नई दिल्ली | भारतीय रेलवे यात्रियों के अनुभव को और अधिक सुखद और सुरक्षित बनाने के लिए अपनी बुनियादी संरचना में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने अब नई तकनीक की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को रेल भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अधिकारियों को तकनीक के विस्तार के निर्देश दिए। इस बैठक का मुख्य केंद्र रेलवे ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा था। मंत्रालय ने अब यह तय किया है कि भविष्य में रेलवे ट्रैक पर कंपोजिट स्लीपरों का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। यह तकनीक रेलवे के पुराने ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की क्षमता रखती है।
भारतीय रेलवे में तकनीक का नया दौर: अब कंपोजिट स्लीपर और AI से होगा ट्रैक मैनेजमेंट, सफर होगा सुरक्षित और आरामदायक
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे ट्रैक की सुरक्षा और यात्रियों के आराम के लिए कंपोजिट स्लीपर और एआई आधारित निगरानी प्रणाली शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
HIGHLIGHTS
- रेलवे अब भारी कंक्रीट और लोहे की जगह हल्के और मजबूत कंपोजिट स्लीपरों का उपयोग करेगा।
- एआई (AI) तकनीक और ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार की मदद से रेलवे ट्रैक की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।
- कंपोजिट स्लीपर प्रति वर्ग सेंटीमीटर 700 किलोग्राम तक का भार सहने में सक्षम हैं और इनका रखरखाव आसान है।
- रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में इन महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है।
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क्या हैं कंपोजिट स्लीपर और इनके फायदे?
रेलवे के दावों के अनुसार, ब्रिज एप्रोच, पॉइंट्स और क्रॉसिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अब केवल कंपोजिट स्लीपर ही लगाए जाएंगे। ये लोहे और कंक्रीट के स्लीपरों का स्थान लेंगे। वर्तमान में उपयोग होने वाले कंक्रीट के स्लीपर काफी भारी होते हैं और उनके रखरखाव में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके विपरीत, कंपोजिट स्लीपर काफी हल्के और टिकाऊ होते हैं। इन स्लीपरों की भार वहन क्षमता जबरदस्त है। ये स्लीपर प्रति वर्ग सेंटीमीटर 700 किलोग्राम तक का भारी वजन सहन कर सकते हैं, जिससे ट्रैक की मजबूती कई गुना बढ़ जाती है।
यात्रियों को मिलेगा झटकों से छुटकारा
इन नए स्लीपरों की सबसे बड़ी खूबी इनकी 'कुशनिंग' क्षमता है। जब ट्रेन इन स्लीपरों के ऊपर से गुजरेगी, तो यात्रियों को झटके बहुत कम महसूस होंगे। यह तकनीक विशेष रूप से पुलों और घुमावदार रास्तों पर ट्रेन की गति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी। इससे रेल यात्रा अब पहले से कहीं अधिक आरामदायक हो जाएगी। इसके अलावा, इन स्लीपरों का जीवनकाल अधिक होने के कारण रेलवे के वार्षिक रखरखाव खर्च में भी बड़ी बचत होगी। इन्हें बिछाना और बदलना भी काफी कम समय लेने वाला काम है।
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एआई (AI) और ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार
रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए अब इंसानी आंखों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी सहारा लिया जाएगा। इसके लिए विशेष निरीक्षण गाड़ियां तैयार की जा रही हैं। इन निरीक्षण गाड़ियों में एआई तकनीक से लैस 'ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार' (GPR) डिवाइस लगाई जाएगी। यह रडार ट्रैक के आधार की गहराई तक जांच करने में पूरी तरह सक्षम है। यह रडार डिवाइस ट्रैक के नीचे की मिट्टी और पत्थरों की स्थिति का जायजा लेगी। एआई की मदद से किसी भी संभावित खतरे का विश्लेषण पहले ही कर लिया जाएगा।
सुरक्षा के नए मानक
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एआई तकनीक की मदद से ट्रैक मैनेजमेंट को पूरी तरह से डिजिटल और सटीक बनाया जा रहा है। इस नई तकनीक के आने से पटरियों में आने वाली दरारें या आधार की कमजोरी का पता तत्काल लग जाएगा। इससे रेल हादसों को रोकने में बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे का यह डिजिटल और तकनीकी बदलाव भविष्य की 'स्मार्ट रेलवे' की नींव रख रहा है। यात्री अब एक सुरक्षित और झटके-मुक्त सफर का आनंद ले सकेंगे।
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