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हिंदी पत्रकारिता के 200 साल: हिंदी पत्रकारिता: 200 साल का सफर और AI का भविष्य

जयपुर में 'उदन्त मार्तण्ड' के 200 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई, जिसमें AI और पत्रकारिता के भविष्य पर चर्चा हुई।

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HIGHLIGHTS

  • 'उदन्त मार्तण्ड' के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में जयपुर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।
  • प्रसिद्ध व्यंग्यकार यशवंत व्यास ने AI से सीखने और न घबराने पर जोर दिया।
  • उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए युवा पत्रकारों हिंगलाज दान चारण और ओमप्रकाश को सम्मानित किया गया।
  • विशेषज्ञों ने पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक उपयोग पर जानकारी दी।
national seminar on 200 years of hindi journalism in jaipur

जयपुर | देश के पहले हिंदी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' के 200वें वर्ष के उपलक्ष्य में जयपुर में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली यात्रा और भविष्य की चुनौतियों पर मंथन हुआ। इस दौरान युवा पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।

पत्रकारिता के आधारभूत विचार जरूरी

समारोह के मुख्य वक्ता, प्रसिद्ध व्यंग्यकार यशवंत व्यास ने पत्रकारों के सम्मान को एक सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे अच्छी पत्रकारिता को प्रोत्साहन मिलता है।

"हमें सदैव अपने आधारभूत विचारों का स्मरण रखना चाहिए, क्योंकि उन्हीं से सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।"

व्यास ने आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें AI से घबराने की नहीं, बल्कि उससे सीखने और आगे बढ़ने की जरूरत है।

गंभीर पत्रकारिता एक समर्पण

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार पदम मेहता ने युवा पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों का प्रयास होना चाहिए कि उनकी खबरों से आम जनता को राहत मिले।

मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि गंभीर पत्रकारिता पूरी तरह से समर्पण का कार्य है, जिसमें गहरी निष्ठा और मेहनत की आवश्यकता होती है।

स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारिता का योगदान

उद्घाटन सत्र में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एन. के. पांडे ने पत्रकारिता के 200 वर्षों के सफर पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन में पत्र-पत्रिकाओं का बहुत बड़ा योगदान था। साहित्यिक पत्रिकाओं ने भी शब्दकोश को समृद्ध करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता का अस्तित्व कभी संकट में नहीं आएगा, यह हमेशा आबाद रहेगी। उन्होंने बताया कि आज अन्य क्षेत्रीय भाषाएं भी देवनागरी लिपि को अपना रही हैं, जिससे हिंदी का निरंतर विकास हो रहा है।

AI का नैतिक उपयोग और सम्मान समारोह

संगोष्ठी में एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें AI के नैतिक उपयोग पर चर्चा हुई। विषय विशेषज्ञ प्रदीप बीदावत और आलोक आनंद ने मीडिया में AI टूल्स के बेहतर इस्तेमाल की व्यावहारिक जानकारी दी।

इस अवसर पर पत्रकार स्वर्गीय श्याम आचार्य की स्मृति में "पोलिटिकल पंचायत" के हिंगलाज दान चारण को सम्मानित किया गया।

वहीं, स्वर्गीय श्रीगोपाल पुरोहित की स्मृति में दैनिक भास्कर डिजिटल के ओमप्रकाश को भी उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

इस संगोष्ठी ने न केवल हिंदी पत्रकारिता के इतिहास को याद किया, बल्कि भविष्य के लिए एक नई दिशा भी दिखाई। कार्यक्रम में मीडिया जगत के कई जाने-माने लोग और विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे यह एक सफल और सार्थक संवाद का मंच बना।

*Edit with Google AI Studio

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