फ्लोरिडा | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्लोरिडा के पाम बीच पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में दुनिया को संबोधित करते हुए ईरान के खिलाफ अपनी भावी रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं देख सकता।
ट्रम्प की ईरान को अंतिम चेतावनी: ट्रम्प बोले- पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं दे सकते
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के साथ जंग खत्म होने का दावा किया और परमाणु मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है।
HIGHLIGHTS
- डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ चल रही सैन्य कार्रवाई के आधिकारिक रूप से समाप्त होने की घोषणा की।
- अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी से उसे 456 अरब रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है।
- ट्रम्प ने साफ किया कि ईरान को बातचीत से पहले अपना एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही 90 प्रतिशत तक गिर गई है, जिससे ईरान अलग-थलग पड़ा।
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ट्रम्प ने दावा किया कि उनकी सरकार ने मिडिल ईस्ट को एक बड़े परमाणु खतरे से बचा लिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने समय रहते ईरान के खिलाफ जंग नहीं छेड़ी होती, तो आज उनके पास परमाणु हथियार होते।
राष्ट्रपति के अनुसार, परमाणु शक्ति संपन्न ईरान न केवल इजराइल के अस्तित्व के लिए खतरा बनता, बल्कि इससे पूरे यूरोप में तबाही मच सकती थी। ट्रम्प ने इसी खतरे को टालने के लिए सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराया।
परमाणु मुद्दे पर ईरान का प्रस्ताव खारिज
ट्रम्प ने कार्यक्रम के दौरान खुलासा किया कि उन्होंने ईरान की ओर से आए शांति प्रस्ताव को फिर से ठुकरा दिया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुँचा था, जिसे व्हाइट हाउस ने अपर्याप्त माना।
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व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने अपने नए प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं किया था। ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान सबसे पहले अपना एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका के हवाले करे, तभी बातचीत संभव है।
ईरान का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना चाहता है और परमाणु मुद्दे पर बाद में चर्चा करेगा। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन दोनों ही मुद्दों पर एक साथ समाधान और ठोस गारंटी की मांग पर अड़ा हुआ है।
“हम इस जंग को जल्दबाजी में खत्म नहीं करेंगे ताकि तीन साल बाद फिर यही समस्या खड़ी हो जाए। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक ईरान परमाणु हथियार की दौड़ से पूरी तरह बाहर नहीं हो जाता।”
ईरान की अर्थव्यवस्था को लगा बड़ा झटका
पेंटागन की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी ने ईरान की कमर तोड़ दी है। इस नाकेबंदी के कारण ईरान को अब तक करीब 456 अरब रुपये (4.8 अरब डॉलर) के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि अमेरिकी नौसेना पूरी ताकत से समुद्री रास्तों की निगरानी कर रही है। इससे ईरान की फंडिंग क्षमता को बड़ा झटका लगा है और उसकी सैन्य ताकत काफी हद तक कम हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का ट्रैफिक 90% तक घट गया है। पहले जहां प्रतिदिन 130 जहाज गुजरते थे, अब वहां केवल 10 से भी कम जहाज देखे जा रहे हैं। अमेरिका ने उन कंपनियों पर भी पाबंदी की चेतावनी दी है जो ईरान को पैसा देती हैं।
अमेरिकी संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए संसद से मंजूरी लेने की जरूरत को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसकी मांग कर रहे हैं, वे देश के प्रति वफादार नहीं हैं।
व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित किया है कि ईरान युद्ध अब समाप्त हो चुका है। ट्रम्प का तर्क है कि अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद 60 दिनों की कानूनी समय सीमा उन पर लागू नहीं होती।
हालांकि, डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसद इस कदम का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी सेना अभी भी क्षेत्र में सक्रिय है, इसलिए इसे युद्ध की समाप्ति नहीं माना जा सकता और संसदीय अनुमति अनिवार्य है।
ईरान के भीतर बढ़ता आंतरिक संकट
युद्ध के दबाव के बीच ईरान के जांजान प्रांत में एक बड़ा विस्फोट हुआ है। इस हादसे में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 सैनिकों की मौत हो गई, जो पुराने हथियारों को निष्क्रिय करने की कोशिश कर रहे थे।
ईरानी नेतृत्व के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कुर्सी खतरे में है क्योंकि उन पर राष्ट्रपति को दरकिनार कर IRGC के इशारों पर काम करने का आरोप है।
अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी नेताओं की तुलना ‘गटर के चूहों’ से की है। उन्होंने कहा कि तेहरान के नेता जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं और अपनी जनता को भुखमरी की ओर धकेल रहे हैं।
सहयोगियों को हथियारों की भारी सप्लाई
अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने सहयोगियों को मजबूत करने के लिए 800 अरब रुपये के हथियार सौदों को मंजूरी दी है। इस पैकेज में इजराइल, कतर, कुवैत और यूएई के लिए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि अमेरिका समुद्री लुटेरों की तरह ईरान के अवैध तेल पर कब्जा कर रहा है क्योंकि यह फायदे का सौदा है। उन्होंने स्पेन और इटली जैसे देशों को भी चेतावनी दी जो इस मिशन में साथ नहीं दे रहे।
अंत में, ट्रम्प ने दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु बम बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह आक्रामक नीति वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य के बड़े युद्धों को रोकने के लिए आवश्यक है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। ईरान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव और आंतरिक कलह के बीच कूटनीतिक रास्ता तलाशने को मजबूर है, जबकि अमेरिका अपनी शर्तों पर समझौता चाहता है।
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