जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के हरमाड़ा इलाके में स्थित मैक्स हाइट्स अपार्टमेंट में रविवार शाम एक रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया है। इस घटना ने न केवल एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। अपार्टमेंट के गार्डन में खेल रही एक 12 वर्षीय मासूम बच्ची उस वक्त गंभीर रूप से घायल हो गई, जब जर्जर अवस्था में खड़े झूले का भारी-भरकम स्टैंड अचानक उखड़कर उसके चेहरे पर गिर पड़ा।
जयपुर: झूला टूटने से बच्ची घायल: जयपुर के मैक्स हाइट्स अपार्टमेंट में बड़ा हादसा, झूला टूटने से 12 साल की बच्ची की नाक की हड्डी टूटी, मेंटेनेंस कंपनी पर FIR दर्ज
जयपुर के हरमाड़ा स्थित मैक्स हाइट्स अपार्टमेंट में एक जर्जर झूला गिरने से 12 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे में बच्ची के चेहरे पर गहरी चोटें आई हैं और पुलिस ने मेंटेनेंस कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
HIGHLIGHTS
- जयपुर के हरमाड़ा स्थित मैक्स हाइट्स अपार्टमेंट में झूला टूटने से 12 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई।
- हादसे में बच्ची की नाक की हड्डी टूट गई है और चेहरे पर गहरे जख्म आए हैं, जिसका अस्पताल में इलाज जारी है।
- परिजनों का आरोप है कि मेंटेनेंस कंपनी भारी शुल्क लेने के बावजूद उपकरणों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरत रही है।
- हरमाड़ा थाना पुलिस ने बच्ची के पिता की शिकायत पर संबंधित मेंटेनेंस कंपनी के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया है।
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नानी के घर आई थी मासूम आशी
जानकारी के अनुसार, घायल बच्ची का नाम आशी पारीक (12) है, जो अपनी मां के साथ हरमाड़ा स्थित अपनी नानी के घर छुट्टियां बिताने आई हुई थी। रविवार की छुट्टी होने के कारण वह शाम के समय अपार्टमेंट के पार्क में अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। जैसे ही आशी ने वहां लगे एक झूले का इस्तेमाल करना शुरू किया, जंग लगा और कमजोर हो चुका झूले का लोहे का स्टैंड अचानक टूट गया। भारी लोहे का ढांचा सीधे आशी के चेहरे पर जा गिरा, जिससे वह मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ी।
नाक की हड्डी टूटी, चेहरे पर आए गहरे जख्म
हादसे के तुरंत बाद वहां मौजूद अन्य बच्चों और निवासियों में हड़कंप मच गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार, बच्ची की नाक पर गंभीर फ्रैक्चर (हड्डी टूटना) हुआ है और चेहरे पर गहरी चोटों के कारण उसकी स्थिति काफी दर्दनाक बनी हुई है। डॉक्टरों ने बताया कि चेहरे पर आई चोटों के निशान मिटने में लंबा समय लग सकता है और नाक की सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है। मासूम बच्ची के चेहरे पर आए इन निशानों ने उसे जिंदगी भर का जख्म दे दिया है।
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मेंटेनेंस कंपनी की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
इस हादसे ने अपार्टमेंट में रहने वाले 350 से अधिक परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रहवासियों का आरोप है कि अपार्टमेंट की मेंटेनेंस कंपनी हर महीने निवासियों से भारी-भरकम शुल्क वसूलती है। इसके बावजूद सुविधाओं और उपकरणों के रखरखाव के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पार्क में लगे झूले लंबे समय से जर्जर स्थिति में थे और उनमें स्पष्ट रूप से जंग लगा हुआ दिखाई दे रहा था। कई बार मौखिक और लिखित शिकायत करने के बावजूद कंपनी ने इनकी मरम्मत की जहमत नहीं उठाई।
350 परिवारों की सुरक्षा दांव पर
निवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते इन झूलों की जांच और वेल्डिंग करा दी जाती, तो आज एक मासूम बच्ची अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से नहीं कराह रही होती। लोगों का कहना है कि अपार्टमेंट प्रशासन केवल पैसे वसूलने में रुचि रखता है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा उनके लिए कोई प्राथमिकता नहीं है। पार्क में अन्य उपकरण भी काफी पुराने हो चुके हैं और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस घटना के बाद से अपार्टमेंट के अन्य अभिभावक भी अपने बच्चों को बाहर भेजने से डर रहे हैं।
पुलिस ने दर्ज किया आपराधिक मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरमाड़ा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। थानाधिकारी उदय यादव ने बताया कि सोमवार को बच्ची के पिता अश्वनी पारीक की ओर से एक लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर अपार्टमेंट की संबंधित मेंटेनेंस कंपनी के खिलाफ लापरवाही बरतने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि झूले के रखरखाव के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कौन था और पिछली शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
जयपुर में बढ़ता सुरक्षा संकट
यह पहली बार नहीं है जब जयपुर की किसी बड़ी आवासीय सोसाइटी में इस तरह की लापरवाही सामने आई है। इससे पहले भी कई अपार्टमेंट्स में लिफ्ट गिरने या आग लगने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेंटेनेंस कंपनियों पर सख्त लगाम कसने की जरूरत है। साथ ही नगर निगम और विकास प्राधिकरण को भी समय-समय पर इन सोसायटियों के सुरक्षा ऑडिट करने चाहिए। केवल शुल्क वसूलना ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि निवासियों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना भी इन कंपनियों का वैधानिक कर्तव्य है।
निष्कर्ष और आगामी कदम
आशी पारीक के परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि दोषी कंपनी के अधिकारियों को सख्त सजा मिले। स्थानीय निवासियों ने अब एकजुट होकर मेंटेनेंस कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सभी झूलों और अन्य उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, वे चुप नहीं बैठेंगे। फिलहाल, पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और जल्द ही कंपनी के जिम्मेदारों से पूछताछ की जाएगी। यह घटना सभी हाउसिंग सोसायटियों के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भारी पड़ सकता है।
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