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भारत

EV बाजार में टाटा-महिंद्रा का दबदबा: भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 84% का उछाल, महिंद्रा बनी दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी, टेस्ला पिछड़ी

बलजीत सिंह शेखावत

भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, जिससे टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों ने वैश्विक दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ईवी बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

HIGHLIGHTS

  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 84% बढ़कर 1,99,923 यूनिट तक पहुंच गई।
  • महिंद्रा एंड महिंद्रा ने हुंडई को पछाड़कर देश की दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी का खिताब हासिल किया।
  • टाटा मोटर्स 39.42% बाजार हिस्सेदारी के साथ इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में नंबर वन बनी हुई है।
  • विदेशी कंपनियों में विनफास्ट और बीवाईडी ने टेस्ला के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।
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नई दिल्ली | भारतीय कार बाजार में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का दौर शुरू हो चुका है। देश के मध्यम वर्ग और युवाओं के बीच अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है।

वित्त वर्ष 2025-26 के ताजा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय सड़कों पर अब साइलेंट रिवोल्यूशन यानी इलेक्ट्रिक क्रांति आ गई है। ईवी की बिक्री में रिकॉर्ड 84% का उछाल आया है।

इस वित्त वर्ष में कुल 1,99,923 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए। जबकि देश में कुल कारों की बिक्री 47 लाख के आंकड़े को पार कर गई है, जिसमें ईवी की कुल हिस्सेदारी 4.2% रही।

महिंद्रा और टाटा का शानदार प्रदर्शन

इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग ने बाजार के समीकरण बदल दिए हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स ने अपनी मजबूत ईवी लाइनअप के दम पर हुंडई इंडिया को पीछे छोड़ दिया है।

महिंद्रा अब मारुति सुजुकी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी बन गई है। महिंद्रा की इस शानदार बढ़त में इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान करीब 30% रहा है।

टाटा मोटर्स ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है। कंपनी की कुल विकास दर में ईवी सेगमेंट ने 26% की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे हुंडई अब चौथे पायदान पर खिसक गई है।

किस कंपनी ने मारी बाजी?

अगर हम केवल इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की बात करें, तो टाटा मोटर्स 78,811 वाहनों के साथ नंबर एक पर है। टाटा की बाजार हिस्सेदारी 39.42% के साथ सबसे अधिक रही है।

एमजी मोटर्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और 53,089 वाहन बेचकर 26.55% हिस्सेदारी हासिल की। महिंद्रा 42,721 वाहनों के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है और तेजी से बढ़ रही है।

हुंडई इंडिया ने 5,885 इलेक्ट्रिक कारें बेचीं, जबकि चीनी दिग्गज बीवाईडी ने 5,361 वाहनों की बिक्री दर्ज की। बीवाईडी की बिक्री पिछले साल से 54% ज्यादा रही है।

टेस्ला बनाम विनफास्ट की जंग

भारतीय बाजार में कदम रखने वाली नई विदेशी कंपनियों के बीच भी कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। एलन मस्क की टेस्ला फिलहाल नई कंपनियों से पिछड़ती दिख रही है।

टेस्ला ने जुलाई 2025 में भारत में प्रवेश किया था, लेकिन इस वित्त वर्ष में वह केवल 342 वाहन ही बेच पाई। इसके मुकाबले विनफास्ट ने 2,390 वाहनों की डिलीवरी की।

विनफास्ट की बिक्री टेस्ला से सात गुना अधिक रही। वहीं बीवाईडी की बिक्री टेस्ला के मुकाबले 15 गुना ज्यादा दर्ज की गई है, जो बाजार की नई दिशा तय कर रही है।

भविष्य की बड़ी चुनौतियां और निवेश

मारुति सुजुकी और हुंडई जैसे बड़े नाम फिलहाल इलेक्ट्रिक सेगमेंट में बहुत पीछे हैं। मारुति की कुल 18.61 लाख की बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी मात्र 0.07% है।

हालांकि, ये कंपनियां अब बड़े निवेश की तैयारी में हैं। टोयोटा और मारुति आने वाले समय में कई नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं ताकि बाजार में वापसी कर सकें।

बढ़ते चार्जिंग स्टेशन और सरकारी सब्सिडी ने ग्राहकों का भरोसा बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगला वित्त वर्ष भारतीय ईवी उद्योग के लिए और भी शानदार होने वाला है।

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