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भारत

क्रूड ऑयल $72 पर स्थिर, OPEC+ का फैसला: OPEC+ फैसले से क्रूड $72 पर स्थिर, जानें तेल के दाम

बलजीत सिंह शेखावत

OPEC+ देशों के तेल उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं।

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HIGHLIGHTS

  • ओपेक+ देशों ने अगस्त से कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
  • वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 72.20 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 68.94 डॉलर पर कारोबार कर रहा है।
  • जून में ओपेक का तेल उत्पादन बढ़कर 1.943 करोड़ बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया।
  • भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 मई के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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नई दिल्ली | वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता देखी जा रही है। ओपेक प्लस देशों द्वारा तेल उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर के स्तर पर बना हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता

सोमवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड का भाव 72.20 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 68.94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने की पूरी संभावना है। इस बढ़ी हुई आपूर्ति से वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव लगातार बना रहेगा।

ओपेक प्लस का बड़ा फैसला

तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और उसके सहयोगी देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। इस गठबंधन ने अगस्त महीने से रोजाना 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

इससे पहले जून और जुलाई महीनों के लिए भी उत्पादन में इसी तरह की बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी। इस फैसले से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता काफी बढ़ जाएगी।

उत्पादन और निर्यात में सुधार

रॉयटर्स के एक हालिया सर्वे के अनुसार जून में ओपेक का तेल उत्पादन काफी बढ़ा है। यह पिछले महीने की तुलना में 33

इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। खाड़ी देशों का निर्यात जून में बढ़कर 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच गया है।

हालांकि बाजार विश्लेषकों का कहना है कि उत्पादन बढ़ाने के इस फैसले का पूरा असर अभी नहीं दिखा है। वर्तमान उत्पादन स्तर अभी भी युद्ध से पहले की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है।

ओपेक देशों की रणनीति

ओपेक प्लस देशों का यह निर्णय मुख्य रूप से वैश्विक मांग में सुधार को देखते हुए लिया गया है। कोरोना महामारी के बाद से ही तेल उत्पादक देश अपनी उत्पादन नीति में बदलाव कर रहे हैं।

रूस और सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादक देश बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं। उनका लक्ष्य बाजार में स्थिरता बनाए रखना है ताकि आर्थिक रिकवरी बाधित न हो।

भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद भारत में ईंधन की दरें स्थिर हैं। देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

भारत में ईंधन की कीमतों में आखिरी बार बड़ा बदलाव बीते 25 मई को किया गया था। तब से लेकर आज तक तेल कंपनियों ने कीमतों को पूरी तरह स्थिर बनाए रखा है।

प्रमुख शहरों में आज की दरें

देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये है।

कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल का दाम 107.77 रुपये और डीजल का दाम 99.55 रुपये प्रति लीटर है।

इसके अलावा गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये और नोएडा में 101.96 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.54 रुपये और जयपुर में 113.19 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।

हैदराबाद में ईंधन की कीमतें सबसे अधिक बनी हुई हैं जहां पेट्रोल 115.69 रुपये प्रति लीटर है। इन सभी शहरों में लंबे समय से कीमतों में कोई संशोधन नहीं किया गया है।

भारतीय तेल कंपनियों का रुख

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए वैश्विक कीमतों में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां दैनिक आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं। हालांकि राजनीतिक और आर्थिक कारणों से पिछले कई महीनों से संशोधन रुका हुआ है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड लंबे समय तक 75 डॉलर से नीचे रहता है तो ओएमसी को अच्छा मुनाफा होगा। इस मुनाफे का कुछ हिस्सा अंततः आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कम कीमतों के रूप में मिल सकता है।

विशेषज्ञों की राय और प्रभाव

बाजार विश्लेषकों के अनुसार ओपेक प्लस का यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा हो सकता है। उत्पादन बढ़ने से महंगाई पर नियंत्रण पाने में काफी मदद मिल सकती है।

"ओपेक प्लस का उत्पादन बढ़ाने का निर्णय वैश्विक बाजार को संतुलित करने की दिशा में एक सही कदम है, जिससे आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।"

यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 70 से 72 डॉलर के बीच बनी रहती हैं तो राहत मिल सकती है। भारतीय तेल कंपनियों पर भी आने वाले समय में खुदरा कीमतें घटाने का दबाव बढ़ेगा।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो ओपेक प्लस के फैसले से कच्चे तेल की बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी। हालांकि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

*Edit with Google AI Studio

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