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राज्य

Bangal: बंगाल में बड़ा फैसला VIP सुरक्षा में भारी कटौती

बलजीत सिंह शेखावत

बंगाल सरकार ने टीएमसी सांसदों और पूर्व अधिकारियों की सुरक्षा घटाई।

HIGHLIGHTS

  • पश्चिम बंगाल सरकार ने कई वीआईपी और टीएमसी नेताओं की सुरक्षा में भारी कटौती की है।
  • कल्याण बनर्जी, सुब्रत बख्शी और कुणाल घोष जैसे बड़े नामों की सुरक्षा व्यवस्था बदली गई।
  • प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा अब केवल वर्तमान आधिकारिक पद और खतरे के आधार पर मिलेगी।
  • भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही वीआईपी सुरक्षा समीक्षा अभियान शुरू किया था।
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कोलकाता | पश्चिम बंगाल में शुभेन्दु सरकार ने वीआईपी सुरक्षा में बड़ी कटौती की है। खतरे के नए आकलन के बाद कई नेताओं और पूर्व अधिकारियों के आवासों से पुलिस गार्ड हटा दिए गए हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, समीक्षा के बाद कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों के घरों के बाहर तैनात पुलिस गार्डों को हटा दिया गया है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों की संख्या भी काफी कम की गई है।

सुरक्षा कटौती की सूची में शामिल बड़े नाम

हाल ही में जारी निर्देशों के अनुसार, सुरक्षा कम किए जाने वालों में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास जैसे कद्दावर नेताओं के नाम प्रमुखता से शामिल हैं।

इसके अलावा, टीएमसी प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी और विधायक कुणाल घोष की सुरक्षा में भी बदलाव हुए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा वर्तमान पद के आधार पर ही मिलेगी।

पूर्व कोलकाता मेयर सोवन चटर्जी और राज्यसभा सांसद राजीव कुमार भी इस सूची का हिस्सा हैं। सेवानिवृत्त डीजीपी मनोज मालवीय और पूर्व कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे के सुरक्षा घेरे में कटौती हुई है।

संवैधानिक पदों के अनुरूप सुरक्षा

प्रशासन की समीक्षा में पाया गया कि इनमें से कई लोगों को अब अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता नहीं थी। अब उन्हें केवल उनके संवैधानिक पदों के अनुसार ही सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

हालांकि, कल्याण बनर्जी और राजीव कुमार जैसे सांसदों को निर्धारित सुरक्षा मिलती रहेगी। अरूप बिस्वास की सुरक्षा हटा दी गई है क्योंकि उनके पास वर्तमान में कोई मंत्री पद नहीं है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा का उद्देश्य किसी को डराना नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अनावश्यक तैनाती से जनता के कार्यों में बाधा आती है, जिसे अब सुधारा जा रहा है।

भाजपा सरकार का सुरक्षा सुधार अभियान

सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार ने सबसे पहले वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा शुरू की थी। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी संसाधनों का उचित और न्यायसंगत आवंटन सुनिश्चित करना है।

इस कड़ी में सबसे पहले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में कटौती की गई थी। उनका जेड प्लस सुरक्षा कवर हटाकर विशेष पायलट कार की सुविधा भी वापस ले ली गई थी।

कालीघाट स्थित आवास और कार्यालय के बाहर तैनात अतिरिक्त पुलिस बल को भी हटाया गया था। यह सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें सुरक्षा केवल जरूरत के आधार पर दी जाती है।

किसी भी व्यक्ति को उसकी वास्तविक जरूरत से ज्यादा सुरक्षा नहीं दी जाएगी। सुरक्षा बलों का उपयोग केवल सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाना चाहिए।

सरकार के इस कदम से पुलिस बल पर दबाव कम होगा। कर्मियों को अब वीआईपी सुरक्षा के बजाय जमीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने में लगाया जाएगा।

निष्कर्षतः, शुभेन्दु सरकार की यह पहल प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम है। इससे सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और सरकारी खजाने पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ भी कम होगा।

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