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भारत

India: HDFC बैंक पर 45 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, मचा हड़कंप

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

HDFC बैंक ने सरकारी एजेंसी को ज्यादा ब्याज देने के लिए मार्केटिंग खर्च का सहारा लिया।

HIGHLIGHTS

  • HDFC बैंक ने MSRDC को 6.01% ब्याज देने का वादा किया था, जो सामान्य से काफी ज्यादा था।
  • अतिरिक्त ब्याज की भरपाई के लिए करीब 45 करोड़ रुपये मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाए गए।
  • बैंक की आंतरिक जांच में CEO शशिधर जगदीशन और अन्य शीर्ष अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।
  • RBI के नियमों के उल्लंघन और फर्जी इनवॉइस के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है।
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मुंबई | देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के भीतर एक बड़े वित्तीय विवाद की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बैंक पर आरोप है कि उसने एक सरकारी एजेंसी को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा।

HDFC बैंक और MSRDC का विवादास्पद सौदा

पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) से जुड़ा है। बैंक ने इस सरकारी एजेंसी का बड़ा डिपॉजिट हासिल करने के लिए कथित तौर पर हेरफेर का रास्ता अपनाया। यह घटनाक्रम बैंकिंग जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।

साल 2021 में एचडीएफसी बैंक ने MSRDC के हजारों करोड़ रुपये के फंड को अपने पास लाने की कोशिश शुरू की थी। उस समय बैंक अपने बचत खातों पर करीब 3.5 प्रतिशत का ब्याज दे रहा था।

क्या था 6.01 फीसदी ब्याज का पूरा गणित?

MSRDC ने बैंक से स्पष्ट तौर पर कहा कि अन्य वित्तीय संस्थान उन्हें 6 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दे रहे हैं। एजेंसी ने संकेत दिया कि यदि बैंक बेहतर रिटर्न देता है, तो वे अपना फंड वहां रखेंगे।

बैंक के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई मौखिक बैठकों में MSRDC को 6.01 प्रतिशत रिटर्न देने पर सहमति बनी। हालांकि, बैंकिंग नियमों के तहत सामान्य बचत खातों पर इतना अधिक ब्याज देना संभव नहीं था।

यहीं से कथित तौर पर 'मार्केटिंग खर्च' का रास्ता निकाला गया। बैंक ने इस अतिरिक्त ब्याज की भरपाई के लिए एक अलग योजना बनाई। इसे सीधे ब्याज न दिखाकर मार्केटिंग बजट में डाल दिया गया।

मार्केटिंग खर्च के नाम पर छिपाई गई हकीकत

बैंक की आंतरिक विजिलेंस जांच की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 45 करोड़ रुपये मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाए गए। यह राशि रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन के नाम पर अलग-अलग वेंडर्स को जारी की गई थी।

कागजों पर यह दिखाया गया कि बैंक सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। लेकिन असल में यह रकम MSRDC को दिए जाने वाले अतिरिक्त ब्याज की भरपाई करने के लिए इस्तेमाल की गई।

"विजिलेंस जांच में मार्केटिंग प्रमुख ने स्वीकार किया कि विभाग ने डिफरेंशियल इंटरेस्ट को मार्केटिंग खर्च की तरह दिखाने में फैसिलिटेटर की भूमिका निभाई थी।"

विजिलेंस जांच में सामने आई बड़ी खामियां

बैंक के मार्केटिंग विभाग के ऑडिट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। 2023-24 और 2024-25 के दौरान सड़क सुरक्षा अभियान के नाम पर 39.7 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

जांच टीम को यह जानकर हैरानी हुई कि एक ही फोटो को तीन अलग-अलग इनवॉइस के साथ जोड़ा गया था। कई भुगतान बिना किसी जरूरी सर्टिफिकेट या सत्यापन के ही जारी कर दिए गए थे।

हैरानी की बात यह भी है कि इस पूरे अभियान में बैंक की CSR टीम को शामिल नहीं किया गया। आमतौर पर सामाजिक जागरूकता से जुड़े ऐसे बड़े काम CSR विभाग के जरिए ही किए जाते हैं।

बैंक के शीर्ष नेतृत्व पर उठते सवाल

जांच रिपोर्ट में बैंक के कई दिग्गज अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन, सीएफओ श्रीनिवासन वैद्यनाथन और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रवि संथानम का नाम प्रमुख है।

रिपोर्ट बताती है कि सीनियर लेवल की बैठकों में ही इस व्यवस्था पर सहमति बनी थी। इससे बैंक के भीतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

RBI के नियमों का खुला उल्लंघन?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, बैंक किसी एक चुनिंदा ग्राहक को अलग से ज्यादा रिटर्न नहीं दे सकते। यह बैंकिंग के निष्पक्ष सिद्धांतों और पारदर्शिता के खिलाफ माना जाता है।

इस मामले में बैंक की अपनी एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की भी आशंका है। चूंकि भुगतान वेंडर्स के जरिए किया गया, इसलिए टैक्स चोरी और गलत इनवॉइसिंग के मामले भी बन सकते हैं।

चेयरमैन का इस्तीफा और नैतिकता का सवाल

इसी साल मार्च में बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया था जो उनके निजी मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खाती थीं।

उस समय बाजार में कई तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन अब इस खुलासे के बाद उनके इस्तीफे को जोड़कर देखा जा रहा है। निवेशकों के मन में यह सवाल है कि क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया।

बाजार में हलचल और निवेशकों का डर

इस खबर के सार्वजनिक होने के बाद एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट देखी गई है। बुधवार को बीएसई पर बैंक का शेयर करीब 1.80 फीसदी टूटकर 765 रुपये के स्तर पर आ गया।

यह पूरा विवाद एचडीएफसी बैंक जैसी प्रतिष्ठित संस्था की साख पर बट्टा लगा सकता है। अब देखना यह होगा कि आरबीआई इस आंतरिक रिपोर्ट पर क्या कड़ा रुख अपनाता है और बैंक क्या सफाई देता है।

निष्कर्ष के तौर पर, यह मामला बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। अगर बैंक के शीर्ष अधिकारी ही नियमों को दरकिनार करेंगे, तो आम निवेशकों का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।

*Edit with Google AI Studio

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