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राजस्थान

हवामहल में एटीएस की मॉक ड्रिल: जयपुर: हवामहल में ATS की मॉक ड्रिल, कमांडो ने किया अभ्यास

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जयपुर के हवामहल में एटीएस की ईआरटी टीम ने काउंटर-टेरर और रेस्क्यू का अभ्यास किया।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान पुलिस की एटीएस इकाई ने हवामहल में सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।
  • इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) ने काउंटर-टेरर और लाइव रेस्क्यू का अभ्यास किया।
  • मॉक ड्रिल के दौरान पर्यटकों की सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया जांची गई।
  • एएसपी राजेंद्र सिंह और अधीक्षक सरोजनी चंचलानी की निगरानी में ड्रिल हुई।
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जयपुर | गुलाबी नगरी के विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हवामहल में बुधवार को राजस्थान पुलिस की आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने हाई-प्रोफाइल मॉक ड्रिल का आयोजन किया। भारी हथियारों से लैस कमांडो को अचानक देखकर पर्यटकों और स्थानीय दुकानदारों में हड़कंप मच गया।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा और कमांडो ड्रिल

एटीएस की चौथी इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। कमांडो ने हवामहल के मुख्य प्रवेश और निकास मार्गों को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया।

अभ्यास के दौरान कमांडो ने 'टैक्टिकल कॉर्डन' तैयार किया। इसके माध्यम से जवानों ने कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत को सुरक्षा घेरे में ले लिया ताकि कोई भी बाहरी हस्तक्षेप न हो सके।

हवामहल की संकरी गलियों और 953 नक्काशीदार खिड़कियों के बीच यह ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था। जवानों ने इमारत के विभिन्न हिस्सों में पहुंचकर काउंटर-टेरर ड्रिल का जीवंत प्रदर्शन किया।

जीरो रिस्पॉन्स टाइम का हुआ परीक्षण

इस पूरी मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य "जीरो रिस्पॉन्स टाइम" पर जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया को परखना था। आपात स्थिति में जवान कितनी जल्दी मोर्चा संभालते हैं, इसकी जांच की गई।

टीम कमांडर दिनेश कुमार मीणा और सीएचएम मुकेश सैनी के नेतृत्व में जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। उन्होंने आधुनिक हथियारों और नाइट विजन उपकरणों के साथ मूवमेंट का अभ्यास किया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेंद्र सिंह और हवामहल की अधीक्षक सरोजनी चंचलानी ने इस पूरी ड्रिल की निगरानी की। उन्होंने सुरक्षा मानकों और समन्वय की बारीकी से समीक्षा की।

पर्यटकों की सुरक्षा और सुरक्षित निकासी

मॉक ड्रिल के दौरान सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यटकों की सुरक्षित निकासी (Emergency Evacuation) था। टीम ने काल्पनिक आतंकी हमले की स्थिति में पर्यटकों को बिना चोट पहुंचाए बाहर निकाला।

जब हथियारबंद जवान तैनात हुए, तो कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति बनी। लेकिन प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से तुरंत घोषणा की कि यह केवल एक सुरक्षा अभ्यास है।

हवामहल की जटिल संरचना रेस्क्यू ऑपरेशन्स को कठिन बनाती है। यहाँ की संकरी सीढ़ियाँ और ऊँची मंजिलें सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं, जिसका अभ्यास किया गया।

"इस ड्रिल का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना है। हम किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" - राजेंद्र सिंह, एएसपी

वैश्विक पर्यटन स्थल की संवेदनशीलता

हवामहल राजस्थान के पर्यटन का चेहरा है और यहाँ प्रतिदिन हजारों देशी-विदेशी सैलानी आते हैं। इसकी सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

परकोटा क्षेत्र और बड़ी चौपड़ जैसे व्यस्त बाजार के पास स्थित होने के कारण हवामहल सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है। एटीएस ने अपनी तकनीकी दक्षता का यहाँ सफल प्रदर्शन किया।

अभ्यास के दौरान जवानों ने विभिन्न मंजिलों पर पोजीशन ली और संभावित खतरों को बेअसर करने की रणनीति पर काम किया। यह अभ्यास पूरी तरह सफल और संतोषजनक रहा।

अधीक्षक सरोजनी चंचलानी ने बताया कि ऐतिहासिक स्मारक को बिना किसी नुकसान पहुँचाए यह ड्रिल की गई। इससे भविष्य में सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित होगा।

निष्कर्ष: सुरक्षा तैयारियों का सफल संदेश

जयपुर में हुई इस मॉक ड्रिल ने सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी को साबित किया है। इस तरह के नियमित अभ्यास न केवल जवानों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि जनता में भी सुरक्षा का भाव पैदा करते हैं।

अंततः, यह ड्रिल सफल रही और इसने प्रदर्शित किया कि जयपुर की ऐतिहासिक धरोहरें और यहाँ आने वाले पर्यटक सुरक्षित हाथों में हैं। पुलिस प्रशासन निरंतर ऐसी गतिविधियों से सतर्कता बनाए रखेगा।

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