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रेवदर सट्टेबाजी मामला: सट्टेबाजी मामला: पूर्व विधायक जगसीराम कोली ने तोड़ी चुप्पी, आरोपों पर दिया जवाब

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली

सिरोही के रेवदर में पुलिस द्वारा सट्टेबाजी गिरोह पकड़े जाने के बाद पूर्व विधायक जगसीराम कोली ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने खेत को ठेके पर देने की बात कही है।

HIGHLIGHTS

  • पूर्व विधायक जगसीराम कोली ने खेत में चल रहे सट्टेबाजी मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। कोली ने बताया कि उन्होंने अपना खेत एक साल के लिए खेती हेतु ठेके पर दिया हुआ था। उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए खुद पर कार्रवाई की चुनौती दी। कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों को उन्होंने निराधार बताया।
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Sirohi Reodar Ex MLA Jagsiram Koli

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर क्षेत्र में हाल ही में पुलिस द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इस कार्रवाई के दौरान एक सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था जो पूर्व विधायक जगसीराम कोली के खेत पर संचालित हो रहा था। इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर यह है कि स्वयं जगसीराम कोली ने सामने आकर अपनी सफाई दी है और पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए जांच में सहयोग की बात कही है। इस प्रकरण ने जिले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को एक नया मोड़ दे दिया है जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है।

रेवदर पुलिस ने कुछ दिन पहले एक गुप्त सूचना के आधार पर जगसीराम कोली के खेत पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 23 लोगों को जुआ और सट्टा खेलते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था क्योंकि यह स्थान एक कद्दावर नेता से जुड़ा हुआ था। हालांकि पुलिस ने शुरुआत में इस बात को आधिकारिक रूप से पुष्ट करने में समय लिया कि खेत किसका है लेकिन धीरे-धीरे यह जानकारी सार्वजनिक हो गई कि जमीन जगसीराम कोली के परिवार की है। पुलिस अभी भी इस मामले में सभी कानूनी दस्तावेज खंगाल रही है ताकि मालिकाना हक की पुष्टि कानूनी तौर पर की जा सके।

पूर्व विधायक जगसीराम कोली का पक्ष और सफाई

लगातार हो रही आलोचनाओं और राजनीतिक हमलों के बीच जगसीराम कोली ने अपना मौन तोड़ा है। उन्होंने मीडिया को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह किसी भी गलत गतिविधि में शामिल नहीं हैं और न ही उन्हें इसकी जानकारी थी। कोली ने बताया कि उन्होंने अपने खेत को खेती के कार्यों के लिए एक साल के अनुबंध पर किसी अन्य व्यक्ति को दे रखा था। उन्होंने कहा कि ठेके पर जमीन देने के बाद मालिक का वहां हर समय मौजूद रहना संभव नहीं होता है। कोली के अनुसार उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनकी जमीन का इस्तेमाल सट्टेबाजी जैसी अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और कांग्रेस के आरोप

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कांग्रेस के दिग्गज नेता संयम लोढ़ा और वर्तमान विधायक मोतीराम कोली ने जगसीराम कोली को सीधे तौर पर आड़े हाथों लिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस तरह की गतिविधियां बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं हैं। संयम लोढ़ा ने पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठाए कि वे खेत के मालिक का नाम सार्वजनिक करने में देरी क्यों कर रहे हैं। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए जगसीराम कोली ने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष उनकी छवि खराब करने के लिए इस घटना का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर रहा है।

जांच के लिए प्रशासन को खुली चुनौती

जगसीराम कोली ने पुलिस और प्रशासन को संबोधित करते हुए कहा कि वे इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले के अंतिम निर्णय तक पहुंचा जाना चाहिए ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। कोली ने यह भी कहा कि यदि जांच में उनकी एक प्रतिशत भी गलती पाई जाती है या उनकी संलिप्तता सिद्ध होती है तो पुलिस उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने दूध का दूध और पानी का पानी करने की बात कहते हुए प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। कोली ने कहा कि राजनीति में शुचिता होनी चाहिए और किसी को बिना प्रमाण के बदनाम करना उचित नहीं है।

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खेत के मालिकाना हक और एग्रीमेंट की स्थिति

जब उनसे सवाल किया गया कि खेत वास्तव में किसके नाम पर पंजीकृत है तो उन्होंने बताया कि यह जमीन उनके परिवार के नाम पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेत चाहे उनके नाम हो उनकी पत्नी के नाम हो या उनके बेटों या भाइयों के नाम पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि एग्रीमेंट की अवधि एक साल की थी और उसे किए हुए अभी कुछ ही समय बीता था। पुलिस अब उन कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है जो ठेके के दौरान तैयार किए गए थे। एग्रीमेंट में शामिल गवाहों और ठेका लेने वाले व्यक्तियों के आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि क्या यह गिरोह पहले भी इसी तरह के कार्यों में लिप्त रहा है।

निष्कर्ष और भविष्य की कार्रवाई

फिलहाल पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और गिरफ्तार किए गए 23 लोगों से पूछताछ जारी है। इस समय पूरे सिरोही जिले की नजरें इस हाई प्रोफाइल मामले पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी इस बात की काफी चर्चा है कि क्या वास्तव में एक पूर्व विधायक को अपने खेत में हो रही गतिविधियों की जानकारी नहीं थी। वहीं दूसरी ओर पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि इसमें राजनीतिक हस्तियों के नाम शामिल हैं। पुलिस विभाग पर इस समय भारी दबाव है कि वे बिना किसी पक्षपात के इस मामले का निस्तारण करें। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस की जांच किस दिशा में जाती है और इसमें कौन-कौन से नए चेहरे सामने आते हैं जिससे क्षेत्र की राजनीति और गरमा सकती है।

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