 लाख और एमपी में 2.29 लाख हेक्टेयर)।
बांधों की वर्तमान स्थिति (24 जुलाई सुबह 8 बजे तक)
गांधी सागर: क्षमता 7164.94 MCUM, भरा हुआ 4835.668 MCUM।
राणा प्रताप सागर: क्षमता 2904.85 MCUM, भरा हुआ 1933.922 MCUM।
जवाहर सागर: क्षमता 67.12 MCUM, भरा हुआ 46.723 MCUM।
कोटा बैराज: क्षमता 112.06 MCUM, भरा हुआ 110.09 MCUM।
पिछले साल का रिकॉर्ड
सहायक अभियंता नितेश कुमार वर्मा ने बताया कि पिछले साल मानसून में अच्छी बारिश हुई थी। साल 2025 में 20 जुलाई तक कोटा बैराज से 859.90 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी चंबल नदी में व्यर्थ छोड़ा गया था, जो बैराज की क्षमता का 7.67 गुना था।
साल 2025 में 18 जून से 20 जुलाई के बीच 30 से ज्यादा दिनों तक कोटा बैराज के गेट खोलने पड़े थे।
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