नई दिल्ली | गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में रसीले आमों की बहार आ जाती है। आम को फलों का राजा कहा जाता है और हर कोई इसका बेसब्री से इंतजार करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा खरीदे गए ये पीले और सुंदर दिखने वाले आम आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं? बाजार में बिकने वाले कई फल प्राकृतिक रूप से नहीं पकाए जाते। मुनाफा कमाने के चक्कर में फल विक्रेता अक्सर खतरनाक रसायनों का सहारा लेते हैं। इसी गंभीर मुद्दे को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अब सख्त रुख अपनाया है।
केमिकल से पके फल? सावधान!: FSSAI की चेतावनी: केमिकल से फल पकाने वालों की अब खैर नहीं, आम और अन्य फलों पर सरकार की पैनी नजर
FSSAI ने फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड और अन्य रसायनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
HIGHLIGHTS
- FSSAI ने 16 अप्रैल को नोटिस जारी कर फलों को पकाने वाले खतरनाक रसायनों पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
- कैल्शियम कार्बाइड और एथिलीन गैस के गलत इस्तेमाल पर अब खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 59 के तहत जेल हो सकती है।
- सभी राज्यों की बड़ी मंडियों और स्टोरेज हाउसों में औचक छापेमारी और सैंपलिंग के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
- केमिकल से पके फल कैंसर और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का कारण बन सकते हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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FSSAI का बड़ा फैसला और निर्देश
FSSAI ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के तहत फलों को पकाने के लिए रसायनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। विशेष रूप से कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग को लेकर चेतावनी दी गई है। 16 अप्रैल को जारी किए गए नोटिस में सरकार ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। फलों को पकाने के लिए खतरनाक रसायनों का उपयोग करना अब जेल की हवा खिला सकता है। विभाग ने सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को इस पर कड़ी नजर रखने को कहा है।
कैल्शियम कार्बाइड क्यों है खतरनाक?
कैल्शियम कार्बाइड को आम बोलचाल की भाषा में 'मसाला' कहा जाता है। इसका उपयोग अक्सर फलों को कम समय में चमकीला पीला बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन यह रसायन इंसानी शरीर के लिए जहर के समान है। इसमें आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे खतरनाक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। जब कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आता है, तो यह एसिटिलीन गैस पैदा करता है। यह गैस फलों को जल्दी पका तो देती है लेकिन उनकी पौष्टिकता खत्म कर देती है।
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सेहत पर होने वाले जानलेवा प्रभाव
केमिकल से पके फलों का सेवन करने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। शुरुआती लक्षणों में चक्कर आना, प्यास लगना और सीने में जलन महसूस होना शामिल है। लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। यह बच्चों और बुजुर्गों के नर्वस सिस्टम को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। त्वचा पर खुजली और गले में खराश भी इसके सामान्य दुष्प्रभाव हैं। यही कारण है कि FSSAI ने इसे 'जानलेवा' रसायनों की श्रेणी में रखा है और सख्ती बढ़ा दी है।
मंडियों और गोदामों में होगी छापेमारी
FSSAI ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपनी निगरानी बढ़ाएं। विशेष रूप से बड़ी फल मंडियों और कोल्ड स्टोरेज की जांच करने के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे औचक निरीक्षण करें और संदिग्ध फलों के सैंपल लें। अगर कहीं भी कैल्शियम कार्बाइड का स्टॉक मिलता है, तो उसे तुरंत जब्त किया जाएगा। इसके साथ ही टेस्टिंग पेपर का उपयोग करके एसिटिलीन गैस की मौजूदगी की जांच की जाएगी। व्यापारियों को चेतावनी दी गई है कि वे केवल स्वीकृत तरीकों का ही पालन करें।
कानूनी कार्रवाई और धारा 59
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ FSS Act की धारा 59 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस धारा के तहत भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता की जान जोखिम में डालने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। व्यापारियों को एथिलिन गैस के सुरक्षित उपयोग की अनुमति है। लेकिन एथिलिन का उपयोग भी निर्धारित मानकों के भीतर ही होना चाहिए। इसके लिए व्यापारियों को उचित प्रशिक्षण और दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्यों किया जाता है रसायनों का इस्तेमाल?
अक्सर लोग सोचते हैं कि आखिर व्यापारी इन रसायनों का इस्तेमाल करते ही क्यों हैं। इसका मुख्य कारण फलों की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर है। प्राकृतिक रूप से पकने में फल काफी समय लेते हैं। इसके अलावा पके हुए फलों को दूर-दराज के इलाकों में भेजने पर उनके खराब होने का डर रहता है। इसीलिए फलों को कच्चा ही तोड़ लिया जाता है और गंतव्य तक पहुंचने पर उन्हें केमिकल से पका दिया जाता है। यह तरीका व्यापारियों के लिए मुनाफे का सौदा होता है।
प्राकृतिक और केमिकल से पके फलों में अंतर
उपभोक्ता आसानी से पहचान सकते हैं कि फल प्राकृतिक है या केमिकल से पका हुआ। केमिकल से पका आम बाहर से पूरी तरह पीला दिखेगा लेकिन अंदर से सफेद हो सकता है। प्राकृतिक रूप से पका आम कहीं से हरा और कहीं से पीला हो सकता है। इसके अलावा केमिकल से पके फल का स्वाद थोड़ा अजीब या कड़वा महसूस हो सकता है। प्राकृतिक रूप से पके आम में एक विशेष मीठी खुशबू होती है। जबकि केमिकल वाले फलों में किसी भी प्रकार की प्राकृतिक खुशबू का अभाव होता है या वे बेस्वाद होते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा टिप्स
फल खरीदने के बाद उन्हें कम से कम 15-20 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रखें। इससे फलों की सतह पर मौजूद रसायनों का असर काफी हद तक कम हो जाता है। फलों को अच्छी तरह रगड़कर धोएं और फिर उनका सेवन करें। यदि फल काटने पर अंदर से सख्त या बेस्वाद लगे, तो उसे खाने से बचें और फेंक दें। कोशिश करें कि केवल भरोसेमंद विक्रेताओं से ही फल खरीदें। यदि आपको किसी दुकान पर संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी सूचना जरूर दें।
एथिलिन गैस का सुरक्षित विकल्प
FSSAI ने एथिलिन गैस को फलों को पकाने के लिए एक सुरक्षित विकल्प माना है। हालांकि इसका उपयोग भी बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। एथिलिन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो फलों के पकने की प्रक्रिया को तेज करता है। लेकिन इसका उपयोग बंद कमरों या चैंबरों में ही किया जाना चाहिए। व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे कैल्शियम कार्बाइड की जगह एथिलिन रिपनिंग चैंबर का उपयोग करें। यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है और फलों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
सरकार की भविष्य की योजना
सरकार अब तकनीक का सहारा लेकर इस मिलावटखोरी को रोकने की योजना बना रही है। मंडियों में डिजिटल सेंसर और टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे मौके पर ही फलों की गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी। साथ ही व्यापारियों के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि वे सुरक्षित तरीके अपनाएं। FSSAI का लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश की हर मंडी केमिकल मुक्त हो। इसके लिए जनता का सहयोग और व्यापारियों की ईमानदारी दोनों ही बहुत जरूरी हैं।
निष्कर्ष: सेहत सर्वोपरि है
अंत में यह समझना जरूरी है कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ करना एक गंभीर अपराध है। FSSAI के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है। अब यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम जागरूक बनें और सही फलों का चुनाव करें। सावधानी ही बचाव है, इसलिए फल खरीदते समय सतर्क रहें। सरकार और प्रशासन की इस मुहिम में साथ देकर हम एक स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकते हैं। याद रखें, आपकी एक छोटी सी सतर्कता आपके परिवार को बड़ी बीमारियों से बचा सकती है। गर्मियों का आनंद लें, लेकिन सेहत का ख्याल रखते हुए।
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