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दिल्ली

सियासी घमासान: वंदे मातरम् पर कांग्रेस-BJP में टकराव, 1937 का फैसला बना वजह

बलजीत सिंह शेखावत

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और BJP में सियासी टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस ने 1937 के फैसले के तहत पहले दो अंतरों के गायन की परंपरा जारी रखने की बात कही है, जिस पर BJP ने तीखा हमला बोला है।

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HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस ने पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों के गायन की 1937 की परंपरा को जारी रखने का फैसला किया है।
  • BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस के इस रुख की आलोचना करते हुए पार्टी की तुलना 'आज की मुस्लिम लीग' से की है।
  • यह विवाद 1937 में कलकत्ता में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से जुड़ा है, जिसमें मुस्लिम समुदाय की आपत्तियों पर चर्चा हुई थी।
  • 2026 में एक प्रस्तावित बिल के जरिए वंदे मातरम् को राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण देने की तैयारी है।
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वंदे मातरम् पर कांग्रेस और BJP में नया टकराव

वंदे मातरम् की पूरी रचना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी टकराव में बदल गया है। कांग्रेस कार्यसमिति ने 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले पर कायम रहने का निर्णय किया है, जिसके तहत पार्टी कार्यक्रमों में गीत के केवल पहले दो अंतरों का ही गायन किया जाता रहा है।

इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। BJP ने इसे महज एक पुराना संगठनात्मक फैसला मानने से इनकार करते हुए कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

BJP अध्यक्ष नितिन नबीन का तीखा हमला

इस सियासी हमले के बीच, BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस की तुलना 'आज की मुस्लिम लीग' से कर दी है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

कांग्रेस कार्यसमिति ने अपने ताजा रुख में स्पष्ट किया है कि पार्टी के आयोजनों में वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों का ही गायन किया जाएगा। पार्टी ने साफ किया कि यह कोई नया निर्णय नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें 1937 में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हैं।

विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?

नेहरू आर्काइव में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, अक्टूबर-नवंबर 1937 में कलकत्ता में हुई कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम् को लेकर मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

इस चर्चा के बाद, समिति ने राष्ट्रीय सभाओं में गीत के पहले दो अंतरों के इस्तेमाल की सिफारिश की थी। यही ऐतिहासिक फैसला अब 2026 की राजनीति में एक बार फिर से केंद्र में आ गया है।

'आज की मुस्लिम लीग' वाला बयान

BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी का यह रवैया उन स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है, जिन्होंने वंदे मातरम् से प्रेरणा लेकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी।

BJP का तर्क है कि आजादी से पहले मुस्लिम लीग के दबाव में कांग्रेस ने कई मुद्दों पर समझौते किए थे, और वंदे मातरम् भी उन्हीं में से एक था।

संसद में कानूनी संरक्षण का प्रस्ताव

यह मामला सिर्फ कांग्रेस के आंतरिक कार्यक्रमों तक ही सीमित नहीं है। जुलाई 2026 में संसद में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनी संरक्षण के दायरे में लाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित 'Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026' के जरिए वंदे मातरम् को राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान है।

इस प्रस्तावित व्यवस्था में जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने पर सजा का प्रावधान भी शामिल है। इसी वजह से BJP कांग्रेस के 1937 के प्रस्ताव को सिर्फ एक आंतरिक परंपरा न मानकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देख रही है।

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