मुंबई | भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित किरदारों में से एक, माता सीता की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया आज अपना 61वां जन्मदिन मना रही हैं। रामानंद सागर की 'रामायण' ने उन्हें जो लोकप्रियता दिलाई, वह आज भी बरकरार है और लोग उन्हें देखते ही श्रद्धा से सिर झुका लेते हैं।
रामायण की सीता: दीपिका चिखलिया: रामायण की सीता दीपिका चिखलिया का जन्मदिन, 40 को पछाड़ मिला रोल
दीपिका चिखलिया के 61वें जन्मदिन पर जानें उनके जीवन और रामायण से जुड़े अनसुने किस्से।
HIGHLIGHTS
- दीपिका चिखलिया ने 40 लड़कियों को पछाड़कर सीता का प्रतिष्ठित किरदार हासिल किया था।
- शुरुआत में दीपिका का परिवार उनके टीवी पर काम करने के फैसले से काफी नाखुश था।
- सेट पर दीपिका चिखलिया राम-लक्ष्मण के बजाय 'रावण' अरविंद त्रिवेदी से अधिक बात करती थीं।
- मॉरिशस के एक कार्यक्रम में शुद्धता के नाम पर दीपिका और अरुण गोविल को घंटों भूखा रखा गया।
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एक साधारण लड़की से 'माता सीता' बनने का सफर
दीपिका चिखलिया का जन्म 29 अप्रैल 1965 को मुंबई में हुआ था और उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। उस दौर में टेलीविजन को मनोरंजन का दूसरा स्तर माना जाता था और इसे 'इडियट बॉक्स' कहकर पुकारा जाता था।
दीपिका का परिवार शुरू में उनके अभिनय के क्षेत्र में जाने के फैसले के खिलाफ था, क्योंकि वे इसे एक सुरक्षित करियर नहीं मानते थे। दीपिका के पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें, लेकिन दीपिका के मन में पर्दे पर दिखने की एक अलग ही ललक थी।
संघर्ष और शुरुआती सफलता की कहानी
दीपिका ने अपने करियर की शुरुआत 1980 में टीवी सीरीज 'रिश्ते-नाते' से की थी, जिसने उन्हें छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने रामानंद सागर के साथ 'दादा-दादी की कहानी' और 'विक्रम बेताल' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में काम किया।
हालांकि, उनकी असली किस्मत 'रामायण' के साथ चमकने वाली थी, जिसके लिए रामानंद सागर एक ऐसी चेहरे की तलाश में थे जो सादगी और दिव्यता का प्रतीक हो। दीपिका ने जब सीता के रोल के लिए ऑडिशन दिया, तो उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं क्योंकि प्रतियोगिता बहुत कठिन थी।
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40 लड़कियों के बीच हुआ था कड़ा मुकाबला
सीता के किरदार के लिए रामानंद सागर ने करीब 40 लड़कियों का स्क्रीन टेस्ट लिया था, जिनमें से हर कोई अपनी प्रतिभा साबित करने में जुटी थी। पहले दौर के बाद लड़कियों की संख्या आधी हो गई और दीपिका ने अपनी सादगी और संवाद अदायगी से सबका ध्यान खींचा।
हफ्तों तक चले कई स्क्रीन टेस्ट और ऑडिशन के बाद, आखिरकार सागर साहब ने दीपिका चिखलिया के नाम पर मुहर लगा दी। उन्हें लगा कि दीपिका की आंखों में वही करुणा और सौम्यता है, जो माता सीता के चरित्र की अनिवार्य मांग थी।
सेट पर राम और लक्ष्मण से क्यों थी दूरी?
अक्सर पर्दे पर दिखने वाली केमिस्ट्री असल जिंदगी में वैसी नहीं होती और 'रामायण' के सेट पर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता था। दीपिका ने खुद खुलासा किया था कि वह सेट पर अरुण गोविल (राम) और सुनील लहरी (लक्ष्मण) से बहुत कम बातचीत करती थीं।
दरअसल, अरुण गोविल और सुनील लहरी आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे और वे अक्सर मस्ती-मजाक में व्यस्त रहते थे, जबकि दीपिका खुद को रिजर्व रखती थीं। उन्हें लगता था कि अपने किरदार की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्हें थोड़ा शांत और गंभीर रहना चाहिए।
रावण के साथ थी खास बातचीत
हैरानी की बात यह है कि माता सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका, सेट पर सबसे ज्यादा बातचीत 'रावण' यानी अरविंद त्रिवेदी से करती थीं। अरविंद त्रिवेदी एक बहुत ही विद्वान और धार्मिक व्यक्ति थे, जिनसे दीपिका अक्सर अभिनय और जीवन के बारे में चर्चा करती थीं।
हालांकि यह दोस्ती भी बहुत गहरी नहीं थी, लेकिन राम और लक्ष्मण की तुलना में रावण के साथ उनका संवाद अधिक सहज और सम्मानजनक रहता था। सेट पर काम के दौरान दीपिका ज्यादातर समय रामानंद सागर की पत्नी या उनके परिवार की महिलाओं के साथ बिताना पसंद करती थीं।
राजीव गांधी और वीसीआर कैसेट का किस्सा
'रामायण' की लोकप्रियता का आलम यह था कि उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी इस सीरियल के बहुत बड़े प्रशंसक बन गए थे। बताया जाता है कि राजीव गांधी ने खुद दीपिका चिखलिया से सीरियल की वीसीआर कैसेट मांगी थी ताकि वे इसे फुर्सत में देख सकें।
यह वह दौर था जब रविवार की सुबह सड़कें सूनी हो जाती थीं और लोग टीवी के सामने हाथ जोड़कर बैठ जाते थे। दीपिका चिखलिया रातों-रात भारत की सबसे चहेती अभिनेत्री बन गई थीं और लोग उन्हें सचमुच देवी का अवतार मानने लगे थे।
जब लोग छूते थे पैर और उतारते थे आरती
सीरियल के हिट होने के बाद दीपिका की निजी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी और वह जहां भी जातीं, लोग उनके पैर छूने लगते थे। कई बार तो बुजुर्ग महिलाएं उनकी आरती उतारती थीं और उन्हें फूलों की माला पहनाकर उनका आशीर्वाद मांगती थीं।
दीपिका बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें यह सब बहुत अजीब लगता था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने समझ लिया कि लोग उनके किरदार से कितना जुड़े हुए हैं। उन्होंने हमेशा इस सम्मान का ख्याल रखा और कभी भी सार्वजनिक जीवन में ऐसी कोई हरकत नहीं की जिससे उनकी छवि खराब हो।
मॉरिशस का वो कड़वा और यादगार अनुभव
एक बार दीपिका चिखलिया और अरुण गोविल को मॉरिशस में एक बड़े इवेंट के लिए आमंत्रित किया गया था, जहां हजारों की भीड़ उमड़ी थी। वहां के लोगों में इन दोनों के प्रति इतनी श्रद्धा थी कि उन्होंने बफे के दौरान इन्हें खाना छूने से ही मना कर दिया।
आयोजकों और प्रशंसकों का मानना था कि अगर ये कलाकार खाना छू लेंगे, तो वह 'झूठा' हो जाएगा और बाकी लोग उसे प्रसाद की तरह नहीं ले पाएंगे। इस वजह से दीपिका और अरुण को घंटों तक भूखा रहना पड़ा, जब तक कि उनके लिए अलग से शुद्ध भोजन का इंतजाम नहीं किया गया।
सीता के किरदार का जीवन पर प्रभाव
सीता का किरदार निभाना मेरे लिए केवल एक काम नहीं था, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा थी जिसने मुझे अंदर से बदल दिया।
दीपिका मानती हैं कि इस रोल ने उन्हें जो धैर्य और शांति दी, वह उनके व्यक्तिगत जीवन में भी बहुत काम आई।
आज भी जब 'रामायण' का पुनः प्रसारण होता है, तो नई पीढ़ी भी उनके अभिनय की कायल हो जाती है। दीपिका चिखलिया का नाम अब भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो चुका है।
राजनीति और व्यक्तिगत जीवन
अभिनय के अलावा दीपिका ने राजनीति में भी हाथ आजमाया और वह बड़ौदा निर्वाचन क्षेत्र से संसद सदस्य (सांसद) के रूप में चुनी गई थीं। उन्होंने समाज सेवा के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और हमेशा महिलाओं के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाई।
व्यक्तिगत जीवन में दीपिका ने बिजनेसमैन हेमंत टोपीवाला से शादी की और उनकी दो बेटियां हैं, जिनके साथ वह एक खुशहाल जीवन बिता रही हैं। वह आज भी सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़ी रहती हैं और अक्सर रामायण की यादें साझा करती हैं।
आधुनिक युग में भी कायम है जलवा
आज के दौर में जहां कई पौराणिक धारावाहिक बन रहे हैं, लेकिन जो सादगी रामानंद सागर की रामायण में थी, वह दोबारा नहीं देखी गई। दीपिका चिखलिया का अभिनय और उनकी सौम्य मुस्कान आज भी दर्शकों की आंखों में बसी हुई है।
उनके 61वें जन्मदिन पर पूरा देश उन्हें बधाई दे रहा है और उनके लंबे व स्वस्थ जीवन की कामना कर रहा है। वह न केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत भी बनी हुई हैं।
निष्कर्ष: एक कालजयी अभिनेत्री
दीपिका चिखलिया का सफर हमें सिखाता है कि मेहनत और समर्पण से किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। 40 लड़कियों के बीच से निकलकर करोड़ों दिलों पर राज करना कोई छोटी बात नहीं है, और उन्होंने इसे बखूबी निभाया है।
रामायण की सीता के रूप में उनकी विरासत आने वाली कई पीढ़ियों तक जीवंत रहेगी। उनके जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर हम उन्हें सलाम करते हैं और उनके भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं।
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