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राजस्थान

जगन गुर्जर का जेल में अंत: अजमेर जेल में डकैत जगन गुर्जर की तौलिए से गला घोंटकर हत्या

Pradeep Beedawat

चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का खौफ खत्म। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी ने किया मर्डर।

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HIGHLIGHTS

  • अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या।
  • बैरक में बंद साथी कैदी विष्णु ने तौलिए से गला घोंट दिया।
  • जगन पर हत्या, लूट और डकैती के 87 मामले दर्ज थे।
  • कभी चंबल के बीहड़ों में जगन के नाम की दहशत थी।
dacoit jagan gurjar murdered in ajmer high security jail by inmate

अजमेर | राजस्थान के चंबल के बीहड़ों में कभी जिसका नाम आतंक का दूसरा नाम था, उस कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का अंत हो गया है। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद जगन की उसी के बैरक में एक साथी कैदी ने तौलिए से गला घोंटकर हत्या कर दी।

जेल में कैसे हुआ जगन का अंत?

यह घटना सोमवार को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हुई, जहाँ राजस्थान के सबसे खूंखार अपराधियों को रखा जाता है। जगन गुर्जर भी इसी जेल की एक बैरक में बंद था।

बैरक में मिला शव

पुलिस के अनुसार, घटना दोपहर 11 बजे से 3 बजे के बीच की है। इस समय सभी कैदियों को उनकी सेल में बंद किया जाता है। जब ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ राउंड पर आया और बैरक को खोला, तो उन्होंने जगन गुर्जर का शव जमीन पर पड़ा हुआ पाया।

उसका साथी कैदी विष्णु भी उसी बैरक के अंदर मौजूद था। सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया।

किसने और क्यों की हत्या?

एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जगन की हत्या उसके साथी कैदी विष्णु ने की है। विष्णु भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड का आरोपी है।

हत्या के लिए एक तौलिए का इस्तेमाल किया गया, जिससे गला दबाकर जगन को मौत के घाट उतारा गया। हालांकि, हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।

एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने कहा, "मामले की पुष्टि हो गई है। जगन गुर्जर का शव बैरक में मिला है और उसके साथी कैदी पर हत्या का आरोप है। हम मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं।"

कौन था जगन गुर्जर? चंबल का वो डकैत जिससे कांपते थे गांव

जगन गुर्जर का नाम अपराध की दुनिया में कोई नया नहीं था। लगभग तीन दशकों तक उसने चंबल के बीहड़ों में अपना आतंक कायम रखा। धौलपुर का डांग इलाका, जो तीन तरफ से बीहड़ों से घिरा है, उसका गढ़ हुआ करता था।

जीजा की हत्या का बदला और अपराध की दुनिया में कदम

जगन ने अपराध की दुनिया में अपना पहला कदम 1994 में रखा था। उसके जीजा की हत्या कर दी गई थी, जिसका बदला लेने के लिए उसने गांव के ही एक व्यक्ति का कत्ल कर दिया। इस हत्या के बाद पुलिस से बचने के लिए वह चंबल के बीहड़ों में कूद गया।

10 साल तक गांव में नहीं हुई कोई शादी

जगन का खौफ इस कदर था कि उसके अपने गांव भवूतीपुरा में करीब 10 सालों तक कोई शादी नहीं हुई। लोग अपनी बेटियों की शादी करने से डरते थे। इतना ही नहीं, उसकी दहशत से तंग आकर उसके अपने पिता और गांव के कई लोग गांव छोड़कर चले गए थे।

पत्नी और भाइयों के साथ बनाया गैंग

बीहड़ों में उतरने के बाद जगन अकेला नहीं था। उसने अपनी पत्नी और तीन भाइयों के साथ मिलकर अपना गैंग बनाया। धीरे-धीरे यह गैंग राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले चंबल का सबसे खतरनाक गैंग बन गया। जगन खुद को 'चंबल का बादशाह' कहने लगा।

प्रेम, धोखा और पहला सरेंडर

जगन की आपराधिक जिंदगी में एक फिल्मी मोड़ भी आया, जब उसे अपने ही गैंग की एक महिला सदस्य से प्यार हो गया। यह प्यार ही उसके पहले सरेंडर की वजह बना।

गैंग में प्रेमिका कोमेश की एंट्री

शुरुआत में जगन के गैंग में परिवार के लोग थे, लेकिन बाद में 25 से ज्यादा सदस्य हो गए। इन्हीं में से एक थी कोमेश गुर्जर, जो बाद में जगन की प्रेमिका बन गई।

प्रेमिका की गिरफ्तारी और जगन का आत्मसमर्पण

एक डकैती के दौरान पुलिस से हुई मुठभेड़ में कोमेश को गोली लग गई। जगन उसे किसी तरह धौलपुर के एक नर्सिंग होम में इलाज के लिए ले गया। लेकिन पुलिस को इसकी भनक लग गई और उन्होंने कोमेश को गिरफ्तार कर लिया।

अपनी प्रेमिका की गिरफ्तारी से टूटकर जगन ने पुलिस के सामने एक शर्त रखी। उसने कहा कि अगर उसे कोमेश के साथ रहने दिया जाए तो वह सरेंडर कर देगा। पुलिस ने उसकी बात मान ली और 2001 में उसने तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

जेल से रिहाई और आतंक का दूसरा दौर

जगन 2005 में जमानत पर जेल से बाहर आया। उसकी प्रेमिका कोमेश ने अपराध का रास्ता छोड़ दिया, लेकिन जगन ने अपने भाइयों के साथ मिलकर फिर से अपना आतंक फैलाना शुरू कर दिया। यह उसके अपराध का दूसरा और सबसे खतरनाक दौर था।

वसुंधरा राजे को दी महल उड़ाने की धमकी

साल 2008 में राजस्थान में गुर्जर आंदोलन चल रहा था। इस आंदोलन में कूदकर जगन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की धमकी दे डाली। इस धमकी ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी।

11 लाख का इनामी डकैत

इस धमकी के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और जगन गुर्जर पर 11 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही वह चंबल का सबसे बड़ा और मोस्ट वांटेड डकैत बन गया।

सियासत और सरेंडर का खेल

जगन की जिंदगी में अपराध के साथ-साथ सरेंडर और सियासत का खेल भी चलता रहा। उसने कई बार सरेंडर किया और हर बार बाहर आकर पहले से ज्यादा खतरनाक बन गया।

सचिन पायलट के सामने दूसरा सरेंडर

11 लाख का इनाम घोषित होने के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस उसके पीछे लग गई। चारों तरफ से खुद को घिरा पाकर उसने 30 जनवरी, 2009 को कांग्रेस नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट के सामने सरेंडर कर दिया।

बेटी के कन्यादान के लिए पैरोल

2010 में जगन अपनी गोद ली हुई बेटी (बड़े भाई की बेटी) की शादी में कन्यादान करने के लिए पैरोल पर बाहर आया। इस दौरान उसने अपराध से तौबा करने का ऐलान किया, लेकिन यह वादा भी झूठा निकला।

पत्नी को चुनाव लड़ाया, हार के बाद फिर अपराध

मार्च 2017 में वह करीब 8 साल जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आया। उस समय तक वह 70 में से 69 मामलों में बरी हो चुका था। बाहर आते ही उसने अपनी पत्नी ममता को धौलपुर विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतारा, लेकिन वह बुरी तरह हार गई। इस हार के बाद जगन फिर से अपराध की दुनिया में लौट आया।

बार-बार जमानत और खौफनाक वारदातें

जगन का इतिहास बार-बार जमानत पर छूटने और फिर से बड़ी वारदातों को अंजाम देने का रहा है। उसकी आखिरी रिहाई के बाद की घटनाएं सबसे ज्यादा भयावह थीं।

तीसरा सरेंडर और मुख्यधारा में आने का वादा

पत्नी की हार के बाद जगन ने चौथ वसूली और फायरिंग की कई घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण उसने अगस्त 2018 में भरतपुर में आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने तीसरी बार सरेंडर किया और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की बात कही।

महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की हैवानियत

लेकिन कुछ समय पहले जब वह फिर जमानत पर बाहर आया, तो उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उसने 13 जून को धौलपुर के सायपुर करनसिंह का पुरा गांव में मुखबिरी के शक में एक परिवार को बंधक बनाया। उसने महिलाओं और बच्चों से मारपीट की और फिर हथियार के दम पर महिलाओं को बिना कपड़ों के पूरे गांव में घुमाया। इस घटना ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया था।

एक खूंखार डकैत का अंत

महिलाओं के साथ की गई इस हैवानियत के बाद पुलिस उसकी तलाश में चंबल के बीहड़ों की खाक छान रही थी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। आखिरकार उसने खुद ही सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उसे अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल भेजा गया। यहीं पर, अपराध की दुनिया का यह खतरनाक चेहरा हमेशा के लिए खामोश हो गया। जिस जगन ने कई लोगों की जान ली, उसका अंत भी एक हत्या से ही हुआ।

*Edit with Google AI Studio

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