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राजस्थान

पुलिस विवि दीक्षांत समारोह: राज्यपाल बागडे: दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, नई शुरुआत है

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जोधपुर में पुलिस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

HIGHLIGHTS

  • दीक्षांत समारोह विद्यार्थी जीवन के नव आरंभ का महत्वपूर्ण अवसर है।
  • अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र हित में समर्पित करना ही मुख्य उद्देश्य है।
  • साइबर अपराध और आतंकवाद जैसी चुनौतियों के बीच पुलिसिंग चुनौतीपूर्ण है।
  • जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति और सकारात्मक छवि है।
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जोधपुर | राजस्थान के राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने जोधपुर स्थित सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शिरकत की। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि विद्यार्थी जीवन के नव आरंभ का महत्वपूर्ण अवसर है।

राज्यपाल ने सभी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी जीवन का वह महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ प्राप्त शिक्षा को व्यवहार में उतारने का संकल्प लिया जाता है।

प्राचीन गुरुकुल परंपरा के ‘समावर्तन संस्कार’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य सत्य, धर्म और विनम्रता के साथ जीवन में आगे बढ़ना है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को समाज को समर्पित करें।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य और समाज सेवा

राज्यपाल बागडे ने कहा कि अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के हित में समर्पित करना ही दीक्षांत का मूल उद्देश्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से नागरिकों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था, अपराधों की रोकथाम और न्याय की रक्षा के प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका निभाने को कहा।

उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश में पुलिसिंग का कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी भरा है। आज के दौर में साइबर अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों का प्रसार और सामाजिक असंतुलन जैसी चुनौतियां सुरक्षा एजेंसियों के सामने खड़ी हैं।

राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का संगम आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे केवल डिग्री धारक न बनें, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील नागरिक भी बनें।

पुलिसिंग की चुनौतियां और सकारात्मक छवि

बागडे ने कहा कि ‘जन सेवा ही परम धर्म’ की भावना के साथ कार्य करते हुए ही पुलिस अपनी सकारात्मक छवि स्थापित कर सकती है। जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे युवाओं को अपने आचरण से अर्जित करना होगा।

‘जन सेवा ही परम धर्म’ की भावना के साथ कार्य करते हुए ही पुलिस अपनी सकारात्मक छवि स्थापित कर सकती है। जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति है।

राज्यपाल ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के महत्व पर बल देते हुए कहा कि डेटा एनालिटिक्स, फोरेंसिक एवं साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में दक्षता प्राप्त करना आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।

उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व देना चाहिए। पुलिस की छवि को सकारात्मक बनाने की जिम्मेदारी अब नए युवाओं के कंधों पर है। उन्हें समाज के साथ मित्रवत व्यवहार करते हुए न्याय सुनिश्चित करना होगा।

राष्ट्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का महत्व

सरदार पटेल के योगदान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश की एकता एवं अखंडता सर्वोपरि है। विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करना चाहिए, ताकि देश का मान-सम्मान और भी बढ़ सके।

राज्यपाल ने शिक्षा के समग्र स्वरूप पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं है। यह चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण का मुख्य आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर एकाग्रता के साथ आगे बढ़ने को कहा।

उन्होंने कहा कि भौतिक विकास के साथ नैतिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। नैतिकता के आधार पर ही जीवन को श्रेष्ठ, सार्थक एवं समाजोपयोगी बनाया जा सकता है। नैतिकता ही वह गुण है जो किसी भी व्यक्ति को भीड़ से अलग बनाती है।

न्याय व सेवा से सशक्त होगा राष्ट्र

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी समारोह को संबोधित करते हुए न्याय और सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्याय धर्म की जड़ है और सेवा राष्ट्र का प्राण है। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संकल्प दिवस के रूप में बताया।

देवनानी ने विद्यार्थियों से राष्ट्र सेवा, न्याय एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय पुलिसिंग और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से अपेक्षा की कि वह पुलिसिंग और फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्यों को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में विवेक, संवेदनशीलता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करना है, जो राष्ट्र की नींव है।

समारोह के अंत में राज्यपाल और कुलाधिपति ने मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और डिग्रियां प्रदान कीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ, पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और विद्यार्थियों के अभिभावक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

शिक्षा और दीक्षा का यह संगम विद्यार्थियों के लिए एक नई जिम्मेदारी का बोध लेकर आया है। अब ये युवा राष्ट्र की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए समाज के बीच जाएंगे, जिससे एक सुरक्षित और समृद्ध भारत का सपना साकार होगा।

*Edit with Google AI Studio

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