नई दिल्ली | दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आबकारी नीति से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
आबकारी नीति: केजरीवाल को HC का नोटिस: दिल्ली आबकारी नीति केस: अरविंद केजरीवाल को हाई कोर्ट का नोटिस, ED की याचिका पर 29 अप्रैल को होगी बड़ी सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में समन की अनदेखी को लेकर अरविंद केजरीवाल से जवाब मांगा है। ED ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है, जिस पर अब 29 अप्रैल को सुनवाई होगी।
HIGHLIGHTS
- दिल्ली हाई कोर्ट ने समन की अवहेलना मामले में अरविंद केजरीवाल से जवाब मांगा है।
- ED ने निचली अदालत द्वारा केजरीवाल को दी गई राहत के खिलाफ याचिका दायर की थी।
- जस्टिस स्वरना कांत शर्मा ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 के लिए तय की है।
- ED का आरोप है कि केजरीवाल ने जानबूझकर जांच में शामिल होने से परहेज किया और बहाने बनाए।
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यह पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी किए गए समन की अनदेखी से जुड़ा है। ED ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल को इस मामले में बड़ी राहत दी गई थी।
जस्टिस स्वरना कांत शर्मा की पीठ ने बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि नोटिस के बावजूद केजरीवाल की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें एक और अवसर देने का निर्णय लिया गया।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रतिवादी को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए अब मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
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ED का आरोप है कि जब वह आबकारी नीति मामले की जांच कर रही थी, तब केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया। एजेंसी ने इसे जांच को बाधित करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया है।
एजेंसी के अनुसार, केजरीवाल ने पूछताछ से बचने के लिए कई बार तकनीकी आपत्तियां उठाईं। ED ने इन आपत्तियों को 'निराधार' और 'वक्त बर्बाद करने वाली' रणनीति करार दिया है।
निचली अदालत का पिछला रुख
इससे पहले, निचली अदालत ने केजरीवाल को इस मामले में राहत देते हुए कहा था कि ED यह साबित नहीं कर पाई कि समन की अनदेखी जानबूझकर और किसी गलत मंशा से की गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने माना था कि साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि केजरीवाल के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जाए। हालांकि, ED ने अब इसी तर्क को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और सख्त रुख अपनाने की मांग की है।
आबकारी नीति और कथित भ्रष्टाचार
आबकारी नीति मामला दिल्ली की राजनीति में पिछले काफी समय से छाया हुआ है। ED का दावा है कि नीति निर्माण के दौरान कई आरोपी केजरीवाल के सीधे संपर्क में थे और उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आम आदमी पार्टी को कथित तौर पर भारी रिश्वत मिली थी। इस मामले में कई अन्य नेता भी जांच के घेरे में हैं और कुछ जेल में भी रह चुके हैं।
राजनीतिक गहमागहमी और आरोप
इस कानूनी लड़ाई के बीच दिल्ली की राजनीति में भी उबाल है। आम आदमी पार्टी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती रही है, जबकि विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला करार दे रहे हैं।
ED का आरोप है कि नीति के जरिए कुछ खास शराब कारोबारियों को एकाधिकार देने की कोशिश की गई। इसके बदले में जो पैसा मिला, उसका इस्तेमाल कथित तौर पर चुनाव प्रचार में किया गया था।
समन और कानूनी प्रक्रिया
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट का यह नोटिस केजरीवाल के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है। अगर अदालत समन की अनदेखी को जानबूझकर किया गया मानती है, तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फिलहाल, अरविंद केजरीवाल की कानूनी टीम इस नोटिस का अध्ययन कर रही है। 29 अप्रैल की तारीख अब इस पूरे घटनाक्रम में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है, जिस पर पूरे देश की नजर है।
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