बीकानेर | भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मीडिया और संचार प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने डिजिटल युग की चुनौतियों, विशेषकर फेक न्यूज से निपटने और पारदर्शी चुनावी संवाद सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है।
चुनावी संचार तंत्र होगा मजबूत: फेक न्यूज पर प्रहार: ECI ने दिए प्रभावी चुनावी संवाद के गुर
निर्वाचन आयोग ने नई दिल्ली में 10 राज्यों के मीडिया अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें फेक न्यूज और डिजिटल चुनौतियों से निपटने के गुर सिखाए गए।
HIGHLIGHTS
- भारत निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मीडिया अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।
- सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य फेक न्यूज, एआई और डीपफेक जैसी डिजिटल चुनौतियों से निपटना था।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भ्रामक सूचनाओं के प्रभावी खंडन का आह्वान किया।
- प्रतिभागियों को चुनाव चक्र के विभिन्न चरणों के लिए संचार रणनीतियों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
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इसी क्रम में, बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान में मीडिया एवं संचार अधिकारियों का तीसरा एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
10 राज्यों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन से लौटकर बीकानेर के जन संपर्क विभाग के उप निदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 200 अधिकारियों ने भाग लिया।
इन प्रतिभागियों में मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसम्पर्क अधिकारी और राज्य जनसम्पर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। उदयपुर से उपनिदेशक जनसंपर्क गौरीकान्त शर्मा ने भी सम्मेलन में अपनी सहभागिता निभाई।
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मुख्य चुनाव आयुक्त का स्पष्ट संदेश
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "निर्वाचन आयोग की प्रत्येक कार्रवाई संविधान, चुनावी कानूनों और आयोग के लिखित निर्देशों के अनुरूप पूर्ण पारदर्शिता के साथ की जाती है।"
उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी और भ्रामक सूचनाओं के प्रति अधिकारियों को आगाह किया। श्री कुमार ने इन सूचनाओं का प्रभावी ढंग से खंडन करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान का उल्लेख करते हुए, उन्होंने इसे भारतीय मतदाताओं के लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर गहरे विश्वास का प्रमाण बताया।
डिजिटल चुनौतियों पर विशेष फोकस
इस अवसर पर चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग की गंभीर चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक और अन्य भ्रामक सामग्री लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभर रही हैं।
डॉ. जोशी ने अधिकारियों से आयोग के नियमों, दिशा-निर्देशों और स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का आग्रह किया।
उन्होंने विशेष रूप से एआई और डीपफेक से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की और भ्रामक एवं दुर्भावनापूर्ण सामग्री से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति साझा की। उन्होंने आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार त्वरित और तथ्यात्मक संवाद पर जोर दिया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और कार्यशाला
सम्मेलन के दौरान, चुनाव चक्र के विभिन्न चरणों के लिए संचार रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और मतगणना तक की प्रक्रिया शामिल थी।
प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इनमें ईसीआईएनईटी, संवैधानिक प्रावधान, मीडिया संबंधी कानून, प्रेस नोट तैयार करना, और मीडिया एवं सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग शामिल था।
इसके अतिरिक्त, मिथकों और फेक न्यूज का खंडन करने तथा निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) के माध्यम से युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के तरीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को समूहों में बांटकर मतदाता सूची निर्माण, मतदान और मतगणना प्रक्रिया का प्रदर्शन भी कराया गया। अंत में, एक प्रदर्शनी और मीडिया कॉर्नर का भ्रमण आयोजित किया गया, जिसके बाद आयोग के अधिकारियों के साथ एक प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमें प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।