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गुड फ्राइडे: क्यों बुझती हैं मोमबत्तियां?: गुड फ्राइडे 2024: ईसा मसीह के बलिदान का दिन, जानें क्यों चर्च में बुझाई जाती हैं मोमबत्तियां और नहीं बजती घंटी

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गुड फ्राइडे ईसाई धर्म में शोक और चिंतन का दिन है। इस दिन प्रभु ईसा मसीह के बलिदान को याद किया जाता है और चर्चों में विशेष सादगी बरती जाती है।

HIGHLIGHTS

  • गुड फ्राइडे ईसा मसीह के बलिदान और उनके प्रेम को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिन है।
  • इस दिन दोपहर 3 बजे चर्च की मोमबत्तियां बुझाकर अंधेरा करने की प्राचीन परंपरा है।
  • शोक के प्रतीक के रूप में इस दिन चर्चों में घंटियां नहीं बजाई जाती हैं।
  • इसे ब्लैक फ्राइडे या होली फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है, जो ईस्टर से पहले आता है।
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नई दिल्ली | ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए गुड फ्राइडे का दिन बहुत ही गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह दिन पूरी दुनिया में ईसा मसीह के बलिदान और उनके असीम प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

गुड फ्राइडे का नाम सुनते ही मन में शांति और करुणा का भाव जागृत होता है। हालांकि इस दिन का नाम 'गुड' है, लेकिन इसके पीछे की कहानी अत्यंत हृदयविदारक और दुखद है।

मान्यता है कि इसी दिन मानवता के उद्धार के लिए प्रभु ईसा मसीह को तमाम शारीरिक यातनाएं देने के बाद सूली पर चढ़ाया गया था। यही कारण है कि इसे शोक दिवस माना जाता है।

गुड फ्राइडे का ऐतिहासिक महत्व

ईसाई कैलेंडर के अनुसार, गुड फ्राइडे ईस्टर संडे से ठीक पहले आने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है। इसे ब्लैक फ्राइडे, होली फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास बताता है कि प्रभु ईसा मसीह ने लोगों को एकता, भाईचारा और अहिंसा का मार्ग दिखाया था। वे लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने और प्रेम का संदेश देते थे।

उनकी बढ़ती लोकप्रियता से उस समय के कुछ धर्मगुरु और सत्ताधारी घबरा गए थे। उन्होंने ईसा मसीह पर राजद्रोह और धर्म के अपमान का झूठा आरोप लगा दिया।

अंधेरे में डूबा संसार

रोम के तत्कालीन शासक पिलातुस ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई। ईसा मसीह को कांटों का ताज पहनाया गया और उन्हें भारी क्रूस उठाकर गोलगोथा नामक स्थान तक जाना पड़ा।

बाइबल के विवरण के अनुसार, दोपहर के समय जब उन्हें सूली पर चढ़ाया गया, तो अचानक चारों ओर अंधेरा छा गया। यह अंधेरा लगभग तीन घंटे तक बना रहा।

दोपहर 3 बजे प्रभु ईसा ने अपनी अंतिम सांस ली। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा, 'हे पिता, मैं अपनी आत्मा को तुझे सौंपता हूं।' उनके प्राण त्यागते ही धरती कांप उठी थी।

चर्च में क्यों बुझाई जाती हैं मोमबत्तियां?

गुड फ्राइडे के दिन दोपहर 3 बजे चर्च में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं। इस समय को ईसा मसीह के प्राण त्यागने का समय माना जाता है।

प्रार्थना के दौरान चर्च की सभी मोमबत्तियों को एक-एक करके बुझा दिया जाता है। यह क्रिया उस अंधेरे का प्रतीक है जो ईसा की मृत्यु के समय दुनिया पर छा गया था।

मोमबत्तियों का बुझना प्रभु के संसार से जाने के दुख को भी दर्शाता है। यह भक्तों को चिंतन और आत्म-मंथन करने के लिए प्रेरित करता है कि कैसे प्रकाश लुप्त हो गया था।

घंटी न बजने के पीछे का कारण

गुड फ्राइडे के दिन चर्च में किसी भी प्रकार का उत्सव या शोर-शराबा नहीं होता है। इस दिन चर्च की घंटियां नहीं बजाई जाती हैं, जो कि शोक की गहरी स्थिति को दर्शाता है।

घंटी न बजना इस बात का संकेत है कि आज का दिन खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि प्रभु के बलिदान पर शोक व्यक्त करने और उनसे क्षमा मांगने का है।

लोग लकड़ी के खटखटाने वाले यंत्रों का उपयोग करते हैं जिन्हें 'क्रॉटल' कहा जाता है। यह सादगी और विनम्रता का प्रतीक है, जो ईसा मसीह के जीवन का मूल मंत्र था।

उपवास और विशेष प्रार्थना

इस दिन ईसाई समुदाय के लोग उपवास रखते हैं और केवल सादा भोजन ग्रहण करते हैं। कई लोग इस दिन केवल पानी और रोटी पर ही रहते हैं ताकि वे ईसा के कष्टों को महसूस कर सकें।

चर्चों में 'क्रॉस के चरणों' (Stations of the Cross) की प्रार्थना की जाती है। इसमें ईसा मसीह के सूली तक के सफर के 14 पड़ावों को याद किया जाता है।

ईसाई धर्म के लोग इस दिन को मानवता की सेवा के लिए समर्पित करते हैं। वे गरीबों को दान देते हैं और समाज में शांति फैलाने का संकल्प लेते हैं।

बलिदान का संदेश

गुड फ्राइडे हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलने के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देनी पड़ सकती है। ईसा मसीह ने मरते समय भी अपने शत्रुओं को माफ करने की शिक्षा दी थी।

उन्होंने सूली पर चढ़ते समय कहा था, 'हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।' यह क्षमाशीलता ही इस दिन की सबसे बड़ी सीख है।

भले ही यह शोक का दिन है, लेकिन यह ईस्टर की आशा भी जगाता है। ईसाइयों का विश्वास है कि ईसा मसीह तीसरे दिन फिर से जीवित हो उठे थे, जो बुराई पर अच्छाई की जीत है।

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