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राजस्थान

जयपुर मसाला मेला: रिकॉर्ड तोड़ बिक्री: जयपुर में सहकार मसाला मेला संपन्न, रिकॉर्ड 5.50 करोड़ की बिक्री

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

जयपुर के जवाहर कला केंद्र में आयोजित मसाला मेले ने बिक्री के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

HIGHLIGHTS

  • मेले में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की गई है।
  • कुल 160 स्टॉल्स लगाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 अधिक थे।
  • पहली बार उपभोक्ताओं के लिए ट्रॉली और जेनेरिक दवा जागरूकता स्टॉल की व्यवस्था की गई।
  • कॉनफेड, कोटा भंडार और मथानिया समिति बिक्री के मामले में शीर्ष स्थान पर रहे।
jaipur national sahakar masala mela record sales 2026

जयपुर | जयपुर के जवाहर कला केंद्र में आयोजित दस दिवसीय 'राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला-2026' का रविवार को भव्य समापन हो गया। इस मेले ने इस बार सफलता के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मेले के दौरान कुल 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के मसालों और अन्य उत्पादों की बिक्री हुई। यह राजस्थान के सहकारिता इतिहास में अब तक की सर्वाधिक बिक्री का आंकड़ा माना जा रहा है। सहकारिता विभाग के अनुसार, यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.25 करोड़ रुपये अधिक है। इस बड़ी सफलता से विभाग के अधिकारियों और सहकारी संस्थाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

नवाचारों और आधुनिक सुविधाओं से भरा रहा मेला

सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने बताया कि इस बार का मेला कई मायनों में ऐतिहासिक और खास रहा। मेले में पहली बार लगभग 160 स्टॉल्स पर उत्पादों की प्रदर्शनी की गई। यह अब तक की सर्वाधिक स्टॉल संख्या है, जो पिछले वर्ष से लगभग 40 अधिक थी। मेले में पहली बार उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ट्रॉली की व्यवस्था भी की गई थी। आमजन में जागरूकता बढ़ाने और जेनेरिक दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पहली बार जेनेरिक मेडिसिन जागरूकता स्टॉल भी लगाई गई। इससे लोगों को काफी लाभ हुआ। मेले में आर्गेनिक उत्पादों, अन्न उत्पादों, एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और जीआई टैग उत्पादों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाया गया। इससे ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी मिली। मेले में पहली बार ग्राम सेवा सहकारी समितियों और कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) द्वारा बहुत ही प्रभावी भागीदारी की गई। इससे स्थानीय किसानों को अपना हुनर दिखाने का मौका मिला।

डॉ. समित शर्मा ने कहा, "मेले में पहली बार ट्रॉली, जेनेरिक मेडिसिन और जीआई टैग उत्पादों का समावेश किया गया, जिससे आमजन को खरीदारी में काफी सुविधा और गुणवत्ता मिली।"

पुरस्कार वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

समापन समारोह में सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भोमाराम, रणजीत सिंह चूंडावत और मदनलाल गुर्जर ने श्रेष्ठ स्टॉल्स को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। श्रीमती सोनल माथुर और राजेन्द्र सिंह ने भी विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर अन्य राज्यों की सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष संस्थाओं का भी सम्मान हुआ। मेले में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसने जयपुरवासियों का भरपूर मनोरंजन किया। इन कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए खंड अधिकारियों को भी सराहा गया। समारोह के दौरान कृभको के क्षेत्रीय निदेशक रणजीत सिंह भी मंचासीन रहे। बड़ी संख्या में सहकारिता विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।

बिक्री में इन सहकारी संस्थाओं ने मारी बाजी

सर्वाधिक बिक्री की श्रेणी में शीर्ष संस्थाओं में कॉनफेड ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं तिलम संघ ने द्वितीय और आरसीडीएफ (जयपुर डेयरी) ने तृतीय स्थान हासिल किया। जिला उपभोक्ता भंडारों की बात करें तो कोटा भंडार प्रथम स्थान पर रहा। उदयपुर भंडार ने दूसरा और बारां भंडार ने तीसरा स्थान प्राप्त कर अपनी उपयोगिता साबित की। क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में मथानिया प्रथम, बिलाड़ा द्वितीय और नागौर तृतीय रही। ग्राम सेवा सहकारी समितियों में पलसाना (सीकर) और निमोद समितियों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। नवाचार श्रेणी में उत्कृष्ट कार्य हेतु बाड़मेर जिले की सुंदरा ग्राम सेवा सहकारी समिति को विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया। ले आउट श्रेणी में भी कई संस्थाओं ने पुरस्कार जीते। ले आउट में उदयपुर भंडार और नागौर समिति ने अपने आकर्षक प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। अजमेर और सोजत रोड की समितियों को भी उनकी मेहनत के लिए पुरस्कार मिला। यह मसाला मेला न केवल मसालों की शुद्धता का प्रतीक बना, बल्कि इसने सहकारी आंदोलन को भी नई मजबूती प्रदान की है। जयपुर की जनता अब अगले वर्ष के मेले का इंतजार कर रही है।

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