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राजस्थान

सहकारिता से ग्रामीण सशक्तीकरण: मंत्री गौतम कुमार दक का आह्वान: सहकारिता से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

सहकारिता मंत्री ने राइसेम में प्रशिक्षु अधिकारियों को पारदर्शिता और नवाचार का मंत्र दिया।

HIGHLIGHTS

  • सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने राइसेम में प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया।
  • मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सहकारिता पर जोर दिया।
  • अधिकारियों को पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करने की सलाह दी।
  • पैक्स के कंप्यूटरीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान देने को कहा।
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जयपुर | राजस्थान के सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने जयपुर स्थित राजस्थान सहकारी शिक्षा एवं प्रबंध संस्थान (राइसेम) में प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर दिया।

मंत्री दक ने मंगलवार को राइसेम में आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे राज्य सेवाओं के अधिकारियों से संवाद किया। इनमें सहकारिता, जेल, उद्योग एवं श्रम कल्याण विभाग के प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे। उन्होंने अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया।

सहकारिता: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़

मंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन ग्रामीण भारत की आर्थिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। इसके माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति का आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित किया जा सकता है। यह विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।

राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और नवाचारों से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी को प्राथमिकता दें।

प्रशिक्षण की अवधि को मंत्री ने अधिकारियों के व्यक्तित्व विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान सीखा गया ज्ञान और अनुभव पूरे सेवा जीवन में मार्गदर्शक का काम करेगा। अनुशासन और समयबद्धता सफलता की कुंजी हैं।

फील्ड विजिट और वास्तविक प्रशासन की समझ

गौतम कुमार दक ने अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए फील्ड वर्क की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि केवल दफ्तर में बैठकर फाइलों के माध्यम से योजनाओं की समीक्षा करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक प्रगति जमीन पर दिखनी चाहिए।

अधिकारी जब फील्ड में जाकर कार्य करते हैं, तभी वास्तविक स्थिति का सही आकलन होता है। कागजी प्रगति और वास्तविक प्रभाव में अंतर को समझना ही एक सक्षम प्रशासक की पहचान है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड विजिट करें। लाभार्थियों से सीधा संवाद स्थापित कर उनका फीडबैक प्राप्त करें। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

नवाचार और डिजिटल सेवाओं का विस्तार

सहकारिता मंत्री ने विशेष रूप से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार से किसानों को पारदर्शी तरीके से ऋण और अन्य सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। यह एक बड़ा बदलाव है।

उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना का भी उल्लेख किया। मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाएगा। सहकारिता क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना वर्तमान समय की मांग है।

मंत्री ने अधिकारियों को टीम भावना के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उद्योग, जेल और श्रम जैसे विविध क्षेत्रों में कार्य करते हुए जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पात्र व्यक्तियों तक समयबद्ध पहुंचाना चाहिए।

सहकारिता मंत्री का यह मार्गदर्शन नवनियुक्त अधिकारियों में नई ऊर्जा का संचार करेगा। उनके द्वारा दिए गए पारदर्शिता और संवेदनशीलता के मंत्र प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। इससे राजस्थान के सर्वांगीण विकास में निश्चित रूप से गति आएगी।

मंत्री ने अंत में सभी अधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये अधिकारी अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे। राइसेम के निदेशक संजय कुमार पाठक ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी।

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