Pali | बाली उपखंड क्षेत्र के मोरी ग्राम की देवगिरी माता मंदिर की पहाड़ी पर सैकड़ों बंदर पिछले 55 दिनों से फंसे हुए हैं। जवाई बांध का जलस्तर बढ़ने से यह पहाड़ी पूरी तरह से पानी से घिर गई है, जिससे बंदरों के लिए वहां भोजन और अन्य आवश्यकताओं का संकट पैदा हो गया है।
Rajasthan: जवाई बांध के पानी से घिरी पहाड़ी पर फंसे हैं सैकड़ों बंदर
बाली उपखंड क्षेत्र के मोरी ग्राम की देवगिरी माता मंदिर की पहाड़ी पर सैकड़ों बंदर पिछले 55 दिनों से फंसे हुए हैं। जवाई बांध का जलस्तर बढ़ने से यह पहाड़ी पूरी तरह
HIGHLIGHTS
- ग्रामीणों की पहल: मोरी ग्राम के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बंदरों के लिए भोजन सामग्री पहुंचाने का निर्णय लिया और इस मानवीय प्रयास में जुट गए हैं।
- 100 किलो खाद्य सामग्री प्रतिदिन: ग्रामीण प्रतिदिन नाव से 100 किलो खाद्य सामग्री पहाड़ी पर फंसे बंदरों तक पहुंचा रहे हैं। इसमें बंदरों की पसंदीदा चीजें जैसे फल, चने और सूखे खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
- समर्पण और सहयोग का उदाहरण: ग्रामीणों का यह निरंतर प्रयास स्थानीय लोगों के समर्पण और सहयोग का उदाहरण बन गया है, जिससे बंदरों को सुरक्षित रखा जा रहा है।
- इंसानियत की मिसाल: ग्रामीणों के इस मानवीय प्रयास से समाज में यह संदेश जा रहा है कि प्राकृतिक आपदाओं में हमें हर जीव की सहायता के लिए तत्पर रहना चाहिए।
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ग्रामीणों का सराहनीय प्रयास
बंदरों की इस परेशानी की जानकारी मिलते ही मोरी ग्राम के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से इनके लिए भोजन सामग्री पहुंचाने का निर्णय लिया। प्रतिदिन ग्रामीण नाव के जरिए पहाड़ी पर बंदरों के लिए 100 किलो खाद्य सामग्री पहुंचा रहे हैं। इसमें बंदरों की पसंदीदा चीजें जैसे फल, चने, और अन्य सूखे खाद्य पदार्थ शामिल हैं, ताकि वे आसानी से खा सकें और सुरक्षित रहें।
हर दिन पहुंचाई जा रही सामग्री
ग्रामीणों का यह प्रयास लगातार जारी है। नाव से प्रतिदिन 100 किलो खाद्य सामग्री पहाड़ी पर फंसे बंदरों तक पहुंचाई जा रही है। इस मानवीय प्रयास में स्थानीय लोगों का समर्पण और सहयोग देखा जा रहा है, जिससे इस प्राकृतिक संकट में बंदरों को बचाने में मदद मिल रही है।
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प्राकृतिक आपदा में इंसानियत की मिसाल
बाली क्षेत्र के ग्रामीणों का यह प्रयास समाज के लिए एक मिसाल बन गया है। इस संकट में भी उन्होंने अपनी इंसानियत का परिचय देते हुए बंदरों की जान बचाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
ग्रामीणों की इस पहल से न सिर्फ बंदरों की भूख मिट रही है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जा रहा है कि प्राकृतिक आपदाओं में हर जीव की सहायता के लिए हमें तत्पर रहना चाहिए।
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