वॉशिंगटन | भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अगले हफ्ते भारत का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन का दौरा करेगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह दौरा डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ ढांचे के लागू होने के बाद हो रहा है। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य बदले हुए हालात में भारत के हितों को सुरक्षित रखना है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संकट: भारत-अमेरिका व्यापार डील पर संकट के बादल: अगले हफ्ते वॉशिंगटन जाएगा भारतीय प्रतिनिधिमंडल, टैरिफ और Section 301 जांच पर होगी चर्चा
डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ नियमों और Section 301 जांच के बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फिर से शुरू हो रही है। भारतीय दल अगले हफ्ते वॉशिंगटन में रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए बैठक करेगा।
HIGHLIGHTS
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते व्यापार समझौते के लिए वॉशिंगटन का दौरा करेगा।
- डोनाल्ड ट्रंप के 10 फीसदी वैश्विक टैरिफ के बाद भारत का रणनीतिक लाभ कम हुआ है।
- समझौते के कानूनी दस्तावेजों (Legal Text) को अंतिम रूप देने में देरी हुई है।
- USTR की Section 301 जांच भारत और करीब 60 अन्य देशों पर दबाव बढ़ा रही है।
संबंधित खबरें
टैरिफ नियमों में बदलाव का असर
डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ में बदलाव के कारण अब सभी देशों पर समान रूप से 10 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया गया है। इससे भारत को मिलने वाला अतिरिक्त फायदा खत्म हो गया है।
फरवरी में हुए समझौते के अनुसार, भारत को 18 फीसदी तक की टैरिफ कटौती मिलने वाली थी। इससे भारत को चीन और वियतनाम जैसे देशों पर बढ़त मिलती, जो अब बराबर हो गई है।
कानूनी दस्तावेजों में देरी
टैरिफ में आए इस अचानक बदलाव के कारण पिछले महीने होने वाली मुख्य वार्ताकारों की बैठक भी टाल दी गई थी। इस बैठक में समझौते के कानूनी टेक्स्ट को अंतिम रूप दिया जाना था।
अब अगले हफ्ते होने वाली बैठक में दोनों पक्ष फिर से आगे का रास्ता तलाशने की कोशिश करेंगे। यह वार्ता भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संबंधित खबरें
Section 301 जांच का दबाव
सिर्फ टैरिफ ही नहीं, बल्कि अमेरिका की Section 301 जांच भी भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। USTR ने भारत सहित करीब 60 देशों को इस जांच के दायरे में रखा है।
इस जांच का उद्देश्य यह देखना है कि भारतीय नीतियां अमेरिकी व्यापार में बाधा तो नहीं बन रही हैं। यह स्थिति डील को मजबूत करने के बजाय भारतीय पक्ष पर दबाव बढ़ा रही है।
भविष्य की चुनौतियां
भारतीय प्रतिनिधिमंडल को अब नए सिरे से सौदेबाजी करनी होगी। टैरिफ लाभ कम होने से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
वॉशिंगटन में होने वाली यह बातचीत तय करेगी कि भारत अपने आर्थिक हितों को कितना सुरक्षित रख पाता है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस द्विपक्षीय वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं।
ताज़ा खबरें
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: जयपुर के कारोबारी परिवार के 6 लोग घायल, बच्चे ने बयां किया खौफनाक मंजर
जयपुर में एक साल रहा लश्कर आतंकी 'खरगोश': सी-स्कीम में की नौकरी, फर्जी पासपोर्ट बनाकर हुआ फरार, एटीएस की जांच तेज
शरद पवार ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती: जानें 85 वर्षीय दिग्गज नेता की सेहत का ताजा अपडेट और क्या बोले डॉक्टर
सरकार ने अश्वगंधा के पत्तों पर लगाया कड़ा बैन, आयुर्वेद एक्सपर्ट्स ने बताया सेहत के लिए क्यों हैं ये जहर