नई दिल्ली | संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के क्रूर चेहरे को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।
UN में भारत ने पाक को लताड़ा: UNSC में भारत ने पाकिस्तान को धोया, याद दिलाई 1971 की बर्बरता
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के कलंकित इतिहास और अफगानिस्तान में उसकी क्रूरता का पर्दाफाश किया।
HIGHLIGHTS
- राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने UNSC में पाकिस्तान के क्रूर चेहरे को बेनकाब किया।
- UNAMA की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में नागरिक मौतों के लिए पाक जिम्मेदार है।
- भारत ने 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दौरान पाक सेना के अत्याचारों की याद दिलाई।
- अस्पतालों और स्कूलों पर हमलों को लेकर भारत ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई।
संबंधित खबरें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का आक्रामक रुख
सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित वार्षिक खुली बहस में बोलते हुए भारत ने पाकिस्तान के कलंकित रिकॉर्ड को सबके सामने रखा। राजदूत पर्वतनेनी ने चीन को परिषद की अध्यक्षता के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि संघर्ष की स्थितियों के दौरान नागरिकों की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने का एक केंद्रीय तत्व है। भारत ने नागरिकों की जान जाने के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का आह्वान किया।
नागरिक मौतों के आंकड़ों पर जताई गंभीर चिंता
संबंधित खबरें
राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए युद्ध क्षेत्रों में हो रहे जान-माल के नुकसान पर आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि तीन वर्षों के बाद नागरिक मौतों में गिरावट आई है।
साल 2025 में दुनिया भर के 20 सशस्त्र संघर्षों में 37,000 से अधिक नागरिकों की मौत दर्ज की गई है। भारत ने इस स्थिति को मानवता के लिए एक बड़ी चुनौती और चिंताजनक बताया।
भारत ने कहा कि लगातार नागरिकों का हताहत होना और बुनियादी ढांचे का विनाश बेहद गंभीर है। अस्पतालों, स्कूलों और चिकित्सा कर्मियों पर हमले होना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है।
शहरी क्षेत्रों में युद्ध के बदलते भयावह तौर-तरीके
राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि शहरों और आबादी वाले इलाकों में मिसाइलों और बमों का इस्तेमाल नागरिक नुकसान का बड़ा कारण है। शहरी क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों की तैनाती से आम जनता पिस रही है।
ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग
विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में विस्फोटक हथियार तैनात करने के लिए ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई गई। यह चलन आधुनिक युद्ध में नागरिकों के लिए एक नया और गंभीर खतरा बन गया है।
भारत ने मांग की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त प्रणालियों जैसी तकनीकों का उपयोग मानवीय सिद्धांतों के दायरे में होना चाहिए। इन तकनीकों का गलत इस्तेमाल वैश्विक सुरक्षा के लिए घातक साबित हो सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उभरती हुई तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति जवाबदेह बनाना अनिवार्य है। बिना किसी नियम के इन तकनीकों का इस्तेमाल युद्ध अपराधों को बढ़ावा दे सकता है।
सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान की घेराबंदी
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। यह आतंकवाद क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को लगातार कमजोर करने का काम करता रहा है, जिसे अब रोकना होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो राज्य आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं या शरण देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद अपने सभी रूपों में दुनिया भर के नागरिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
कोई भी कारण या शिकायत नागरिकों पर जानबूझकर किए गए हमलों को सही नहीं ठहरा सकती। आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग किया जाना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद को पालने वाले देश खुद भी सुरक्षित नहीं रह सकते। अब समय आ गया है कि आतंकी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए।
अफगानिस्तान में पाकिस्तान की बर्बरता का पर्दाफाश
बहस के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामलों का जिक्र किया, तो भारत ने उसे करारा जवाब दिया। राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड नरसंहार से पूरी तरह कलंकित है।
UNAMA की रिपोर्ट ने खोला पाकिस्तान का कच्चा चिट्ठा
भारतीय दूत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के दस्तावेजों को सामने रखते हुए पाकिस्तान की पोल खोल दी। UNAMA की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने भारी तबाही मचाई है।
वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई सीमा पार हिंसा के कारण 750 नागरिक मारे गए। यह आंकड़ा पाकिस्तान की सेना द्वारा की गई सीधी कार्रवाई को दर्शाता है।
दस्तावेजों में अफगानिस्तान में नागरिक हताहत होने की 95 घटनाओं में से 94 घटनाएं पाकिस्तानी बलों के नाम दर्ज हैं। यह आंकड़े पाकिस्तान की क्रूरता और हस्तक्षेप का सबसे बड़ा सबूत हैं।
अस्पताल पर किया गया बर्बर और कायरतापूर्ण हमला
पाकिस्तान की क्रूरता का उदाहरण देते हुए भारतीय दूत ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल का जिक्र किया। इस अस्पताल पर पाकिस्तान ने इसी साल मार्च में भीषण हवाई हमला किया था।
रमजान के पवित्र महीने के दौरान किए गए इस हमले में 269 नागरिकों की जान चली गई। यह हमला तब हुआ जब मरीज शाम की नमाज के बाद मस्जिद से बाहर निकल रहे थे।
भारत ने सवाल उठाया कि एक अस्पताल को किसी भी सूरत में सैन्य निशाना कैसे बनाया जा सकता है? यह कृत्य न केवल अमानवीय है बल्कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों का घोर उल्लंघन भी है।
1971 के अत्याचारों और नरसंहार की दिलाई याद
भारत ने पाकिस्तान के पाखंड पर कड़ा प्रहार करते हुए 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की याद दिलाई। पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के उस काले इतिहास को उजागर किया जिसे वह भूलना चाहता है।
ऑपरेशन सर्चलाइट और सामूहिक बलात्कार का अभियान
1971 में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के दौरान पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा भीषण अत्याचार करवाए थे। उस समय पाक सेना ने 4,00,000 महिलाओं के व्यवस्थित सामूहिक बलात्कार के अभियान को मंजूरी दी थी।
भारत ने कहा कि एक ऐसा देश जो अपने ही लोगों पर बमबारी करता है, उससे ऐसे कृत्यों की उम्मीद की जा सकती है। पाकिस्तान का अमानवीय आचरण उसकी अपनी आंतरिक विफलताओं को दर्शाता है।
बिना किसी विश्वास, कानून और नैतिकता के पाकिस्तान आज भी दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन आज पूरी दुनिया पाकिस्तान के इस जहरीले दुष्प्रचार को अच्छी तरह समझ चुकी है।
निष्कर्ष: वैश्विक शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता
अंत में राजदूत पर्वतनेनी ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति का मुख्य आधार है। भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को हमेशा दोहराता रहेगा और संघर्षों को रोकेगा।
भारत ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं। पाकिस्तान जैसे देशों की जवाबदेही तय करना अब वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
*Edit with Google AI Studio