जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास जोबनेर में एक ऐसी शादी होने जा रही है, जो भक्ति और समर्पण की नई मिसाल पेश करेगी। यहां 21 साल की तमन्ना कंवर भगवान श्रीकृष्ण को अपना जीवनसाथी बनाने जा रही हैं।
राजस्थान की मिट्टी हमेशा से मीरा जैसी अनन्य भक्त की कहानियों के लिए जानी जाती रही है। अब तमन्ना और उनका परिवार भी उसी राह पर चलते हुए भक्ति की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है जिसे देख हर कोई भावुक है।
तमन्ना कंवर जन्म से दिव्यांग हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनकी माता डॉ. मंजू कंवर ने बताया कि एक मां के रूप में उनकी प्रबल इच्छा थी कि वे अपनी बेटी का कन्यादान करें और उसे दुल्हन के रूप में देखें।
जयपुर में कृष्ण-भक्ति की अनूठी शादी: जयपुर में कलयुग की 'मीरा': 21 साल की तमन्ना रचाएंगी भगवान श्री कृष्ण संग ब्याह, चांदी की प्रतिमा संग होंगे सात फेरे
जयपुर के जोबनेर में 21 साल की दिव्यांग युवती तमन्ना कंवर भगवान श्रीकृष्ण के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रही हैं। पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ होने वाली इस शादी की चर्चा पूरे प्रदेश में है।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के जोबनेर की 21 वर्षीय दिव्यांग युवती तमन्ना कंवर भगवान श्रीकृष्ण को अपना जीवनसाथी बना रही हैं।
- शादी के लिए विशेष रूप से चांदी की श्रीकृष्ण प्रतिमा तैयार कराई गई है जिस पर सोने की परत चढ़ी है।
- वृंदावन के भांडीर वन से सुहाग सामग्री और सिंदूर लाया गया है, जहां ब्रह्माजी ने राधा-कृष्ण का विवाह कराया था।
- इस दिव्य विवाह में करीब 2000 मेहमानों को आमंत्रित किया गया है और सभी रस्में पारंपरिक तरीके से निभाई जा रही हैं।
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क्यों लिया भगवान से विवाह का फैसला?
दिव्यांगता के कारण तमन्ना के लिए सामान्य सांसारिक विवाह में कई तरह की चुनौतियां थीं। ऐसे में उनकी मां को पूजा के दौरान विचार आया कि क्यों न बेटी का विवाह साक्षात जगत के पालनहार श्रीकृष्ण से कराया जाए।
जब यह विचार परिवार के अन्य सदस्यों और समाज के बुजुर्गों के सामने रखा गया, तो सभी ने इसका समर्थन किया। तमन्ना ने भी श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मानकर इस दिव्य बंधन के लिए अपनी सहमति दे दी।
चांदी के 'दूल्हे' और सोने का लेप
शादी की तैयारियां किसी शाही विवाह से कम नहीं हैं। तमन्ना के पिता मंगल सिंह खंगारोत ने इस विवाह के लिए विशेष रूप से भगवान कृष्ण की एक सुंदर चांदी की प्रतिमा तैयार करवाई है, जिस पर सोने की पॉलिश की गई है।
विवाह की दिव्यता को बनाए रखने के लिए परिवार विशेष रूप से वृंदावन के भांडीर वन गया था। वहां से वे सुहाग की सामग्री और सिंदूर लेकर आए हैं। मान्यता है कि इसी स्थान पर ब्रह्माजी ने राधा-कृष्ण का विवाह कराया था।
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पारंपरिक रीति-रिवाजों से होगा विवाह
यह विवाह पूरी तरह से हिंदू संस्कारों के अनुसार संपन्न होगा। इसमें हल्दी, मेहंदी, महिला संगीत और बारात जैसी सभी रस्में श्रद्धापूर्वक निभाई जा रही हैं। 2 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर सात फेरे लिए जाएंगे।
परिजनों ने इस उत्सव के लिए करीब 400 निमंत्रण पत्र बांटे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस अनूठे विवाह के साक्षी बनने के लिए लगभग दो हजार लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे।
सोशल मीडिया पर भी इस शादी के डिजिटल आमंत्रण भेजे गए हैं, जिससे यह चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग तमन्ना की इस अटूट श्रद्धा और उनके माता-पिता के इस अनूठे फैसले की सराहना कर रहे हैं।
भक्ति और सामाजिक संदेश
यह विवाह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए भी एक संदेश है जो दिव्यांग बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। तमन्ना का समर्पण समाज को भक्ति की शक्ति का अहसास करा रहा है।
जयपुर के जोबनेर इलाके में इस समय उत्सव का माहौल है। हर कोई उस पल का इंतजार कर रहा है जब तमन्ना लाल जोड़े में सजकर अपने आराध्य देव के साथ सात फेरों के पवित्र बंधन में बंधेंगी।
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