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ईडब्ल्यूएस आरक्षण: राजस्थान मॉडल की मांग: ईडब्ल्यूएस आरक्षण: धर्मेंद्र राठौड़ ने की राजस्थान मॉडल की मांग

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धर्मेंद्र राठौड़ ने केंद्र से ईडब्ल्यूएस आरक्षण की शर्तों को सरल बनाने की मांग की है।

HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण की जटिल शर्तों को हटाने की मांग की।
  • राजस्थान के सफल ईडब्ल्यूएस मॉडल को देशभर में लागू करने का सुझाव दिया गया है।
  • जोधपुर में राज्य स्तर पर 7700 और केंद्र स्तर पर केवल 1646 प्रमाणपत्र जारी हुए।
  • 671 जातियों के आरक्षण अधिकारों को लेकर केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए गए।
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जोधपुर | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने केंद्र सरकार से ईडब्ल्यूएस आरक्षण की जटिल शर्तों को खत्म करने और राजस्थान के सफल मॉडल को पूरे देश में लागू करने की पुरजोर मांग की है।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण की जटिलताएं और प्रभाव

जोधपुर में आयोजित एक विशेष संगोष्ठी के दौरान धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबों को उनके अधिकार मिलने में प्रक्रियात्मक बाधाएं आ रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 2019 में लागू किए गए 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण का वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

राजस्थान मॉडल की सफलता का आधार

राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण की प्रक्रिया को बहुत ही सरल और सुगम बनाया था।

वर्ष 2020 में नियमों में दी गई शिथिलता के कारण हजारों युवाओं को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हुआ।

केंद्र बनाम राज्य: आंकड़ों का बड़ा अंतर

जोधपुर के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर 7700 ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बने, जबकि केंद्र के लिए केवल 1646 बन पाए।

यह अंतर दर्शाता है कि केंद्र सरकार की शर्तें कितनी कठिन हैं, जो सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रही हैं।

जातियों का वर्गीकरण और विसंगतियां

धर्मेंद्र राठौड़ ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि राजस्थान में 671 जातियां ओबीसी वर्ग में शामिल हैं, जिन्हें केंद्र में सामान्य माना गया है।

इन जातियों को केंद्र स्तर पर ईडब्ल्यूएस आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन जटिल नियमों के कारण वे इस लाभ से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और आरक्षण की मांग

उन्होंने याद दिलाया कि अशोक गहलोत ने अपने पहले कार्यकाल में ही 14 प्रतिशत आरक्षण देने की एक ऐतिहासिक पहल की थी।

राठौड़ का आरोप है कि वर्तमान केंद्र सरकार ने इस कोटे को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया और शर्तों को जानबूझकर पेचीदा बना दिया।

समानता और सामाजिक न्याय की अपील

धर्मेंद्र राठौड़ ने जोर देकर कहा कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाना है।

जब तक आवेदन की प्रक्रिया और पात्रता के मापदंड सरल नहीं होंगे, तब तक यह संवैधानिक प्रावधान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

युवाओं के भविष्य पर पड़ता असर

देश के लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र न होने के कारण वे अवसरों से चूक जाते हैं।

राठौड़ ने कहा कि केंद्र को आठ अन्य राज्यों की तरह अपनी शर्तों में तुरंत संशोधन करना चाहिए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।

विचार गोष्ठी में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति

जोधपुर में आयोजित इस संगोष्ठी में कांग्रेस नेता महेंद्र बिश्नोई और ओमकार वर्मा सहित विभिन्न समाजों के गणमान्य लोग और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के सरलीकरण की मांग का समर्थन किया और इसे समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार

धर्मेंद्र राठौड़ ने प्रेस से रूबरू होते हुए कहा कि केंद्र सरकार को गरीबों के हितों के प्रति अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक होने की आवश्यकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जटिल शर्तों के पीछे की मंशा गरीबों को लाभ से दूर रखना है, जिसे कांग्रेस पार्टी कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

प्रक्रियात्मक सुधारों की तकनीकी आवश्यकता

आरक्षण के लिए संपत्ति और आय के जो मापदंड केंद्र ने तय किए हैं, वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाते।

इन तकनीकी खामियों को दूर करना अनिवार्य है ताकि एक सामान्य परिवार का व्यक्ति भी बिना किसी परेशानी के अपना हक प्राप्त कर सके।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण की जटिल शर्तों को तत्काल समाप्त कर राजस्थान मॉडल को देशभर में लागू किया जाना चाहिए ताकि गरीबों को उनका हक मिले।



आगामी रणनीति और आंदोलन की चेतावनी

धर्मेंद्र राठौड़ ने संकेत दिया कि यदि केंद्र सरकार ने इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी जनता के बीच जाकर आंदोलन करेगी।

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक वर्ग की नहीं बल्कि सामाजिक समानता और न्याय की सामूहिक लड़ाई है जिसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

राजस्थान की प्रगतिशील सोच का उदाहरण

राजस्थान ने हमेशा से ही सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में देश को नई दिशा दिखाई है, चाहे वह स्वास्थ्य योजना हो या आरक्षण।

ईडब्ल्यूएस के मामले में भी राजस्थान की नीति सबसे अधिक समावेशी मानी जा रही है, जिसे विशेषज्ञों ने भी सराहा है।

डिजिटल सुधार और सरलीकरण की मांग

राठौड़ ने सुझाव दिया कि प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।

सरल आवेदन प्रक्रिया और न्यूनतम दस्तावेजों की आवश्यकता ही इस आरक्षण व्यवस्था को वास्तव में सफल और प्रभावी बना सकती है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

धर्मेंद्र राठौड़ का यह बयान केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है कि वह अपनी नीतियों में बदलाव करे। राजस्थान मॉडल का अनुसरण न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है, जिससे लाखों जरूरतमंदों को न्याय मिलेगा।

*Edit with Google AI Studio

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