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भारत

स्कूली शिक्षा में शास्त्रीय नृत्य: NEP 2020: अब स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे भारतीय शास्त्रीय नृत्य, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

मानवेन्द्र जैतावत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अब स्कूली शिक्षा में भारतीय शास्त्रीय नृत्यों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। सरकार विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं के माध्यम से छात्रों को छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

HIGHLIGHTS

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्यों को कला-एकीकृत शिक्षा के रूप में शामिल किया गया है।
  • सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) 10-14 वर्ष के प्रतिभाशाली बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है।
  • कलाक्षेत्र फाउंडेशन कक्षा 4 से 12 तक के छात्रों को भरतनाट्यम और कर्नाटक संगीत का विशेष प्रशिक्षण दे रहा है।
  • संगीत नाटक अकादमी ने 'कला दीक्षा' और 'कला धरोहर' जैसी योजनाओं के माध्यम से पारंपरिक कलाओं के संरक्षण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
classical dance integration school curriculum nep 2020

नई दिल्ली | भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन के जरिए स्कूली शिक्षा के ढांचे में एक क्रांतिकारी और सांस्कृतिक बदलाव की शुरुआत की है। इस नई नीति के तहत भारतीय शास्त्रीय नृत्यों को स्कूली पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को कला-एकीकृत, अनुभवात्मक और बहुविषयक शिक्षा प्रदान करना है।

संस्थानों की सक्रिय भागीदारी

संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था कलाक्षेत्र फाउंडेशन इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह फाउंडेशन स्कूलों में कक्षा IV से VIII तक के छात्रों को सप्ताह में दो विशेष पीरियड प्रदान करता है। कक्षा XI और XII के ललित कला के छात्रों के लिए सप्ताह में लगभग 8 पीरियड निर्धारित किए गए हैं। इसमें छात्रों को भरतनाट्यम, कर्नाटक संगीत और दृश्य कलाओं के अंशकालिक पाठ्यक्रम भी सिखाए जाते हैं।

कला धरोहर और कार्यशालाएं

संगीत नाटक अकादमी ने स्कूली बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से 'कला धरोहर' कार्यक्रम का आयोजन किया है। इसमें प्रदर्शन कला, व्याख्यान और कार्यशालाएं शामिल हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान देश भर के 67 स्कूलों के सहयोग से विभिन्न कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया गया है। इससे छात्रों को कलाकारों से सीधे सीखने का अवसर मिल रहा है।

सांस्कृतिक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति

सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) 1982 से राष्ट्रीय स्तर पर छात्रवृत्ति योजना संचालित कर रहा है। यह योजना 10 से 14 वर्ष की आयु के उत्कृष्ट प्रतिभाशाली बच्चों के लिए है। इसका लक्ष्य उन बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देना है जो मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ रहे हैं या पारंपरिक कलाकार परिवारों से हैं। इसमें संगीत, नृत्य, नाटक और मूर्तिकला जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

कला दीक्षा और वित्तीय सहायता

संगीत नाटक अकादमी ने 'कला दीक्षा' योजना के तहत लुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं के लिए 90 प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसमें गुरुओं और शिष्यों को मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत गुरु को 8000 रुपये, सहायक गुरु को 6000 रुपये और प्रशिक्षुओं को 2500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। इससे पारंपरिक कलाओं का संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।

बजट और भविष्य की राह

सरकार ने इन संस्थानों के लिए बजट में भारी बढ़ोतरी की है। संगीत नाटक अकादमी का अनुदान 2020-21 के 5222 लाख रुपये से बढ़कर 2024-25 में 12099 लाख रुपये तक पहुंच गया है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार युवाओं के बीच शास्त्रीय कलाओं के प्रचार-प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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